कृषि के विकास के बगैर देश का विकास संभव नहीं

Samstipur News - डॉ.राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा के विद्यापति सभागार में बुधवार से आयोजित हुए रिसर्च काउंसिल खरीफ 2019 की...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:10 AM IST
Pusa News - development of the country is not possible without the development of agriculture
डॉ.राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा के विद्यापति सभागार में बुधवार से आयोजित हुए रिसर्च काउंसिल खरीफ 2019 की तीन दिवसीय छठी बैठक शुक्रवार को संपन्न हो गई। बैठक के दौरान जहां विवि के द्वारा पोषित 35 नए अनुसंधान प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी गई। वहीं पुराने अनुसंधान प्रोजेक्ट की समीक्षा भी की गई। कुलपति डॉ.आर सी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस बैठक में खरीफ मक्का पर टिलेज और न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट की नई तकनीक को रिलीज के लिए अनुशंसित किया गया। इस तकनीक का विकास विवि के वैज्ञानिक डॉ. मृत्युंजय कुमार एवं उनके अन्य सहयोगी वैज्ञानिकों ने किया है। बैठक में धान के दो शंकर प्रभेद एराइज तेज गोल्ड और एराइज 6129 गोल्ड को रिलीज के लिए राज्य सरकार को अनुशंसित किया गया। एराइज तेज गोल्ड 115 से 120 दिनों में पककर तैयार होने वाला प्रभेद है। जिसकी उपज अन्य शंकर धान की उपज से लगभग 25 प्रतिशत ज्यादा है। इस धान का चावल छोटा तथा बेहतर होता हैं। जबकि एराइज 6129 गोल्ड 130 दिनों में पक कर तैयार होने वाला प्रभेद है। इसकी उपज अन्य धान के प्रभेदों से बेहतर होने के साथ-साथ इसका चावल लंबा दाना वाला तथा खूबसूरत होता है। कुलपति ने बैठक में इन सबके अलावे मत्स्य बंधु तकनीक को भी रिलीज किया। मत्स्य बंधु ठेला आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मछुआरों के लिए एक सोलर चालित रेफ्रिजरेटर ठेला है। इसमें मछली लगभग 7 दिनों तक ताजा रहती है। इस ठेले में 30 से 35 किलो तक मछली रखी जा सकती है। राज्य सरकार की ओर से मत्स्य बंधु ठेला के खरीद के ऑर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं। समापन सत्र के दौरान वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि अनुसंधान के क्षेत्र में कृषि वैज्ञानिकों में इनोवेटिव विचार लाने की आवश्यकता है। वैज्ञानिकों को चाहिए कि वे आम तौर पर चल रहे अनुसंधान कार्यों से हटकर किसानों के लिए कुछ अलग सोचे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश का विकास कृषि के विकास के बगैर संभव नही होगा। कृषि के विकास के लिए वैज्ञानिकों को विश्व स्तर के अनुसंधान को ध्यान में रखकर विभिन्न तकनीकों और प्रभेदों को विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को किसानों के बीच जाकर तथा उनसे बात कर उनकी समस्याओं को जानना चाहिए। रिसर्च काउंसिल की बैठक में निदेशक अनुसंधान डॉ. मिथिलेश कुमार, सहायक निदेशक डॉ. एनके सिंह आदि थे।

रिसर्च काउंसिल की बैठक के समापन सत्र मौजूद वैज्ञानिक।

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