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कोसी नदी पर कठडूमर और डेंगराही में पुल बनाने का लोकसभा में गूंजा मामला

Saharsa News - कोसी नदी के कठडूमर और डेंगराही घाट पर पुल बनाने का मामला पहलीबार लोक सभा में गूंजा है। मधेपुरा के जदयू सांसद दिनेश...

Nov 21, 2019, 09:11 AM IST
Saharsa News - the issue of building bridges at kathdumar and dangrahi on kosi river resonated in lok sabha
कोसी नदी के कठडूमर और डेंगराही घाट पर पुल बनाने का मामला पहलीबार लोक सभा में गूंजा है। मधेपुरा के जदयू सांसद दिनेश चन्द्र यादव ने कोसी तटबंधों के बीच बसी लाखों आबादी के समक्ष आजादी के बाद से अब तक उत्पन्न आवागमन संकट का मामला उठाते कठडूमर घाट और डेंगराही घाट के पास कोसी नदी पर दो पुल बनाने की जरूरत सरकार को बताई है।

कोसी नदी पर सहरसा में अब तक बना है एकमात्र पुल

कोसी नदी में अब तक सहरसा जिला के हिस्से में एकमात्र 2 कि.मी. लंबा बलुआहा पुल का निर्माण किया गया है। इस पुल के बन जाने से कोसी के लोगों का दरभंगा सहित समस्तीपुर , हाजीपुर और राजधानी पटना से सीधा सड़क संपर्क बहाल हो गया है। लेकिन एकमात्र पुल के बनने से कोसी तटबंध के अंदर बसी आधे से अधिक आबादी को इसका फायदा नहीं हो रहा है।

सांसद दिनेश।

कोसी नदी में पुल नहीं रहने से जान जोखिम में डालकर ऐसे करनी पड़ती है यात्रा।

अस्पताल और कॉलेज की नहीं है व्यवस्था

शून्य काल के दौरान मामला उठाते सांसद दिनेश चन्द्र यादव ने लोकसभा में कहा कि बिहार राज्य के सहरसा जिला से कोसी नदी के गुजरने के कारण तटबंध के भीतर क्षेत्र के दर्जनों पंचायतों के अलावा खगड़िया जिले का भी बहुत बड़ा भू-भाग का संपर्क प्रखंड , अनुमंडल और जिला मुख्यालय से कटा हुआ है। जिसके कारण उन क्षेत्रों में विकास की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सांसद ने कहा कि उन क्षेत्रों में अस्पताल एवं कॉलेज नहीं रहने के कारण वहां के लोगों को न तो स्वास्थ्य सुविधा और न ही शिक्षा सुविधा उपलब्ध हो पाती है। कोसी नदी इतना प्रखर और विकराल है कि रात में उसमें नाव भी नहीं चलती। रात में यदि कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए तो उसे मरना ही मरना है। ऐसे में कोसी नदी पर कठडूमर एवं डेंगराही घाट पर पुल नहीं रहने के कारण उन क्षेत्रों कलोगों का जन-जीवन नर्क सा बना हुआ है।

125 किमी लंबे बांध के बीच फंसी है लाखों की आबादी

नेपाल से निकलने वाली कोसी नदी सुपौल और सहरसा जिले में 125 कि.मी. की दूरी तय करने के बाद खगड़िया जिले की सीमा से गुजरते हुए कटिहार के कुरसैला के समीप गंगा में मिलती है। नदी को नियंत्रित करने के लिए सहरसा और सुपौल में पूर्वी और पश्चिमी कोसी बांध का निर्माण 60 के दशक में पूरा किया गया। उस दिन से अबतक 10 लाख से अधिक आबादी दोनों तटबंधों के बीच फंसी है। कोसी नदी पर पहला पुल सुपौल के सरायगढ़ के समीप कोसी महासेतू बना, फिर सहरसा जिले की सीमा में महिषी के बलुआहा घाट पर दूसरा पुल बना । दक्षिणी भाग में कठडूमर और डेंगराही घाट के समीप दो और पुल बन जाने से सहरसा, खगड़िया जिले की लाखों आबादी का जिला व सिमरी अनुमंडल मुख्यालय से सीधा संपर्क बहाल हो जाएगा।

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