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मां उग्रतारा मंदिर के गर्भगृह से बाैद्ध एवं ब्राह्मणों के बीच समन्वय स्थापित करने वाला बाैद्धकालीन ऋृषि यज्ञावस्था की मूर्ति गायब

Saharsa News - आध्यात्मिक एवं पुरातात्विक महत्स्थव के स्थल के रूप में प्रसिद्ध मां भगवती उग्रतारा मंदिर महिषी के गर्भगृह से...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 08:11 AM IST
Mahishi News - the idol of the sage yajnavastha the sage who was coordinating between the brahmin and the brahmins disappeared from the sanctum sanctorum of maa ugratara temple
आध्यात्मिक एवं पुरातात्विक महत्स्थव के स्थल के रूप में प्रसिद्ध मां भगवती उग्रतारा मंदिर महिषी के गर्भगृह से बौद्धकालीन ऋषि यज्ञावस्था की मूर्ति कब और कैसे चोरी हुई इसकी जानकारी न तो पुजारी को है और ना ही न्यास समिति को।

इसके पहले भी गर्भगृह में स्थापित गुरु वशिष्ट अराधिता मां उग्रतारा की दुर्लभ मूर्ति की दाहिना हाथ टूट क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसे किसी ने देखा तक नहीं। मां तारा स्थान में इन दो महत्वपूर्ण घटनाओं से स्पष्ट होता है कि उग्रतारा मंदिर एवं दुर्लभ मूर्तियां यहांअसुरक्षित हैं और लापरवाही का आलम यही रहा तो कौन-सी मूर्ति कब चोरी चली जाएगी यह कहना मुश्किल है। उग्रतारा मंदिर के गर्भगृह से गायब बौद्धकालीन ऋषि यज्ञावस्था की मूर्ति जेनऊ पहने नजर आते हैं और यही कारण है कि इतिहासकार इस मूर्ति को बौद्ध एवं ब्राह्मण के बीच समन्वय मूर्ति के रूप में मान्यता प्रदान करते हैं।

लेकिन मूर्ति कब और कैसे गायब हुई इसकी जानकारी किसी को नहीं है। अद्भूत मूर्ति के गायब होने से लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। शोधकर्ता के लिए भविष्य में अन्य समस्या उत्पन्न होने की आशंका गहराने लगी है। इतिहासकारों के अनुसार लंबे समय पूर्व खुदाई के दौरान मूर्ति पाई थी। जिसे पुरातात्विक विदों ने विभिन्न काल-खंडों का प्राचीन अवशेष बताया।

 

गायब अद्भूत मूर्ति की फाइल तस्वीर।

मूर्तियों की सुरक्षा-व्यवस्था में प्रशासन की दिलचस्पी नहीं

सरकार की उदासीनता के कारण ऐसी मूर्तियों को मंदिर परिसर में ही रखा गया। लेकिन उसकी सुरक्षा-व्यवस्था में भी प्रशासन ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। नतीजा यह हुआ कि धीरे-धीरे कई महत्वपूर्ण मूर्तियां मंदिर परिसर से गायब होती चली गयी। कन्दाहा स्थित सूर्य मंदिर परिसर से भी अन्य प्राचीन मूर्तियों की चोरी हो चुकी है। इतना ही नहीं कारू संग्रहालय से बौद्ध की मूर्ति आज तक नहीं मिली। सोनबर्षा के विराटपुर स्थित चंडी स्थान मंदिर से मां चंडिका की गायब मूर्ति का भी अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।

2012 में श्रीउग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव के फ्लेक्सी पर अंकित था मूर्ति का फोटो

वर्ष 2012 में जब पहलीबार श्रीउग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया था। उसमें फ्लेक्सी पर बौद्धकालीन ऋषि यज्ञावस्था की मूर्ति छपवाई गई थी। वह आज मंदिर परिसर में दिखाई नहीं दे रही है।

धरोहर की शोभा बढा रही मूर्ति की महत्ता को देखते हुए लोगों के बीच चर्चा है कि जो मूर्ति इस स्थल को बौद्ध और ब्राह्मण के रुप में प्रमाणित करता था वह मंदिर से गायब कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? न्यास समिति के पूर्व सचिव नारायण चौधरी ने प्रभार में ऐसा कुछ भी नहीं सौंपा- मंदिर के पुजारी मूर्ति सुरक्षा के लिए न्यास को जिम्मेवार मानती है।

वहीं प्रशासन द्वारा मंदिर सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षा गार्ड भी इस सबंध में जानकारी रहने की बात कही। न्यास समिति गठन के 11 वर्ष बाद भी इन भग्नावशेष को सुरक्षित करने के ठोस उपाय नहीं किया गया है।

मूर्ति की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई


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