80% टीनएजर इंस्टाग्राम के यूज़र, उनमें से आधे धमकियां, शर्मिंदगी, अपमान झेलते हैं

Purnia News - जिस तरह फेसबुक पर फेक न्यूज और टि्वटर पर ट्रोलिंग की बीमारी आम है। कुछ वैसा ही हाल इंस्टाग्राम का है। सोशल मीडिया...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:25 AM IST
Vaisa News - users of 80 teenager instagram half of them face threats embarrassment insults
जिस तरह फेसबुक पर फेक न्यूज और टि्वटर पर ट्रोलिंग की बीमारी आम है। कुछ वैसा ही हाल इंस्टाग्राम का है। सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर लोगों को सताना या बुलीइंग करना बहुत ज्यादा प्रचलित है। अनुमान है, लगभग 80% किशोर इंस्टाग्राम पर हैं और उनमें से आधे यूज़रों को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। यूज़रों को अपमान और हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ता है।

कई समस्याओं के लिए दोषी माने जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर खुद सुधार करने का दबाव बढ़ा है। इंस्टाग्राम ने स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने की पहल की है। आधुुनिक रिपोर्टिंग टूल और मॉडरेटर की मदद से आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले अकाउंट जल्द बंद किए जाएंगे। अपमान, असम्मान और शर्मिंदा करने जैसे व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने की योजना है। कंपनी के प्रमुख एडम मोसेरी का कहना है, ‘हम इस लड़ाई में इंडस्ट्री का नेतृत्व करना चाहते हैं। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण समय है’।

कई वर्ष से बुलीइंग के कारणों और प्रभावों का अध्ययन कर रहे एरिजोना यूनिवर्सिटी में काउंसलिंग प्रोफेसर शेरी बाउमन ‘इंस्टाग्राम को बुली के लिए एकमात्र जगह मानते हैं। वहां बुलीइंग करने वालों के लिए ऑडिएंस, गुमनामी और यूज़र फीड से लेकर ग्रुप चैट तक सब कुछ है’। इंस्टाग्राम की पब्लिक पॉलिसी प्रमुख करीना न्यूटन मानती हैं,‘हम प्लेटफार्म पर अधिक यूज़रों को आकर्षित करने के लिए नए फीचर लाते हैं। और हर फीचर के साथ बदसलूकी करने के नए अवसर जुड़ते हैं’।

बुलीइंग रोकने के लिए इंस्टाग्राम पर नए फीचर लाए जा रहे हैं। लेकिन, बुलीइंग के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने से यूज़र्स के कम होने का जोखिम है। इंस्टाग्राम पर लोगों द्वारा बिताए गए हर घंटे से फेसबुक को मुनाफा होता है। कई टेक्निकल मसले भी हैं। एआई िसस्टम के लिए मशीनों को समस्याएं हल करने का तरीका सिखाना होगा।

केविन सिस्ट्राम और माइक क्रीगर (दोनों 20 वर्ष) ने 2010 में इंस्टाग्राम लॉन्च की थी। जल्द ही फोटो शेयरिंग एप पर भद्दे कॉमेंट आने लगे। शुरुआती दिनों में दोनों ने स्वयं खराब कॉमेंट डिलीट किए और ट्रोल्स पर बंदिश लगाई। जिस समय उन्होंने कंपनी छोड़ी थी, उसके एक अरब से अधिक यूज़र हो चुके थे। इंस्टाग्राम को बेहतर जगह बनाने के लिए संस्थापकों ने फेसबुक से 2016 में डीप टेक्स्ट एआई टूल लिया। यह यूज़रों की भाषा समझने के लिए डिजाइन किया गया था। उसे घृणास्पद टिप्पणियां ब्लॉक करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। 2018 में इसका उपयोग बुलीइंग खोजने के लिए होने लगा था।

आज साइट पर तीन बुलीइंग क्लासीफायर कंटेंट की स्कैनिंग करते हैं- एक क्लासीफायर को टेक्स्ट , दूसरे को फोटो और एक अन्य को वीडियो विश्लेषण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये हर घंटे कंटेंट पहचानते हैं। कंपनी की प्रमुख इंजीनियर योएव शापिरा बताती हैं, ‘हर सप्ताह इंजीनियरों को बुलीइंग का नया तरीका देखने मिलता है जिसके बारे में इंजीनियरों ने पहले नहीं सोचा था। असरकारक एआई बनाने के लिए इंस्टाग्राम सभी तरह की बुलीइंग को समझने के लिए हजारों यूज़रों का सर्वे कर रहा है’।

एक अरब से ज्यादा यूज़र हैं इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म के

इंस्टाग्राम के प्रमुख मोसेरी एक ब्वाय बैंड के साथ।

केटी स्टीनमेट्ज

जिस तरह फेसबुक पर फेक न्यूज और टि्वटर पर ट्रोलिंग की बीमारी आम है। कुछ वैसा ही हाल इंस्टाग्राम का है। सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर लोगों को सताना या बुलीइंग करना बहुत ज्यादा प्रचलित है। अनुमान है, लगभग 80% किशोर इंस्टाग्राम पर हैं और उनमें से आधे यूज़रों को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। यूज़रों को अपमान और हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ता है।

कई समस्याओं के लिए दोषी माने जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर खुद सुधार करने का दबाव बढ़ा है। इंस्टाग्राम ने स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने की पहल की है। आधुुनिक रिपोर्टिंग टूल और मॉडरेटर की मदद से आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले अकाउंट जल्द बंद किए जाएंगे। अपमान, असम्मान और शर्मिंदा करने जैसे व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने की योजना है। कंपनी के प्रमुख एडम मोसेरी का कहना है, ‘हम इस लड़ाई में इंडस्ट्री का नेतृत्व करना चाहते हैं। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण समय है’।

कई वर्ष से बुलीइंग के कारणों और प्रभावों का अध्ययन कर रहे एरिजोना यूनिवर्सिटी में काउंसलिंग प्रोफेसर शेरी बाउमन ‘इंस्टाग्राम को बुली के लिए एकमात्र जगह मानते हैं। वहां बुलीइंग करने वालों के लिए ऑडिएंस, गुमनामी और यूज़र फीड से लेकर ग्रुप चैट तक सब कुछ है’। इंस्टाग्राम की पब्लिक पॉलिसी प्रमुख करीना न्यूटन मानती हैं,‘हम प्लेटफार्म पर अधिक यूज़रों को आकर्षित करने के लिए नए फीचर लाते हैं। और हर फीचर के साथ बदसलूकी करने के नए अवसर जुड़ते हैं’।

बुलीइंग रोकने के लिए इंस्टाग्राम पर नए फीचर लाए जा रहे हैं। लेकिन, बुलीइंग के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने से यूज़र्स के कम होने का जोखिम है। इंस्टाग्राम पर लोगों द्वारा बिताए गए हर घंटे से फेसबुक को मुनाफा होता है। कई टेक्निकल मसले भी हैं। एआई िसस्टम के लिए मशीनों को समस्याएं हल करने का तरीका सिखाना होगा।

केविन सिस्ट्राम और माइक क्रीगर (दोनों 20 वर्ष) ने 2010 में इंस्टाग्राम लॉन्च की थी। जल्द ही फोटो शेयरिंग एप पर भद्दे कॉमेंट आने लगे। शुरुआती दिनों में दोनों ने स्वयं खराब कॉमेंट डिलीट किए और ट्रोल्स पर बंदिश लगाई। जिस समय उन्होंने कंपनी छोड़ी थी, उसके एक अरब से अधिक यूज़र हो चुके थे। इंस्टाग्राम को बेहतर जगह बनाने के लिए संस्थापकों ने फेसबुक से 2016 में डीप टेक्स्ट एआई टूल लिया। यह यूज़रों की भाषा समझने के लिए डिजाइन किया गया था। उसे घृणास्पद टिप्पणियां ब्लॉक करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। 2018 में इसका उपयोग बुलीइंग खोजने के लिए होने लगा था।

आज साइट पर तीन बुलीइंग क्लासीफायर कंटेंट की स्कैनिंग करते हैं- एक क्लासीफायर को टेक्स्ट , दूसरे को फोटो और एक अन्य को वीडियो विश्लेषण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये हर घंटे कंटेंट पहचानते हैं। कंपनी की प्रमुख इंजीनियर योएव शापिरा बताती हैं, ‘हर सप्ताह इंजीनियरों को बुलीइंग का नया तरीका देखने मिलता है जिसके बारे में इंजीनियरों ने पहले नहीं सोचा था। असरकारक एआई बनाने के लिए इंस्टाग्राम सभी तरह की बुलीइंग को समझने के लिए हजारों यूज़रों का सर्वे कर रहा है’।

à करीब 80% टीनएजर्स इंस्टाग्राम पर हैं। आधे यूज़र्स सताए गए हैं।

à 2018 में इंस्टाग्राम ने एक अरब से अधिक यूज़र्स होने पर जश्न मनाया था।

à एडम मोसेरी मूल कंपनी फेसबुक में 10 वर्ष रहने के बाद इंस्टाग्राम के प्रमुख बने हैं।

à वर्तमान में बुलीइंग करने वालों की तीन कैटेगरी हैं-टेक्स्ट स्कैनिंग, फोटो और वीडियो।

à इंस्टाग्राम बुलीइंग की सात उप श्रेणियों को पहचानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस बनाने पर काम कर रही है।

à हालंाकि कुछ युवा नियम तोड़ते हैं लेकिन इंस्टाग्राम ने यूज़रों की आयु 13 वर्ष और उससे ज्यादा रखी है।

केटी स्टीनमेट्ज

जिस तरह फेसबुक पर फेक न्यूज और टि्वटर पर ट्रोलिंग की बीमारी आम है। कुछ वैसा ही हाल इंस्टाग्राम का है। सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर लोगों को सताना या बुलीइंग करना बहुत ज्यादा प्रचलित है। अनुमान है, लगभग 80% किशोर इंस्टाग्राम पर हैं और उनमें से आधे यूज़रों को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। यूज़रों को अपमान और हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ता है।

कई समस्याओं के लिए दोषी माने जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर खुद सुधार करने का दबाव बढ़ा है। इंस्टाग्राम ने स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने की पहल की है। आधुुनिक रिपोर्टिंग टूल और मॉडरेटर की मदद से आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले अकाउंट जल्द बंद किए जाएंगे। अपमान, असम्मान और शर्मिंदा करने जैसे व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने की योजना है। कंपनी के प्रमुख एडम मोसेरी का कहना है, ‘हम इस लड़ाई में इंडस्ट्री का नेतृत्व करना चाहते हैं। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण समय है’।

कई वर्ष से बुलीइंग के कारणों और प्रभावों का अध्ययन कर रहे एरिजोना यूनिवर्सिटी में काउंसलिंग प्रोफेसर शेरी बाउमन ‘इंस्टाग्राम को बुली के लिए एकमात्र जगह मानते हैं। वहां बुलीइंग करने वालों के लिए ऑडिएंस, गुमनामी और यूज़र फीड से लेकर ग्रुप चैट तक सब कुछ है’। इंस्टाग्राम की पब्लिक पॉलिसी प्रमुख करीना न्यूटन मानती हैं,‘हम प्लेटफार्म पर अधिक यूज़रों को आकर्षित करने के लिए नए फीचर लाते हैं। और हर फीचर के साथ बदसलूकी करने के नए अवसर जुड़ते हैं’।

बुलीइंग रोकने के लिए इंस्टाग्राम पर नए फीचर लाए जा रहे हैं। लेकिन, बुलीइंग के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने से यूज़र्स के कम होने का जोखिम है। इंस्टाग्राम पर लोगों द्वारा बिताए गए हर घंटे से फेसबुक को मुनाफा होता है। कई टेक्निकल मसले भी हैं। एआई िसस्टम के लिए मशीनों को समस्याएं हल करने का तरीका सिखाना होगा।

केविन सिस्ट्राम और माइक क्रीगर (दोनों 20 वर्ष) ने 2010 में इंस्टाग्राम लॉन्च की थी। जल्द ही फोटो शेयरिंग एप पर भद्दे कॉमेंट आने लगे। शुरुआती दिनों में दोनों ने स्वयं खराब कॉमेंट डिलीट किए और ट्रोल्स पर बंदिश लगाई। जिस समय उन्होंने कंपनी छोड़ी थी, उसके एक अरब से अधिक यूज़र हो चुके थे। इंस्टाग्राम को बेहतर जगह बनाने के लिए संस्थापकों ने फेसबुक से 2016 में डीप टेक्स्ट एआई टूल लिया। यह यूज़रों की भाषा समझने के लिए डिजाइन किया गया था। उसे घृणास्पद टिप्पणियां ब्लॉक करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। 2018 में इसका उपयोग बुलीइंग खोजने के लिए होने लगा था।

आज साइट पर तीन बुलीइंग क्लासीफायर कंटेंट की स्कैनिंग करते हैं- एक क्लासीफायर को टेक्स्ट , दूसरे को फोटो और एक अन्य को वीडियो विश्लेषण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये हर घंटे कंटेंट पहचानते हैं। कंपनी की प्रमुख इंजीनियर योएव शापिरा बताती हैं, ‘हर सप्ताह इंजीनियरों को बुलीइंग का नया तरीका देखने मिलता है जिसके बारे में इंजीनियरों ने पहले नहीं सोचा था। असरकारक एआई बनाने के लिए इंस्टाग्राम सभी तरह की बुलीइंग को समझने के लिए हजारों यूज़रों का सर्वे कर रहा है’।

केटी स्टीनमेट्ज

जिस तरह फेसबुक पर फेक न्यूज और टि्वटर पर ट्रोलिंग की बीमारी आम है। कुछ वैसा ही हाल इंस्टाग्राम का है। सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर लोगों को सताना या बुलीइंग करना बहुत ज्यादा प्रचलित है। अनुमान है, लगभग 80% किशोर इंस्टाग्राम पर हैं और उनमें से आधे यूज़रों को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। यूज़रों को अपमान और हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ता है।

कई समस्याओं के लिए दोषी माने जा रहे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर खुद सुधार करने का दबाव बढ़ा है। इंस्टाग्राम ने स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने की पहल की है। आधुुनिक रिपोर्टिंग टूल और मॉडरेटर की मदद से आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले अकाउंट जल्द बंद किए जाएंगे। अपमान, असम्मान और शर्मिंदा करने जैसे व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करने की योजना है। कंपनी के प्रमुख एडम मोसेरी का कहना है, ‘हम इस लड़ाई में इंडस्ट्री का नेतृत्व करना चाहते हैं। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण समय है’।

कई वर्ष से बुलीइंग के कारणों और प्रभावों का अध्ययन कर रहे एरिजोना यूनिवर्सिटी में काउंसलिंग प्रोफेसर शेरी बाउमन ‘इंस्टाग्राम को बुली के लिए एकमात्र जगह मानते हैं। वहां बुलीइंग करने वालों के लिए ऑडिएंस, गुमनामी और यूज़र फीड से लेकर ग्रुप चैट तक सब कुछ है’। इंस्टाग्राम की पब्लिक पॉलिसी प्रमुख करीना न्यूटन मानती हैं,‘हम प्लेटफार्म पर अधिक यूज़रों को आकर्षित करने के लिए नए फीचर लाते हैं। और हर फीचर के साथ बदसलूकी करने के नए अवसर जुड़ते हैं’।

बुलीइंग रोकने के लिए इंस्टाग्राम पर नए फीचर लाए जा रहे हैं। लेकिन, बुलीइंग के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने से यूज़र्स के कम होने का जोखिम है। इंस्टाग्राम पर लोगों द्वारा बिताए गए हर घंटे से फेसबुक को मुनाफा होता है। कई टेक्निकल मसले भी हैं। एआई िसस्टम के लिए मशीनों को समस्याएं हल करने का तरीका सिखाना होगा।

केविन सिस्ट्राम और माइक क्रीगर (दोनों 20 वर्ष) ने 2010 में इंस्टाग्राम लॉन्च की थी। जल्द ही फोटो शेयरिंग एप पर भद्दे कॉमेंट आने लगे। शुरुआती दिनों में दोनों ने स्वयं खराब कॉमेंट डिलीट किए और ट्रोल्स पर बंदिश लगाई। जिस समय उन्होंने कंपनी छोड़ी थी, उसके एक अरब से अधिक यूज़र हो चुके थे। इंस्टाग्राम को बेहतर जगह बनाने के लिए संस्थापकों ने फेसबुक से 2016 में डीप टेक्स्ट एआई टूल लिया। यह यूज़रों की भाषा समझने के लिए डिजाइन किया गया था। उसे घृणास्पद टिप्पणियां ब्लॉक करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। 2018 में इसका उपयोग बुलीइंग खोजने के लिए होने लगा था।

आज साइट पर तीन बुलीइंग क्लासीफायर कंटेंट की स्कैनिंग करते हैं- एक क्लासीफायर को टेक्स्ट , दूसरे को फोटो और एक अन्य को वीडियो विश्लेषण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये हर घंटे कंटेंट पहचानते हैं। कंपनी की प्रमुख इंजीनियर योएव शापिरा बताती हैं, ‘हर सप्ताह इंजीनियरों को बुलीइंग का नया तरीका देखने मिलता है जिसके बारे में इंजीनियरों ने पहले नहीं सोचा था। असरकारक एआई बनाने के लिए इंस्टाग्राम सभी तरह की बुलीइंग को समझने के लिए हजारों यूज़रों का सर्वे कर रहा है’।

X
Vaisa News - users of 80 teenager instagram half of them face threats embarrassment insults
COMMENT