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बायाे-फोर्टिफाइड फसल उत्पादों के सेवन से बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं को होगा लाभ

एक वर्ष पहले
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के परिसर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंची आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए बायो-फोर्टिफाइड फसलों के उत्पादन, किचेन गार्डनिंग एवं पोषक तत्वों से भरी थाली के विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन केवीके के वरीय वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. आरके तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर डॉ. तिवारी ने मौजूद सेविकाओं को बायो-फोर्टिफाइड फसलों के उत्पादन, किचेन गार्डनिंग और पोषक तत्वों से थाली को भरपूर बनाने सहित विभिन्न बिंदुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और घटते जोत को देखकर हमें अपनी एक-एक इंच जमीन का उचित और सही-सही प्रयोग करना होगा।

भोजन में पोषक तत्वों की कमी होने पर हाेती है बीमारी, पोषक तत्वों से युक्त भोजन करें


कार्यक्रम को डॉ. तिवारी के अलावे वैज्ञानिक डॉ. सुभा राय ने भी संबोधित किया। उन्होंने पोषक तत्वों से भरपूर थाली के विषय पर सेविकाओं को जानकारी देते हुए कहा कि शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने पर हम कई तरह की गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। हमलोग प्रतिदिन जो सामान्य भोजन प्राप्त करते है उससे हमारे शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में अब हमें काफी सोच समझकर व पोषक तत्वों वाले भोजन को ही ग्रहण करने की आवश्यकता है। उन्होंने बायाे-फोर्टिफाइड फसल उत्पादन के सेवन को काफी कारगर बतातें हुए कहा कि इसका सेवन खासकर बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी है। विवि के हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के वैज्ञानिक डॉ. उदित कुमार ने किचन गार्डनिंग पर जानकारी देते हुए कहा कि महिलाएं अगर चाहे तो वे अपने किचन के खाली पड़े जगहों में भी कम से कम परिवार के खाने योग्य विभिन्न तरीकों की साग-सब्जियों का उत्पादन कर सकती है। कार्यक्रम को इन सबके अलावे विवि के कृषि अभियंत्रण के वैज्ञानिक डॉ. रवीश चंद्रा व केवीके के मृदा वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम में मौजूद प्रशिक्षणार्थी।

कार्यक्रम को संबोधित करते डॉ. तिवारी।
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