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पॉली टनेल तकनीक से किसान बेमौसमी सब्जियों का कर सकेंगे उत्पादन / पॉली टनेल तकनीक से किसान बेमौसमी सब्जियों का कर सकेंगे उत्पादन

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 04:51 AM IST

Purnia News - जिले के किसानों के लिए खुशखबरी है। अब वे पॉली टनेल तकनीक से बेमौसम भी सब्जियों का उत्पादन कर सकेंगे। आमतौर पर यह...

Purnia News - pulley tunnel technology allows farmers to produce untested vegetables
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जिले के किसानों के लिए खुशखबरी है। अब वे पॉली टनेल तकनीक से बेमौसम भी सब्जियों का उत्पादन कर सकेंगे। आमतौर पर यह तकनीक बड़े शहरों में ही थी खासकर पड़ोसी राज्य झारखंड के रांची, हजारीबाग, जमशेदपुर समेत वहां के अन्य जिलों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में लाई जा रही हैं। इस तकनीक के बारे न सिर्फ कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ के विशेषज्ञ किसानों को बता रहे हैं बल्कि प्रायोगिक तौर पर सब्जियों का उत्पादन कर किसानों को दिखा रहे हैं कि किस तरह से कम लागत में पॉली टनेल तकनीक का सहारा लेकर बेमौसम भी सब्जियों का उत्पादन कर आमद बढ़ाया जा सकता है। इससे क्षेत्र के किसान काफी उत्साहित हैं। उन्हें नई तकनीक की जानकारी मिल रही है और उन्होंने अमल में लाने की बात भी कही है।

कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ के विशेषज्ञ किसानों को बता रहे बेहतर उत्पादन के तरीके,नई तकनीक से खेती की दी जा रही जानकारी, जैविक खाद के प्रयोग पर दिया जा रहा बल

बड़े शहरों की है तकनीक विश्वासपुर में हो रहा प्रयोग

कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ के विशेषज्ञों के द्वारा प्रखंड के विश्वासपुर में बेमौसमी सब्जी पौध उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस दिशा में बेमौसमी पौध उत्पादन पर उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि इस पॉली टनेल तकनीक से तैयार सब्जी पौध खुले में तैयार पौध से बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है। साथ ही ये पौधे बेहतर जीन के कारण कीट व रोग से मुक्त भी हैं। उन्होंने बताया कि सब्जी उत्पादकों की अक्सर यह शिकायत रहती है कि जितने बीज की बुआई वे करते हैं, उसके अनुपात में पौध तैयार नहीं होते हैं।

जलालगढ़ में पॉली टनेल तकनीक से हो रही सब्जी की खेती व जानकारी देते विशेषज्ञ।

किसान कर रहे नई तकनीक का प्रयोग पॉली टनेल विधि का सहारा ले रहे

कृषक संतोष कुमार के अनुसार वे विगत कई वर्षों से कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के संपर्क में हैं। अपनी अगेती खेती के लिए पॉली टनेल तकनीक का सहारा ले रहे हैं, जिसका फायदा उन्हें मिल रहा है। अपने खेत में अगेती सब्जियों का उत्पादन करने व आमद जुटाने के बाद उन्होंने इस नई तकनीक को अपने अन्य कृषकों के साथ साझा किया। संतोष ने बताया कि इस नई तकनीक काे अमल में लाने से उन्हें काफी संतुष्टि मिली है। उन्होंने इस तकनीक को साझा करने के दरम्यान करीब 50 हजार सब्जी पौध अन्य स्थानीय कृषकों के बीच बेचा था। जिससे उन्हें आर्थिक उपार्जन भी हुआ। वहीं जयप्रकाश सिंह, मिथिलेश कुमार, नवीन कुमार समेत कई अन्य कृषकों ने भी इस नई तकनीक को सराहा है।

जैविक खाद का करें उपयोग


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