दूसरे जुमे पर मांगी गुनाहों की माफी, बांटे खैरात

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:05 AM IST

Purnia News - रमजान महीने के दूसरे जुमे को शहर के सभी मस्जिदों में नमाजियों और रोजेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। रमजान का दूसरा जुमा...

Purnia News - the forgiveness of the crimes sought on the other
रमजान महीने के दूसरे जुमे को शहर के सभी मस्जिदों में नमाजियों और रोजेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। रमजान का दूसरा जुमा रोजेदारों ने अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगी। जुमे के नमाज के लिए शहर के जामा मस्जिद, पुलिस लाइन, मधुबनी, लाइन बाजार, सिपाही टोला स्थित मदनी मस्जिद, अरबिया कॉलेज स्थित मस्जिद के अलावा सभी मस्जिदों में व्यापक इंतजाम किए गए थे। जुमे की नमाज अदा करने के लिए रोजेदारों ने सुबह से ही तैयारी शुरू कर दी थी। जुमे की नमाज शुरू होने से पहले ही अलग-अलग मस्जिदों में बच्चे, बड़े, बूढों का आना शुरू हो गया था। इसके साथ ही कामकाज करने वाले रोजेदारों भी समय से मस्जिद पहुंच नमाज अदा की। नमाज के बाद रोजेदारों ने देश में अमन शांति भाईचारे को बनाए रखने के लिए अल्लाह से दुआ मांगी। इस दौरान नमाज के बाद मस्जिद के बाहर अल्लाह की रजामंदी के लिए लोगों ने गरीबों को खैरात भी दिया।

शहर के पुलिस लाइन स्थित मस्जिद में नमाज अदा करते रोजेदार

रमजान में रोज किए गए कार्यों का जीवन में करें अमल

शहर के जामा मस्जिद के मौलाना कैय्यूम साहब ने कुरान का हवाला देते हुए लोगों को समझाया कि रमजान के दिनों में एक नेकी के बदले अल्लाह 70 नेकियों का सवाब देता है। इस माह में रोजेदारों के गुनाह की माफी होती है, बशर्ते वह सही तरीके से रोजा रखे ।रमजान का यह महीना बरकतों का है। ऐसे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा समय इबादत में बिताना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि रमजान को हजरत मोहम्मद साहब ने धैर्य का माह बताया है। इस्लाम में कामयाब जीवन जीने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात धैर्य बताई गई है। हजरत मोहम्मद साहब ने कहा था कि रमजान का माह सहानुभूति का माह है। रमजान में प्रतिदिन की जिंदगी में जो किया जाता है, उसको रोजाना की जिंदगी में लागू करना चाहिए।

रमजान में रोज किए गए कार्यों का जीवन में करें अमल

शहर के जामा मस्जिद के मौलाना कैय्यूम साहब ने कुरान का हवाला देते हुए लोगों को समझाया कि रमजान के दिनों में एक नेकी के बदले अल्लाह 70 नेकियों का सवाब देता है। इस माह में रोजेदारों के गुनाह की माफी होती है, बशर्ते वह सही तरीके से रोजा रखे ।रमजान का यह महीना बरकतों का है। ऐसे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा समय इबादत में बिताना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि रमजान को हजरत मोहम्मद साहब ने धैर्य का माह बताया है। इस्लाम में कामयाब जीवन जीने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात धैर्य बताई गई है। हजरत मोहम्मद साहब ने कहा था कि रमजान का माह सहानुभूति का माह है। रमजान में प्रतिदिन की जिंदगी में जो किया जाता है, उसको रोजाना की जिंदगी में लागू करना चाहिए।

अभी से मिलने लगे सवइयों के आर्डर

रमजान को लेकर शहर में फल और सेवई की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई है। रमजान को लेकर आम, लीची, केला, खीरा, नारंगी की कीमत में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है। इधर जैसे-जैसे रमजान का महीना बीतते जा रहा है। वैसे-वैसे सेवईयों की डिमांड बढ़ती जा रही है। रोजेदारों समेत अन्य लोगों ने अभी से सेवईयों के लिए आर्डर देना शुरू कर दिया है। इससे दुकानदारों को अच्छी आमद का भरोसा है।

अभी से मिलने लगे सवइयों के आर्डर

रमजान को लेकर शहर में फल और सेवई की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई है। रमजान को लेकर आम, लीची, केला, खीरा, नारंगी की कीमत में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है। इधर जैसे-जैसे रमजान का महीना बीतते जा रहा है। वैसे-वैसे सेवईयों की डिमांड बढ़ती जा रही है। रोजेदारों समेत अन्य लोगों ने अभी से सेवईयों के लिए आर्डर देना शुरू कर दिया है। इससे दुकानदारों को अच्छी आमद का भरोसा है।

ईमानी और रूहानी बहार का महीना है रमजान : मौलाना इमरान

ईमानी और रूहानी बहार का महीना है रमजान : मौलाना इमरान

अमौर | प्रखंड के विभिन्न मस्जिदों व मरकजों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अकीदत के साथ दूसरे जुमे की नमाज अदा की और खुदा से मगफिरत व बरकत के साथ देश दुनियां में अमन चैन की दुआ मांगी। अमौर मरकज में दूसरे जुमे की नमाज अदा कराने से पहले मौलाना इमरान नदवी ने अपने तकरीर में कहा कि रमजान इमानी और रूहानी बहार का महीना है। इसकी हर साअत अल्लाह की तरफ से रोजेदारों के लिए बेपनाह मगफेरत और बेशुमार बरकत बरसती है।

इस मुबारक महीने में अमाल की कीमत बढ़ा दी जाती है। एक फर्ज 70 फर्ज बराबर और नवाफिल फर्ज के बराबर कर दिया जाता है। दरअसल इस्लाम इंसानियत और भाईचारगी का मजहब है। रमजानुल मुबारक के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है। इसके पहले असरे में खुदा की बेसुमार रहमत बंदों पर होती है।

अमौर | प्रखंड के विभिन्न मस्जिदों व मरकजों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अकीदत के साथ दूसरे जुमे की नमाज अदा की और खुदा से मगफिरत व बरकत के साथ देश दुनियां में अमन चैन की दुआ मांगी। अमौर मरकज में दूसरे जुमे की नमाज अदा कराने से पहले मौलाना इमरान नदवी ने अपने तकरीर में कहा कि रमजान इमानी और रूहानी बहार का महीना है। इसकी हर साअत अल्लाह की तरफ से रोजेदारों के लिए बेपनाह मगफेरत और बेशुमार बरकत बरसती है।

इस मुबारक महीने में अमाल की कीमत बढ़ा दी जाती है। एक फर्ज 70 फर्ज बराबर और नवाफिल फर्ज के बराबर कर दिया जाता है। दरअसल इस्लाम इंसानियत और भाईचारगी का मजहब है। रमजानुल मुबारक के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है। इसके पहले असरे में खुदा की बेसुमार रहमत बंदों पर होती है।

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