पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Purnia News Means Of Achieving The Ideals Of Tulsidas Epic Sacrifice Dedication And Dignity Sharma

तुलसीदास रचित महाकाव्य त्याग, समर्पण व मर्यादा के आदर्श प्राप्त करने के साधन : शर्मा

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कलाभवन साहित्य विभाग द्वारा कलाभवन साहित्य सभागार में गोस्वामी तुलसीदास जयंती समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। मंच संचालन साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ. निरूपमा रॉय ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चन्द्रानंद सीतेश ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य भरत शर्मा ने गोस्वामी तुलसीदास के तैलचित्र श्रद्धा पुष्प अर्पित व दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्णिया कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिथिलेश मिश्र उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथियों में प्रो. देवनारायण देव, भोलानाथ ठाकुर, प्रो. अमरेन्द्र ठाकुर, अजय सान्याल तथा रामनरेश भक्त उपस्थित थे। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन मे डॉ. चन्द्रानंद सीतेश ने तुलसीदास के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। पूर्णिया कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिथिलेश मिश्र ने तुलसीदास द्वारा रचित रचनाओं में योग की अवधारणा, शक्तिदायिनी नारी के स्वरूप की विस्तारपूर्वक चर्चा की।

कार्यक्रम के उद्धघाटनकर्ता आचार्य भरत शर्मा ने तुलसीदास रचित महाकाव्य त्याग, समर्पण और मर्यादा का आदर्श प्राप्त करने का साधन बताया। तुलसीदास के रचनाओं की भाषा को समाधि की भाषा कहा। विशिष्ट अतिथियों में देवनारायण पासवान देव ने तुलसीदास के चरित्र का चित्रण करते हुए कहा कि भातृत्व, मातृत्व, पितृत्व के संबंधों का आदर्श व्यख्यान है। रामचरितमानस में यही कुछ बात है कि हस्ती मिटती नही हमारी वही रामनरेश भक्त ने तुलसी को मर्यादा का आदर्श स्वरूप बताया। केके चौधरी ने रामचरितमानस के उद्धरण देकर रामायण में कैकयी, भरत, लक्ष्मण के सम्बधों का चित्रण किया। सुशीला भारती तथा सियाशरण भारती ने तुलसीदास पर केंद्रित स्वरिचित कविताओं का पाठ किया।

कलाभवन साहित्य सभागार में गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन

कलाभवन साहित्य सभागार में गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करते अतिथि।

तुलसीदास का जीवनकाल ही भारत वर्ष का स्वर्णिम भक्तिकाल

साहित्य विभाग की संयोजिका निरूपमा रॉय ने कहा कि तुलसीदास का जीवनकाल ही भारत वर्ष का स्वर्णिम भक्तिकाल है, तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस आज भी सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। संयोजिका ने बताया कि अन्य वक्ताओं ने भी तुलसीदास के व्यक्तित्व पर कार्यक्रम को सम्बोधित किया। इस अवसर पर गौरीशंकर पूर्वोत्तरी, संजय सनातन, मलय झा, सुमित प्रकाश, शिवाजी राव, सुनील समदर्शी, कन्हैया सिंह, डॉ. किशोर कुमार यादव, किरण सिंह, डॉ. निशा प्रकाश, आशीष झा, रोशन कुमार, मदन मोहन झा, कुंदन कुमार, एके यादव, पंकज कुमार, डॉ.अनिल कुमार, किरण रानी, राजेन्द्र पाठक इत्यादि उपस्थित थे।

खबरें और भी हैं...