मिट्‌टी जांच को प्रयोगशाला नहीं सीजन बीतने के बाद मिलती है रिपोर्ट / मिट्‌टी जांच को प्रयोगशाला नहीं सीजन बीतने के बाद मिलती है रिपोर्ट

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 04:46 AM IST

Purnia News - जिले के किसानों का गुस्सा अब धीरे-धीरे सरकार के प्रति फूटने लगा है। इस बात का एहसास तब हुआ, जब शनिवार को कृषि मंत्री...

Purnia News - soil investigation does not occur after the laboratory season passes
जिले के किसानों का गुस्सा अब धीरे-धीरे सरकार के प्रति फूटने लगा है। इस बात का एहसास तब हुआ, जब शनिवार को कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार खुश्कीबाग स्थित कृषि प्रशिक्षण केंद्र में स्वायल हेल्थ कार्ड का किसानों को वितरण करने आए थे। मंत्री जी के आते ही किसानों ने जमकर हंगामा करना शुरू कर दिया। मंत्री और पदाधिकारियों को काफी विरोध का सामना करना पड़ा। किसानों का गुस्सा फूटता देख मंत्री प्रेम कुमार ने आनन फानन में अपने भाषण को समाप्त कर करीब 20 किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड बांट कर चलते बने और बाकी किसानों को सदर विधायक विजय खेमका ने कार्ड का वितरण किया। वहीं कई किसान गुस्से में आकर मंत्री को जाते ही स्वायल हेल्थ कार्ड लिए बिना ही नाराज होकर कार्यक्रम स्थल से चले गए।

भास्कर ने शनिवार को जिले के कुछ किसानों से बात की तो उन्होंने व्यवस्था को लेकर काफी नाराजगी जताई। किसानों का कहना था कि जिले में खाद-बीज जांचने के लिए प्रयोगशाला नहीं है। किसानों को सीजन बीतने के बाद जांच रिपोर्ट मिलती है। जिला कृषि पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद को जब उनके सरकारी मोबाइल पर कॉल किया गया तो उन्होंने किसानों की समस्या सुनने के लिए मोबाइन रिसीव तक नहीं किया। मंत्री प्रेम कुमार कटिहार से चलने के बाद रानीपतरा में रूके और किसानों से मिले और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ के बारे बताया। वहीं मंत्री जी कृषि प्रशिक्षण केंद्र में पहुंचने के बाद किसानों को सरकारी लाभ के बारे में बताना शुरू ही किया था कि किसानों ने हंगामा कर दिया। किसानों का कहना था कि सरकार की योजना और लाभ की बातें सिर्फ कागज पर है। मंत्री जी जब भी आते हैं सिर्फ अपना और सरकार का गुनगान करते हैं। सरकार किसानों को क्या दे रही है यह किसी से छिपी नहीं है। किसानों ने कहा कि किसान की क्या समस्या है और किसान क्या चाहता है यह न तो मंत्री जी सुनते हैं और न ही जिले के पदाधिकारी सुनते हैं। मंत्री जी जब भी सिर्फ अपनी बातों को सुनाकर चले जाते हैं। किसानों ने कहा कि सरकार जब तक किसानों के मन की बात नहीं सुनती है तब तक किसानों की समस्या का समाधान संभव नहीं है।

असली-नकली की पहचान नहीं हो पाती

महेशचंद्र मंडल।

हर तरफ से ठगे जा रहे हैं जिले के किसान

निरंजन कुशवाहा।

कसबा के किसान महेश चंद्र मंडल ने बताया कि जिले में खुलेआम नकली खाद व बीज बिक रहा है। कौन असली और कौन नकली है इसकी पहचान नहीं हो पाती है। जिले में किसानों के लिए अलग से सरकारी सतर पर कोई भी दुकान की व्यवस्था नहीं है। सरकारी गोदामों में उपलब्ध बीज गुणवत्तापूर्ण नहीं है। सरकार किसानों को जरूरत के हिसाब से खाद बीज उपलब्ध नहीं करा पा रही है।

लोजद के जिलाध्यक्ष सह खाद बीज कारोबारी निरंजन कुशवाहा ने कहा कि किसान हर तरफ से ठगे जा रहे हैं। किसानों को फसल क्षति बीमा योजना केसीसी कराते समय ही करा दिया जाता है। दुर्भाग्य की बात यह है कि फसल बीमा योजना की राशि नहीं मिलती है। जहां लाखों की क्षति होती है वहां पांच से दस हजार तक बीमा राशि मिलती है। निरंजन ने कहा कि डीजल राशि मद में किसानों को मात्र 1200 से 1500 रूपए मिलते हैं।

सरकारी योजना सिर्फ कागजी

केनगर के किसान राजीव कुमार मेहता ने बताया कि किसानों के लिए बनी सरकारी योजना सिर्फ कागजी है। लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है।

राजीव मेहता।

खाद और बीज की जांच के लिए भी प्रयोगशाला नहीं

जिले के किसान नकली खाद आैर बीज से परेशान हैं। यदि कोई किसान मिट्टी या खाद, बीज के गुणवत्ता की जांच के लिए कृषि कार्यालय में आवेदन देते हैं तो जांच रिपाेर्ट आने में करीब तीन से चार महीने का वक्त लग जाता है। रिपोर्ट आने में देरी होने से तब तक खेती का सीजन समाप्त हो जाता है। किसानों का कहना है कि यदि जिले में एक प्रयोगशाला होता तो तीन से चार दिनों में जांच रिपोर्ट मिल जाती और समय पर असली नकली की पहचान हो पाती और किसान समय पर खेती कर पाते।

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