विभिन्न मस्जिदों में माह-ए-रमजान के दूसरे जुमे की अदा की गई नमाज

Saharsa News - माह-ए-रमजान के दूसरे जुमे का नवाज जिले के सभी मस्जिदों में अदा की गई। फकीर टोला वार्ड 16 स्थित शाही मस्जिद करबला के...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:15 AM IST
Saharsa News - salat paid in the second mosque of maha e ramzan in different mosques
माह-ए-रमजान के दूसरे जुमे का नवाज जिले के सभी मस्जिदों में अदा की गई। फकीर टोला वार्ड 16 स्थित शाही मस्जिद करबला के इमाम मुफ्ती मंजूर आलम कासमी ने बताया कि माह-ए-रमजान बड़ी बरकत और फजीलत का महीना है। इसमें सुबह सादिक से लेकर सूर्यास्त होने तक रोजेदार भूखे और प्यासे रहकर अल्लाह के हुक्म का पालन करते हैं। सूर्यास्त होने के बाद रोजेदार इफ्तार करते हैं। एक से डेढ़ घंटे बाद नवाज पढ़ते और उसके बाद विशेष नवाज पढ़ा जाता है, जिसे तराबी कहा जाता है। रोजेदार द्वारा तराबी को बड़े शौक से व इत्मिनान से पढ़ा जाता है। रोजेदार अल्लाह से अपनी मुरादें मांगते हैं। रमजान में रोजा रखना एक इबादत है। साथ ही रोजा रखने से बहुत सारी जिस्मानी फायदे भी हैं। जो इंसान को माहे रमजान में हासिल होते हैं। रोजा रखना या उपवास रखना मनुष्य के शरीर के लिए सबसे उत्तम माना गया है। गंगाजला वार्ड 15 नियामत टोला जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती नदीम अख्तर ने कहा माहे रमजान में तीन आसरा होते हैं। एक आसरा 10 दिनों का होता है। पहला आसरा रहमत का जो बीत गया। दूसरा आसरा मगफिरत चल रहा है और तीसरा आसरा आग से खलासी का मगफिरत के बाद आएगा। दूसरे आसरा में अल्लाह ताला खास तौर पर बहुत सारे इंसानों की मगफिरत फरमाते हैं। वैसे तो अल्लाह ताला रमजान उल मुबारक की हर रात में छह लाख लोगों को जहन्नुम से आजाद करते हैं।

मस्जिद में नेमाज अदा करते राेजेदार।

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