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टीकापट्टी गांधी आश्रम का होगा जीर्णोद्धार, प्रशासन भेजेगा प्रस्ताव

Purnia News - राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादों को संजोए टीकापट्टी गांधी आश्रम के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव जल्द ही कला एवं...

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 05:15 AM IST
Purnia News - tikapatti gandhi ashram will be restored administration will send proposal
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादों को संजोए टीकापट्टी गांधी आश्रम के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव जल्द ही कला एवं संस्कृति मंत्रालय को भेजा जाएगा ताकि यह क्षेत्र गांधी जी के अनुयायियों के लिए एक पर्यटन स्थल के रूप में बन सके और लोग यहां आकर गांधी जी की स्मृतियों को जान सकें। जिलाधिकारी प्रदीप कुमार झा ने जानकारी देते बताया कि गांधी आश्रम की जमीन को चिन्हित कर लिया गया है। यह जगह पूर्णिया ही नहीं देश के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से महात्मा गांधी की यादें जुड़ी हुई है। जिला प्रशासन की तरफ से कला एवं संस्कृति मंत्रालय के पास टीकापट्टी के जीर्णोद्धार के लिए एक प्रस्ताव भेजा जा रहा है। ताकि यह जगह पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित हो सके।

टीकापट्टी स्थित गांधी आश्रम

गांधी द्वार टूट जाने से लोगों में था आक्रोश:हाल में भी टीकापट्टी स्थित डाइट भवन निर्माण के दौरान गांधी जी के स्वागत में बना गांधी द्वार का एक हिस्सा टूट गया था,जिस कारण स्थानीय लोगों में काफी ज्यादा आक्रोश था। गांधी द्वार के टूटने के बाद स्थानीय स्वयंसेवियों और जनप्रतनिधियों में आक्रोश पैदा हो गया था। जिसके बाद जिलाधिकारी प्रदीप कुमार झा ने मामले में धमदाहा एसडीओ राजेश्वरी पांडेय को जांच का आदेश देते हुए गांधी आश्रम की जमीन की नापी करवाने का आदेश दिया था।

टीकापट्टी से जुड़ी है महात्मा गांधी की यादें

सन 1934 में बिहार में आए प्रलयकारी भूकम्प के पीड़ितों के सहायतार्थ महात्मा गांधी बिहार आए थे। इस बिहार यात्रा के अंतिम दिनों में रूपसी (असम) जाने के क्रम में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए चंदा इकट्ठा करने पूर्णिया पहुंचे गांधी जी 10 अप्रैल 1934 को टीकापट्टी पहुंचे थे। टीकापट्टी में महात्मा गांधी ने यहां के क्रांतिकारियों से गुफ्तगू की थी और यहां की जनता के साथ खुला अधिवेशन भी किया था। जिस स्थान पर महात्मा गांधी ने आम लोगों को संबोधित किया था, उनकी याद में वहां आज भी चबूतरा और गांधी सदन बना हुआ है। जब गांधी जी टीकापट्टी आए थे तो उनके स्वागत में गांधी सदन के सामने विशाल गांधी-द्वार बनवाया गया था। इस विशाल गांधी द्वार को भी टीकापट्टी के लोग अपना ऐतिहासिक धरोहर मानते हैं। इस आश्रम में सर्वप्रथम भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशर| डॉ. राजेंद्र प्रसाद 1931 में आए थे। जहां इन्हें आश्रम की स्थापना के लिए स्थानीय ठीठरू मंडल द्वारा 5 एकड़ जमीन आम बगीचा सहित दान स्वरूप मिला था। लेकिन महात्मा गांधी के आने के बाद गांधी आश्रम पूरे जिले के क्रांतिकारियों का केंद्र बन गया था।

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