विवेक से बड़ा मित्र नहीं और लोभ से बड़ा कोई शत्रु नहीं : अरुण जायसवाल

Saharsa News - गायत्री शक्तिपीठ सहरसा में रविवार को व्यक्तित्व परिष्कार सत्र का आयोजन किया गया। सत्र को संबोधित करते हुए...

Nov 11, 2019, 10:01 AM IST
गायत्री शक्तिपीठ सहरसा में रविवार को व्यक्तित्व परिष्कार सत्र का आयोजन किया गया। सत्र को संबोधित करते हुए ट्रस्टी डा.अरुण कुमार जायसवाल ने कहा कि गायत्री मंत्र के जाप से संसार को समझने की दृष्टि विकसित होती है। प्राणबल,आत्मबल के साथ साथ सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है। इसके जाप से अकाल मृत्यु नहीं होती है।

उन्होंने कहा जीवात्मा के दो कवच हैं तप और पुण्य। तप,साधना और अराधना की परत जब मोटी हो जाती है,तब विवेक एवं आनंद की प्राप्ति होती है। विवेक से बड़ा मित्र नहीं और लोभ से बड़ा कोई शत्रु नहीं। विवेक में संसार और आध्यात्म भी है। जीवन के समस्त शक्तियों का उपयोग विवेक सिखाता है। विवेक से जीवन की राहें आसान हो जाती है। इस अवसर पर अभिनव जायसवाल ने कहा जिंदगी की यात्रा निरंतर है,कभी रूकती नहीं है। मृत्यु से बड़ा कोई सत्य नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश आरएन त्रिपाठी ने युवाओं को बताया कि किसी भी देश और राज्य का सरकारी नियम है। इसे नहीं मानने वाले दंडित होते हैं।

आगामी 14 नवंबर से 17 नवंबर तक आयोजित होनेवाले श्रीमद प्रज्ञापुराण पावन कथा एवं गायत्री महायज्ञ के लिए सोमवार की सुबह भूमि पूजन की जाएगी, जबकि 14 नवंबर को कलश यात्रा निकाली जाएगी।

इस अवसर पर ट्रस्टी केदारनाथ टेकरीवाल, विनोद कुमार चौधरी, ललन कुमार सिंह, श्यामानंद लाल दास, पप्पू गनेरीवाल, दिनेश दिनकर, हरेकृष्ण साह, रामचंद्र सिंह, हरीश जायसवाल, नवल सिंह, समरकांत मिश्र, मनीषा, दीपा, राखी, ज्योति, चंदन, मदन इत्यादि उपस्थित थे।

गायत्री शक्तिपीठ में सत्र को संबोधित करते ट्रस्टी अरुण जायसवाल।

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