इंडोर में 128 व आउटडोर में 85 तरह की दवा, डेरीफाइलिन इंजेक्शन तक नहीं

Purnia News - सदर अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी है। अस्पताल में मरीजों के लिए तीन सौ बेड है, लेकिन वह भी कम पड़ गए...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:50 AM IST
Purnia News - there are 128 types of indoor and 85 types of medicines not even darifylin injections
सदर अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी है। अस्पताल में मरीजों के लिए तीन सौ बेड है, लेकिन वह भी कम पड़ गए हैं। अस्पताल प्रबंधक ने दवा और सुविधा के बड़े-बड़े दावे किए हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है। अस्पताल प्रबंधक ने मरीजों के लिए इंडोर में 128 और आउटडोर में 85 तरह की दवा उपलब्ध होने का दावा किया है, लेकिन जब भास्कर टीम ने मामले को खंगाला तो बात कुछ और ही निकली। अस्पताल की हालत यह है कि इंडोर वार्ड में इलाजरत मरीज और आउटडोर में इलाज कराने वाले मरीजों को डॉक्टर दवा तो लिख देते हैं, लेकिन दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने से मरीज या उनके परिजन बाहर से महंगे दामों पर दवा खरीद कर काम चलाते हैं।

सदर अस्पताल के प्रबंधक वैसे अस्पताल के इंडोर वार्ड में 128 प्रकार की दवा और आउटडोर वार्ड में 85 तरह की दवा के उपलब्ध होने का दावा करते हैं। जब पड़ताल की गई तो पता चला कि इंडोर और आउटडोर में दवाओं की भारी कमी है। इंडोर वार्ड में 128 तरह की दवाओं में टेटवेट, टेटग्लो, डेरी फाइल इंजेक्शन, रोमोलेन और अन्य दवाओं को शामिल किया गया।

अस्पताल के इंडोर वार्ड में टेटवेट, टेटग्लो, डेरीफाइल इंजेक्शन, रोमोलेन जैसी दवा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज के परिजनों को दवा की पर्ची थमा देते हैं और परिजन बाहर की दुकानों से दवा खरीद कर लाते हैं। आउटडोर वार्ड का भी यही हाल है। वार्ड में जांच के बाद डॉक्टर अस्पताल की पर्ची पर दवा तो लिख देते हैं लेकिन अस्पताल के दवा काउंटर पर दवा नहीं होने की बात कही जाती है और मरीज बाहर जाकर दवा खरीदते हैं। आलम यह है कि आउटडोर में कान, आई ड्रॉप, डायबिटीज, खांसी की दवा तक उपलब्ध नहीं है। इमरजेंसी वार्ड में घायलों को कटे हुए जगह पर टांका देने के लिए धागा और ब्लेड तक बाहर से खरीदना पड़ता है।

सदर अस्पताल में दवा काउंटर पर मरीजों की लगी भीड़।

जेनरिक दवा भी कम ही लिखते हैं डॉक्टर

सदर अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर अस्पताल की दवा से ज्यादा बाहर कह दवा पर भरोसा करते हैं। जो दवा उपलब्ध नहीं है, वह दवा भी डॉक्टर लिखते हैं और मरीज के परिजनों को बाहर की दवा दुकानों का चक्कर लगाना पड़ता है। वैसे अस्पताल में जेनरिक दवा केंद्र भी खोला गया है, लेकिन डॉक्टर बहुत ही कम जेनरिक दवा लिखते हैं।

केस स्टडी 01 : बाहर से खरीदनी पड़ रही दवा

उदाकिशनगंज (मधेपुरा) के रहने वाले गाेपाल चंद्र ने बताया कि उसको आंख में खराबी है। ओपीडी में दिखाने के बाद डॉक्टर ने आई ड्रॉप लिख दिया है, लेकिन जब दवा काउंटर पर दवा लेने के लिए गए तो दवा नहीं होने की बात कही और अब बाहर से दवा खरीदना पड़ रही है।

केस स्टडी 2 : अस्पताल में नहीं मिली दवा

टीकापट्टी थाना क्षेत्र के छर्रापट्टी के रहने वाले सबिन कुमार ने बताया कि उन्हें कान में समस्या है। ओपीडी में डॉक्टर से दिखाने के बाद कान का ड्रॉप लिख दिया है। जब दवा काउंटर पर दवा लेने गए तो दवा नहीं होने की बात कही गई।

जल्द उपलब्ध कराई जाएगी दवा


Purnia News - there are 128 types of indoor and 85 types of medicines not even darifylin injections
Purnia News - there are 128 types of indoor and 85 types of medicines not even darifylin injections
X
Purnia News - there are 128 types of indoor and 85 types of medicines not even darifylin injections
Purnia News - there are 128 types of indoor and 85 types of medicines not even darifylin injections
Purnia News - there are 128 types of indoor and 85 types of medicines not even darifylin injections
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना