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- Purnia News 106 Mm Of Rain In 24 Hours Mercury Dropped 65 Degrees No Relief Till Tomorrow
24 घंटे में 10.6 मिमी बारिश, 6.5 डिग्री गिरा पारा, कल तक राहत नहीं
बेमौसम बरसात और देर रात से हो रही बारिश के कारण से चैत में सावन-भादो का नजारा दिखने लगा है। दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्र के आने वाले बादलों के कारण से आसमान में दिन भर बादल छाए रहे। दिन भर रुक-रुक कर बारिश होती रही। लगातार बारिश के कारण से तापमान में अचानक गिरावट के कारण से एक बार फिर से ठंड का असर देखने को मिला। पिछले 24 घंटे में 10.6 मिमी बारिश हुई। मार्च में अब तक 60.1 मिली मीटर बारिश हो चुकी है। सोमवार से मौसम बदलने के आसार हैं।
राहत की बात यह हुई बारिश के दौरान हवा की रफ्तार कम देखने को मिली और बारिश के साथ ओले नहीं गिरे। हवा की रफ्तार तेज रहने और ओला गिरने से फसलों को काफी नुकसान पहुंच सकता था। शुक्रवार देर रात से हो रही बारिश के कारण से शहर के न्यूनतम तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिली। शनिवार को शहर का न्यूनतम तापमान 18.7 डिग्री दर्ज किया गया।शनिवार को शहर का अधिकतम तापमान 6.5 डिग्री लुढ़क कर 22.5 डिग्री दर्ज किया गया। शनिवार की सुबह वायुमंडल में आर्द्रता का प्रतिशत 98 प्रतिशत था, जो शाम के समय 98 प्रतिशत दर्ज किया गया।
पूर्णिया मौसम केंद्र प्रभारी एसके सुमन ने बताया कि दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्र से आ रहे बादल के कारण से मौसम में बदलाव हुआ है। वर्तमान में वायुमंडल का दबाव घट रहा है। रविवार को भी मौसम में बदलाव की उम्मीद नहीं है। सोमवार के बाद से मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा।
चैत मास में सावन जैसा मौसम...
हवा की तेज रफ्तार रहने और ओला गिरने से फसलों को हो सकता था नुकसान
ग्लोबल वार्मिंग के कारण से बदल रहा पैटर्न पिछले साल की तुलना में मार्च में ज्यादा बारिश
पूर्णिया मौसम केंद्र की जानकारी के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस साल मार्च महीने में काफी ज्यादा बारिश हुई है। साल 2019 में 27 मार्च को हल्की बूंदाबांदी हुई थी, जिसे मापा नहीं जा सका था। इस साल मार्च महीने में 6 मार्च को 17.6 मिमी, 7 मार्च को 15.2 मिमी, 8 मार्च को 16.7 डिग्री और 14 मार्च को 10.6 डिग्री बारिश दर्ज की गई है। चार दिनों में अब तक 60.1 मिमी की बारिश दर्ज हो चुकी है। मौसम केंद्र के वैज्ञानिक भी इसे ग्लोबल वार्मिंग का ही प्रभाव मानते हैं। आत्मा के उप परियोजना निदेशक और कृषि एक्सपर्ट हरिमोहन मिश्रा बताते हैं कि पिछले कुछ सालों से मौसम में काफी ज्यादा बदलाव देखने को मिल रहा है। रबी की खेती के समय वेदर साइकिल पीछे और खरीफ के समय आगे की ओर बढ़ रहा है। बेमौसम बरसात हो रही है। पिछले साल भी मानसून की सीजन में इसका असर देखने को मिला था। महज एक-दो दिनों में भारी बारिश के कारण से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। आत्मा के उप परियोजना निदेशक बताते हैं कि किसानों के लिए राहत की बात यह है कि बारिश के दौरान हवा की रफ्तार तेज नहीं थी और ओले नहीं गिरे। तेज बारिश व ओले पड़ने पर फसलों को नुकसान पहुंच सकता था। लगातार बूंदाबांदी बारिश से फसलों को कम नुकसान की उम्मीद है। जिन गेहुओं के बालियों में दाने आ गए हैं, उन गेहुंओं को फायदा मिलेगा। साथ ही साथ मक्का और आम के मंजर को भी कम नुकसान पहुंचा है।
शनिवार की सुबह बारिश की वजह से शहर के गंगा-दार्जलिंग सड़क पर पसरा सन्नाटा।