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पहले से बदनाम रहे उत्पाद अधीक्षक, इंस्पेक्टर और जमादार सहित अन्य कर्मियों पर कार्रवाई, दोषी उत्पाद अधीक्षक अब तक हैं फरार

Saharsa News - शराब कारोबारियों को मदद पहुंचाने के मामले में पहले से बदनाम और आरोपी उत्पाद विभाग के पदाधिकारियों पर पहली बार बड़ी...

Jan 16, 2020, 09:10 AM IST
Saharsa News - action on other personnel including the already maligned excise superintendent inspector and jamadar the guilty superintendent is still absconding
शराब कारोबारियों को मदद पहुंचाने के मामले में पहले से बदनाम और आरोपी उत्पाद विभाग के पदाधिकारियों पर पहली बार बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। इस मामले में जहां उत्पाद इंस्पेक्टर फैयाज अहमद और जमादार बीरेन्द्र कुमार पाठक जेल भेजे गए हैं वहीं जिले में पदस्थापित उत्पाद विभाग के मुख्य अधिकारी उत्पाद अधीक्षक अशरफ जमाल प्राथमिकी दर्ज होने के बाद फरार चल रहे हैं।

एसपी राकेश कुमार ने बुधवार को पुलिस कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मामले का खुलासा करते हुए कहा कि कहा कि बीते 12 अक्टूबर को उत्पाद विभाग द्वारा दर्ज बाद संख्या 506/19 में बरती गई अनियमितता की शिकायत को लेकर उत्पाद एवं मद्य निषेध आईजी प्रोबेशन के द्वारा जांच की गई थी।

इसके बाद उनके ही निर्देश पर जिला स्तर के एडिशनल एसपी और सदर एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी के नेतृत्व में पुनः जांच करवाई गई थी। तीनो स्तर के जांच में चार -पांच बिन्दुओं पर उत्पाद विभाग के पदाधिकारियों द्वारा अनियमितता की शिकायतें मिली। जिसके बाद मामला दर्ज कर उत्पाद निरीझक फैयाज अहमद एवं सहायक उत्पाद अवर निरीझक वीरेंन्द्र कुमार पाठक की गिरफ्तारी की गई। उत्पाद अधीक्षक की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।

कसा कानून का शिकंजा
क्या था मामला

बीते 12 अक्टूबर 2019 में उत्पाद अधीक्षक अशरफ जमाल को सूचना मिली थी कि डुमरैल चौक स्थित आवासीय परिसर में ट्रक से अवैध शराब अनलोड की जा रही है। सूचना पर उनके नेतृत्व में उत्पाद इंस्पेक्टर फैयाज अहमद, सहायक उत्पाद अवर निरीक्षक वीरेंद्र कुमार पाठक सहित अन्य उत्पाद कर्मियों की टीम बनाकर देर रात 12 बजे खाली परिसर में छापेमारी की गई थी। जिसमें ट्रक पर लदे कुल 5572 बोतल विदेशी शराब बरामद मामले में प्राथमिकी संख्या 506/19 दर्ज किया गया था। पहले से कई मामलों पर शराब कारोबारियों को मदद पहुंचाने के आरोपी रहे उत्पाद अधीक्षक और उनकी टीम पर प्रशासन और उच्च पदाधिकारियाें की नजर थी।

पूर्व में दर्ज 506/19 मामले में ये थे अभियुक्त

उत्पाद विभाग द्वारा बीते 16 अक्टूबर 19 को दर्ज किए गए बाद संख्या 506/19 में स्थानीय विद्यापति नगर ,वार्ड नंबर 19 निवासी अभिनव आनंद उर्फ गोविंद सिंह ,स्थानीय सिमराहा, भविषा चौक ,वार्ड नंबर 35 निवासी रमेश साह ,वाहन मालिक उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर अंतर्गत जेबड़ा नवाबगंज स्थित गृह संख्या 50 निवासी रामेश्वर के साथ मधेपुरा जिले के धैलाड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कमलपुर ,वार्ड नंबर 2 निवासी विभीषण मेहता सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उसके बाद अब यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

उत्पाद इंस्पेक्टर फैयाज अहमद और जमादार बीरेन्द्र कुमार पाठक जेल भेजे गए वहीं जिले में पदस्थापित उत्पाद अधीक्षक की गिरफ्तारी के लिए चल रही छापेमारी

जानकारी देते एसपी राकेश कुमार, एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी, सदर थानाध्यक्ष राजमणी और चेहरा ढंके हुए गिरफ्तार आरोपी।

गिरफ्तार अभियुक्त प्राथमिकी में देरी का लाभ लेकर ऐसे बच निकला

पहली चूक| शराब जब्ती को लेकर 13 अक्टूबर की सुबह 1:15 बजे मामला दर्ज कर जब्ती सूची बनाई गई थी वहीं 3 दिन बाद 16 अक्टूबर को मामला दर्ज हुआ था। तब अनियमितता की पहली शिकायत पुष्ट हुई। इस दौरान कारोबारियों से मोल भाव हुए। जबकि किसी भी मामले में 24 घंटे में शिकायत दर्ज करना है। लेकिन इस मामले में तीन दिनों तक खेल चलता रहा। जिसमें उत्पाद विभाग के पदाधिकारियों की मिलीभगत और अनियमितता की बातें तीन स्तरीय जांच में सत्य पाई गई थी।

दूसरी चूक | एसपी राकेश कुमार ने बताया कि प्राथमिकी में वाहन चालक का नाम अंकित नहीं किया गया था। जिसके लिए उत्पाद अधीक्षक सहित उत्पाद विभाग के पदाधिकारियों ने चालक के पकड़ में नहीं आने की बातें बताई। लेकिन नियमत: अगर चालक पकड़ में नहीं आते हैं तो दर्ज मामले में ट्रक चालक और उनके स्वामी लिखकर प्राथमिकी दर्ज की जाती है। लेकिन पूरे मामले में कहीं भी ट्रक चालक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

तीसरी चूक | जब्त ट्रक के नंबर में भी हेरफेर को लेकर शिकायत सहित आपत्ति व्यक्त की गई थी जो जांच के दायरे में है। जब ट्रक यूपी 78 एटी 9175 के बदले यूपी 78 एटी 9171/ 9172 लिख दी गई थी। नई ट्रक में शराब को लाने की बात आयी थी। जबकि उत्पाद विभाग द्वारा मामले में अंकित ट्रक की संख्या काफी पुरानी और सड़ी-गली ट्रक बता दी गयी और इसका नम्बर भी बदल दिया गया।

चेहरा ढंके हुए गिरफ्तार आरोपी।

सदर थानाध्यक्ष के बयान पर दर्ज की गई प्राथमिकी

सदर थाना अध्यक्ष राजमणि के बयान पर उत्पाद अधीक्षक सहित अन्य पर मामला दर्ज किया गया। जिनमें इंस्पेक्टर अनिल कुमार को अनुसंधानकर्ता बनाया गया है। सदर डीएसपी प्रभाकर तिवारी के नेतृत्व में दोनों आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई।

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