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महाशिवरात्रि आज : सजा भोले बाबा का दरबार, शाम को निकलेगी शिव की बारात

Purnia News - जिले के दो महादेव मंदिर धीमेश्वर और वरुणेश्वर की अलग पहचान है। आज महाशिवरात्रि को लेकर दोनों मंदिरों में विशेष...

Feb 21, 2020, 09:01 AM IST
Purnia News - mahashivratri today punishment of bhole baba shiva39s procession will come out in the evening
जिले के दो महादेव मंदिर धीमेश्वर और वरुणेश्वर की अलग पहचान है। आज महाशिवरात्रि को लेकर दोनों मंदिरों में विशेष तैयारी की गई है। आसपास के लोग भारी संख्या में इन मंदिरों में पूजा-अर्चना को पहुंचते हैं। सुबह से ही शिव की आराधना को मंदिर में भीड़ लग जाती है। शाम को भव्य शिव की बारात निकलेगी। महाशिवरात्रि पर पेश है भास्कर की एक रिपोर्ट...।

कैसे जा सकते हैं


वरुणेश्वर महादेव मंदिर जाने के लिए पूर्णिया से बिहारीगंज जाने वाली बस के सीधे वरुणेश्वर मंदिर पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा बीकोठी से निजी वाहन से रघुवंश नगर के रास्ते और धमदाहा से वाया विष्णुपुर, कसमरा होते हुए भी पहुंचा जा सकता है।

2. 52 किलोमीटर दूर हे जिला मुख्यालय से वरुणेश्वर मंदिर

बीकोठी प्रखंड मुख्यालय से दक्षिण दिशा में बाबा वरुणेश्वर धाम मंदिर अवस्थित है। मंदिर कमेटी अध्यक्ष मदन मोहन सिंह ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर हजार वर्ष पूर्व वरुण मुनि साधना करते थे। उन्हें महाशिवरात्रि के दिन ही महादेव भोले के दर्शन हुए थे। कालांतर में वरुणेश्वर स्थान के शिवलिंग मिट्टी के नीचे दब गया था। सैकड़ों वर्ष बाद स्थानीय लोगों ने खुदाई कर शिवलिंग निकाला। दो नदियों के बीच मंदिर अवस्थित होने के कारण से इसे कोशी का बाबाधाम भी कहा जाता है।


कैसे जा सकते हैं


पूर्णिया-सहरसा जाने वाली बस या ऑटो से बनमनखी पहुंचने के बाद काझी हृदय जाने वाली सड़क पर 1 किमी की दूरी पर स्थित है बनमनखी से ऑटो या पैदल भी मंदिर पहुंचा जा सकता है।


1. 35 किलोमीटर दूर है पूर्णिया से धीमेश्वर महादेव मंदिर बनमनखी


बनमनखी का बाबा धीमेश्वर धाम का लगभग 150 साल का पुराना इतिहास है, परन्तुु पक्के मंदिर का निर्माण 60 के दशक में हुआ है। मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कमलेश्वरी प्रसाद सिंह ने बताया कि स्थल की बड़ी ही रोचक कहानी है। उनके अनुसार कभी चंपानगर ड्योढ़ी का यह भाग रहा था। बियावान रही इस जमीन पर किसी पवाय रजक के हल जोतने के दौरान यहां अवस्थित शिवलिंग टकराया था। उक्त स्थल पर हल जाते ही पानी का फव्वारा फूट पड़ा था, जिसे किसी प्रकार रोका जा सका। कहानी सुनकर चंपानगर के राजा ने पक्के मंदिर निर्माण की योजना बनाई। परन्तु तीन बार प्रयास असफल रहा। बाद में स्वप्न के मुताबिक 60 के दशक में प्रताप झा ने जनसहयोग से पक्के मंदिर का निर्माण कराया था।


वरुणेश्वर महादेव मंदिर में हजारों वर्ष पहले वरुण मुनि तपस्या करते थे। इसको कोसी का बाबाधाम भी कहा जाता है।

धीमेश्वर महादेव मंदिर को राजकीय महोत्सव का दर्जा प्राप्त है। यहां सावन में भव्य आयोजन होता है।

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