समन्वित कीट प्रबंधन से फसलों काे नुकसान कम

Purnia News - भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय में चल रहे कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:50 AM IST
Purnia News - decreased loss of crops from integrated pest management
भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय में चल रहे कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संस्थानों से आए हुए विषय विशेषज्ञों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे लोगों को कीटों से होने वाले फसलों को नुकसान समेकित कृषि प्रणाली, पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोगम जैविक खाद के इस्तेमाल और उनसे होने वाले फायदे, फसल बुआई से पहले बीजों के उपचार के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिक डॉ. पारसनाथ ने प्रशिक्षणार्थियों को कीट के द्वारा होने वाले नुकसान के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि वर्तमान उत्पादन तीव्रगति से अपेक्षा के हिसाब से नहीं बढ़ पा रहा है और खेती योग्य जमीन सीमित हो रही है। ऐसी परिस्थिति में उत्पादन के साथ कीट व्याधियों द्वारा होने वाली हानि को समन्वित कीट प्रबंधन के माध्यम से कम किया जा सके तो यह एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है।

किसानों को मिली पशुपालन व मत्स्य पालन की जानकारी : वहीं तकनीकी सत्र शस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मिथिलेश कुमार ने प्रतिभागियों को समेकित कृषि प्रणाली के सभी अवयवों पर विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की गई। इसमें मुख्य रूप से समेकित कृषि प्रणाली में पोषक तत्व प्रबंधन के अन्तर्गत पशुपालन, बकरी पालन, मछली पालन अवयवों पर एवं उनके लाभ के बारे में बताया। मृदा विशेषज्ञ शशि प्रकाश विश्वकर्मा, सिंचाई अनुसंधान केन्द्र मधेपुरा ने मिट्टी जांच के आधार पर पोषक तत्वों के संतुलित प्रयोग के बारे में जानकारी दी गई। जबकि शस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. गोपाल लाल चौधरी ने प्रतिभागियों को मौसम के अनुकूल तापक्रम के बदलते प्रभाव के आधार पर कीट रोग एवं फसल प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान पौध रोग वैज्ञानिक डॉ. जे एन श्रीवास्तव द्वारा प्रतिभागियों को समेकित रोग प्रबंधन के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा साथ ही साथ उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी फसल की बुआई से पूर्व फसल के बीजों का उपचार कवक नाशी, जीवाणु नाशी, विषाणु नाशी से अवश्य करना चाहिए।विभागाध्यक्ष मृदा विज्ञान डॉ. जनार्दन प्रसाद ने प्रशिक्षणार्थियों को मिट्टी जाँच प्रयोगशाला के विभिन्न उपकरणों की पहचान करायी एवं उसके क्रियाविधि के बारे में जानकारी प्रदान की।

मृदा स्वास्थ्य के लिए केंचुआ खाद आवश्यक : डॉ. पंकज कुमार यादव, सहायक प्राध्यापक-सह-कनीय वैज्ञानिक ने प्रशिक्षणार्थियों को केंचुआ खाद की विशेषता बताई। समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स के आयोजन समिति के वैज्ञानिक सदस्यों में डॉ. जेएन श्रीवास्तव, डॉ.जनार्दन प्रसाद, डॉ.अनिल कुमार, डॉ. तपन गोराइ एवं जेपी प्रसाद, डॉ. रुबी साहा आदि ने अपना सहयोग प्रदान किया।

भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय में प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षणार्थी।

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