पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Purnia News Madhu The Eighth Pass Once Used To Break Ballast On The Road Today In Assam And Arunachal Women Were Being Trained To Form Groups

आठवीं पास मधु कभी सड़क पर गिट्टी तोड़ने का करती थी काम, आज असम और अरुणाचल में महिलाओं को समूह बनाने की दे रही ट्रेनिंग

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पूर्णिया | कहते हैं कि अगर आपमें कुछ करने का जूनून हो तो कोई भी बाधा आपको आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती है। बीकोठी के हरिराही की मधु देवी इसकी मिसाल है। जो पहले गिट्‌टी काटने का काम करती थीं, आज वे दूसरे राज्यों में महिलाओं को ट्रेनिंग दे रही हैं। दूसरी ओर पति की मौत के बाद सविता देवी ने हिम्मत नहीं हारी और जीविका के माध्यम से अपने पैरों पर खड़ी हुईं और दूसरे को आत्मनिर्भर बना रही हैं।

{बासु मित्र की एक रिपोर्ट।

पूर्णिया | मुश्किल वक्त में परिस्थितियों से जूझते हुए आत्मनिर्भर बना जा सकता है। रुपौली प्रखंड के गोरियर पूर्व पंचायत के घरिया टोला निवासी सविता देवी इसकी उदाहरण हैं। पति की मौत के बाद सविता ने हिम्मत नहीं हारी और मेहनत के बल पर परिवार का सहारा बनी। आज वह जीविका के माध्यम से अपने दम पर अपने बच्चों का सही से लालन-पालन करने के साथ-साथ पैसों का बचत कर रही है। सविता का यह प्रयास अपने परिवार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने समाज की दूसरी महिलाओं को इसके लिए प्रेरित कर रही हैं। साथ ही 50 महिलाओं को जीविका के माध्यम से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया है।

सविता देवी बताती हैं कि पहले वह अपने पति राजकुमार भगत के साथ एक छोटा सा दुकान चलाती थी। सविता की हालत देखकर प्रगतिशील जीविका महिला ग्राम संगठन ने सविता का चयन सतत जीविकोपार्जन योजना के लिए किया गया। सतत जीविकोपार्जन योजना से जुड़ने के बाद सविता ने फिर से दुकान चलाना शुरू किया। धीरे-धीरे सविता की दुकान चलने लगी। आज सविता प्रतिदिन 1500 से 4 हजार रूपये का कारोबार करती है। सविता बताती हैं कि उन्होंने अपनी जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव देखा है। मैं नहीं चाहती कि दूसरी महिलाएं भी इस परेशानी से गुजरे। जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक सुनिर्मल गरेन बताते हैं कि जीविका ग्राम संगठनों के द्वारा आम सभा के माध्यम से लाभुकों का चयन किया जाता है।

सविता बनी आत्मनिर्भर, 50 महिलाओं को भी किया

अपने दुकान के साथ सविता देवी।

पूर्णिया | बीकोठी प्रखंड के हरिराही गांव की मधु देवी की परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इस कारण वह केवल आठवीं तक पढ़ी। मधु परिवार के जीवन यापन के लिए दूसरे के खेतों पर जाकर मजदूरी करने के साथ-साथ सड़क पर गिट्टी काटने का काम करती थी।

2008 में जीविका से जुड़ी मधु दीदी ने लक्ष्मी जीविका स्वयं सहायता समूह का निर्माण किया। उसके बाद मधु ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने गांव में गठित समूहों को मिला कर पहले ग्राम संगठन का निर्माण किया। इसके बाद जिले के अन्य गांवों में गरीब महिलाओं को संगठित कर समूह बनाने लगी। मधु के बढ़ते आत्मविश्वास को देख उसे प्रशिक्षक के रूप में मानदेय भी मिलने लगा। उसके बाद मधु रेणु जीविका प्रशिक्षण एवं शिक्षण केंद्र के निदेशक मंडल में चुनी गई। साल 2014 में पहली बार मधु असम राज्य जाकर वहां की महिलाओं को समूह निर्माण के लिए प्रेरित किया। मधु बताती हैं कि पहली बार जब वे असम में प्रशिक्षण के लिए गई थी तो काम पड़ी लिखी होने के कारण से थोड़ी सी परेशानी हुई लेकिन धीरे-धीरे उनकी झिझक कम होती गई। आज मधु झारखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ बिहार के विभिन्न जिलों में 5 हजार से ज्यादा महिलाओं को समूह और ग्राम संगठन से जोड़ कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी है। महिलाओं को प्रशिक्षित करने से उनके आय में काफी ज्यादा इजाफा हुआ।महज प्रशिक्षण से मधु को 5 लाख से ज्यादा की आय हुई है।

पांच हजार से ज्यादा महिलाओं को समूह से जोड़ा

अरुणाचल प्रदेश में महिलाओं को समूह निर्माण का प्रशिक्षण देती मधु देवी
खबरें और भी हैं...