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आयुष चिकित्सकों से करातेे हैं इमरजेंसी ड्यूटी परेशानी होने पर बाहर के डॉक्टर से लेते हैं सलाह

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:06 AM IST

Samstipur News - बताया जाता है कि डॉक्टरों को यहां से 15 किलोमीटर दूर समस्तीपुर में डेरा लेकर रहना पड़ता है। वहां अपनी ड्यूटी के...

Khanpur News - ayush doctors are advised to take emergency advice from the outside doctor on emergency problems
बताया जाता है कि डॉक्टरों को यहां से 15 किलोमीटर दूर समस्तीपुर में डेरा लेकर रहना पड़ता है। वहां अपनी ड्यूटी के अनुसार आना जाना लगा रहता है ।ऐसे में किसी कारणवश विलम्ब होने के बाद इसका खामियाजा भी मरीजों को ही भुगतना पड़ता है। जानकारी के अनुसार यह अस्पताल 30 बेडों की हो चुकी है। लेकिन हकीकत यही है कि अब भी अस्पताल को 6 बेडों से ही काम चलाना पड़ रहा है। यहां एमबीबीएस चिकित्सक, ड्रेसर, महिला स्वास्थ्य परिदर्शिका आदि की कमी है। अस्पताल में आयुष चिकित्सकों से इमरजेंसी व रात्रि ड्यूटी करवाई जाती है। साथ ही एलोपैथ दवा भी लिखते हैं। जबकि ऐसे चिकित्सकों से एलोपैथ दवा लिखवाना व इमरजेंसी ड्यूटी नहीं करानी है। ऐसे चिकित्सकों की माने तो अन्य जगहों पर कोई मामले फंसने पर कई चिकित्सकों पर कार्रवाई भी की गई है। फिर भी आयुष चिकित्सकों को का जान जोखिम में डाला जा रहा है।

विभागीय आदेश की धज्जियां उड़ाकर मंगलगढ़ स्थित निजी विद्यालय में हो रहा था वर्ग संचालन

हसनपुर| भीषण गर्मी के कारण वर्ग एक से आठवीं तक के बच्चों के लिए विभागीय तौर पर सरकारी व निजी विद्यालयों में अवकाश के आदेश की धज्जियां उड़ाने का मामला उजागर हुआ। प्रखंड के मंगलगढ़ स्थित निजी विद्यालय सेंट जोंस पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को बच्चों के वर्ग संचालन किए जाने की सूचना पर बीईओ ललन कुमार पांडेय ने इस विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में विद्यालय में वर्ग एक से आठवीं तक के बच्चों के वर्ग संचालन किए जाने का मामला सत्य पाया गया। बीईओ ने विद्यालय के निदेशक को फटकार लगाते हुए कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट तैयार कर रोसड़ा एसडीओ अमन कुमार सुमन को भेजा। इस संबंध में बीईओ ने बताया कि विभागीय आदेशानुसार प्रखंड क्षेत्र में सभी सरकारी व निजी विद्यालयों में वर्ग एक से आठवीं तक के बच्चों को अवकाश दिया गया है।

कहते हैं पीएचसी प्रभारी, मजबूरी में कराई जाती है इमरजेंसी ड्यूटी

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि यहां एमबीबीएस डॉक्टर की कमी है। मात्र दो एमबीबीएस डॉक्टर हैं। एक डॉक्टर दरभंगा डीएमसीएच में 6 वर्षों से प्रतिनियुक्त हैं। इसलिए मजबूरी में आयुष चिकित्सक से ड्यूटी ली जाती है। लेकिन उन्हें कोई भाड़ी-भाड़ी दवा लिखने को नहीं कहा गया है। अस्पताल के बगल में एक एमबीबीएस डॉक्टर डेरा लेकर रहते हैं। कोई परेशानी होने पर उनसे संपर्क कर लेने को कहा गया है। चिकित्सक की कमी है। कोई भी चिकित्सक 24 घंटे ड्यूटी कर नहीं सकते हैं।

9 वर्ष पूर्व हुई थी आयुष चिकित्सक की नियुक्ति

बताया गया कि वर्ष 2010 में आयुष चिकित्सकों की बहाली स्वास्थ्य केंद्रों में हुई थी। उसी समय से स्वास्थ्य सचिव का आदेश पारित है कि किसी भी परिस्थिति में आयुष चिकित्सकों से इमरजेंसी या फिर रात्रि ड्यूटी नहीं कराना है। फिर भी इमरजेंसी ड्यूटी के साथ एलोपैथ ओपीडी करवाई जाती है। जबकि कई बार ऐसे डाॅक्टर पत्र भेजकर खुद को इस तरह की ड्यूटी नहीं लेने की गुहार लगा चुके हैं। आयुष चिकित्सक ड्यूटी के समय अपने को हमेशा असहज महसूस करते हैं।

14 कमरों में सारी व्यवस्था

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कुल 14 कमरे हैं, जिसमे सभी कामों को का निपटारा किया जाता है। एक कमरे में दो से तीन कामों को निपटाया जा रहा है। यहां पैथोलॉजी, ओपीडी, स्टोर रूम, मीटिंग रूम की जरूरत है।मीटिंग रूम नहीं रहने के कारण समय-समय पर होने वाली बैठक व प्रशिक्षण कार्य अस्पताल के अंदर बरामदे पर ही आयोजित कर दी जाती है। जबकि ओपीडी का कार्य बाहर बरामदे पर की जाती है। इस कारण मरीजों व कर्मियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। एक्स-रे का कार्य ठप है। जबकि स्टोर रूम नहीं होने के कारण पोलियो-वैक्सीन कैरियर व आइस पैक जैसी अन्य सामग्री सालों भर बाहर में यत्र-तत्र पड़ा रहता है।

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