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जर्जर भवन में पढ़ाई करने को विवश हैं छात्राएं

2 वर्ष पहले
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जिला मुख्यालय स्थित राजकीय कन्या मध्य विद्यालय भवन काफी जर्जर हो गयी है। वर्षों से इस विद्यालय भवन का जीर्णोद्धार नहीं किया गया है।

खंडहर में तब्दील राजकीय कन्या मध्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के बीच हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है। छोटे-बड़े लगभग 20 कमरे वाले इस विद्यालय में वर्ग 1 से वर्ग 8 तक की पढ़ाई होती है। कोई भी ऐसा कमरा नहीं जिसमें छात्राएं सुकून से बैठकर पढ़ाई कर सके। फिर भी डरी सहमी छात्राएं जर्जर हो चुके वर्ग में पढ़ाई करने को विवश है। लगभग 400 छात्रा वाले विद्यालय में प्रधानाध्यापक सहित 7 शिक्षिकाएं कार्यरत है। सभी कमरों एवं बरामदे की छत का सरिया नीचे की ओर लटका हुआ है। छत का चट्टा बराबर नीचे गिरते रहता है। दीवारों के प्लास्टर पूरी तरह झड़ गए हैं। जिसके कारण वर्ग में अध्ययन कर रही छात्राएं हमेशा डरी सहमी रहती है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी जयशंकर प्रसाद ठाकुर ने बताया कि विद्यालय के जीर्णोद्धार के लिए डीपीआर तैयार किया जा चुका है। राज्य से मंजूरी मिलते ही विद्यालय के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि लगभग 48 लाख की लागत से विद्यालय के छत को तोड़कर नया बनाया जाएगा। दीवार का पुनः प्लास्टर व रंग-रोगन सहित अन्य कार्य किए जाएंगे।

साथ ही विद्यालय के चारों ओर चारदीवारी का भी निर्माण किया जाएगा। प्रधानाध्यापक बेबी कुमारी ने बताया कि विभाग को जर्जर भवन के बारे में कई बार सूचना दी गई है। लेकिन आज तक इस पर किसी का ध्यान आकर्षित नहीं हो सका है।

स्कूल में एक से आठवीं तक की होती है पढ़ाई

400 छात्राओं पर प्रधानाध्यापक को जोड़कर केवल सात शिक्षितकाएं, क्लास के संचालन में भी समस्याएं

स्कूल के जर्जर भवन में पढाई करती बच्चियां।

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