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- Purnia News If The Survey Was Done 7 Years Ago It Would Have Earned 30 To 35 Crores
7 वर्ष पहले के सर्वे पर होता अमल तो 30 से 35 करोड़ होती कमाई
सात वर्ष पूर्व डीएफआईडी संस्था के सदस्यों ने शहर में हाउस होल्डिंग टैक्स पेयर व ट्रेड लाइसेंस टैक्स को लेकर सर्वे का काम किया था। इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि अब नगर निगम के राजस्व में इजाफा होगा और शहर में सुविधाएं बढ़ेंगी, लेकिन तमाम कवायदों के बाद फाइल कहां गुम हो गई। निगम पदाधिकारी कोई माकूल जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।
बता दें कि जो सर्वे किया गया था उसके अनुसार शहर का मूल टैक्स 30-35 करोड़ हो जाता जो कि 17 करोड़ के मुकाबले दोगुना हो जाता। सर्वे का काम पूरा होने के बाद फाइल कहां और क्यों अटकी है। इसकी जानकारी निगम के कर्ताधर्ताओं के पास नहीं है। इसे लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग के उच्च पदस्थों ने सात फरवरी को पटना में बैठक कर जीआईएस मैपिंग एंड डाटा इंटीग्रेशन की रूपरेखा तैयार की है। इसे लेकर सूबे के सभी नगर निकायों को इत्तिला दी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्र की पूरी जानकारी विभाग को मुहैया कराएं ताकि जीआईएस मैपिंग के कार्य को गति दी जा सके।
जल्द होगी निविदा की प्रक्रिया : जीआईएस मैपिंग के कार्य को निष्पादित करने के लिए पटना में निविदा की प्रक्रिया की जा रही है। इसके लिए 17 फरवरी को दोबारा बैठक भी हुई और इसी माह इस प्रपोजल को फाइनल करने की योजना है। यदि ऐसा होता है तो बेशक पूर्णिया नगर निगम समेत सूबे के सभी नगर निकायों में टैक्स की राशि में न सिर्फ इजाफा होगा बल्कि विकास कार्यों को पंख लगेंगे। वर्तमान में पूर्णिया नगर निगम के द्वारा 17.50 करोड़ रूपए बतौर होल्डिंग टैक्स की उगाही की जाती है। यदि जीआईएस मैपिंग का कार्य ससमय पूरा कर लिया गया तो बेशक टैक्स की राशि में दोगुना इजाफा होगा। हालांकि अब तक विभागीय स्तर पर कार्य को गति देने के लिए निगम के पदाधिकारी को कोई दिशा निर्देश नहीं प्राप्त हुआ है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जाएगा राशि का उपयोग : नगर विकास एवं आवास विभाग के उच्च पदस्थों की हुई बैठक में जीआईएस मैपिंग को ले जहां चर्चा हुई वहीं टैक्स की राशि में बढ़ोत्तरी होने के बाद इसका उपयोग अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्बन एडमिनिस्ट्रेशन और म्यूनिसिपल बॉडीज में करने का भी निर्णय लिया गया है। नगर विकास विभाग में पहले से उपलब्ध मैप एवं आंकड़ों की वेब लिंकिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। यही नहीं कंसल्टेंट को वेब पोर्टल और मोबाइल एप विकसित करने को लेकर विभाग द्वारा निर्देश दिया गया है। ताकि वेंडर द्वारा किए जा रहे कार्यों की निगरानी की जा सके और आमजनों को इसका लाभ मिल सके।
दिशानिर्देश मिलने के बाद होगी कार्रवाई
पांच वर्ष पूर्व हुए सर्वे के कार्य को लेकर कोई जानकारी नहीं है। संबंधित कर्मियों से जानकारी इकट्ठा करने के बाद व विभागीय दिशा निर्देश मिलने के बाद ही कोई कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विजय कुमार सिंह, नगर आयुक्त, नगर निगम पूर्णिया