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कल मनाई जाएगी होली, होलिकादहन आज संध्या 6. 22 से रात 8.49 तक शुभ मुहूर्त
रंगों का त्योहार होली मंगलवार को है। इससे पहले सोमवार शाम को होलिका दहन किया जाएगा। होलिका दहन का शुभ समय संध्या 6:22 से रात 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। साथ ही 10 मार्च को रंगों से होली खेली जाएगी। होली का शुभ मुहूर्त भद्रा पुंछ सुबह 09 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा भद्रा मुख : सुबह 10 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा चिकित्सकों की मानें तो इन दिनों देश में कोरोना वायरस का प्रकोप चल रहा है। ऐसी स्थिति में ज्यादा भीड़भाड़ से बचें और साफ सफाई पर विशेष रूप से ध्यान दें। साथ ही जिन लोगों को सर्दी व खांसी की शिकायत है वैसे लोगों से एक मीटर की दूरी बातचीत करें। अपने नाक व चेहरे को मास्क से ढकें।
होली खेलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
} रंग लगने से पहले पूरे शरीर और बालों पर तेल लगाना न भूलें।
}रंग लगते ही तुरंत बाद इसे पानी से धो लें, इससे रंग सूख नहीं पायेगा और हल्का हो जाएगा।
} नाखूनों पर गहरे रंग की नेल-पॉलिश लगा लें ।
}आंखों को रंगों से बचाने के लिए चश्मा लगाएं।
} फुल स्लीव्स के कपड़े पहनें।
बरतें ये सावधानियां
}नेचुरल रंगों का इस्तेमाल करें।
} परमानेंट रंगों से दूर रहें क्योंकि इनमें डाई होती है, जो बहुत नुकसानदेह होता है।
} रंगों के अत्यधिक प्रभाव से बाल रूखे और बेजान हो सकते हैं, इसलिए होली बहुत सावधानी से खेले।
}गोल्डन और सिल्वर रंगों का इस्तेमाल भूलकर भी ना करे,त्वचा पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।
}गहरे रंगों का इस्तेमाल न करें इसमें केमिकल्स होते है। जिस वजह से स्किन एलर्जी और बालों से जुड़ी समस्या हो सकती है।
} रंग लगाते वक़्त ध्यान रखें कि रंग आपके मुंह, नाक और आंख में न जाए। वरना सांस लेने में दिक्क्त और आंखों में जलन हो सकती है।
इन बातों का भी रखें ख्याल
}होली खेलने के बाद जब रंग छुड़ाए तो बहुत अधिक साबुन का इस्तेमाल न करें, इससे त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
} रंग को छुड़ाते वक़्त ध्यान रखें कि रंग का पानी कान में न जाए।
होली में करें त्वचा की विशेष देखभाल
आजकल रंगों में भारी मात्रा में मिलावट हो रही है। इसलिए, रंगों को खरीदते समय थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। डॉ. देवी राम बताते हैं कि पहले होली में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता था, जो हमारे लिए नुकसान देह नहीं होता था। होली में इस्तेमाल किए जाने वाला अधिकांश सूखा गुलाल और गीले रंगों में माइका, लेड जैसे केमिकल पाए जाते हैं। इसलिए होली के दौरान प्राकृतिक रंग-गुलाल का इस्तेमाल पर ज्यादा जोर देना चाहिए।
कलवार समाज ने होली मिलन समारोह में एक-दूसरे को गुलाल लगाया, फूलों से खेली होली और गले लग कर दी बधाईयां।