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मूसलाधार बारिश से करेह के जलस्तर में वृिद्ध, सिरसिया गांव पर बाढ़ का खतरा

एक वर्ष पहले
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प्रखंड क्षेत्र सहित आस-पास के क्षेत्रों में पिछले रविवार से लेकर शुक्रवार तक लगातार रुक-रुक कर हुई मूसलाधार बारिश से करेह नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। बारिश होने से नदी में करीब दो से तीन फीट पानी की बढ़ोतरी हुई है। नदी का पानी खेतों में फैलने लगा है। इस कारण प्रखंड के भटवन पंचायत के सिरसिया गांव पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बताया जाता है कि करीब 8000 की आबादी वाला सिरसिया गांव करेह नदी के पेटी में बसा हुआ है। प्रत्येक साल नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण यह गांव अगस्त से लेकर दिसंबर तक बाढ़ प्रभावित रहता है। हालांकि इस साल बारिश की पहली धमक में ही एक माह पूर्व जुलाई में ही नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने लगी है। इससे प्रत्येक साल की अपेक्षा इस साल जुलाई माह में ही लोगों को बाढ़ का भय सताने लगा है। ग्रामीणों की माने तो मूसलाधार बारिश होने से नदी के जलस्तर में करीब तीन फीट बढ़ोतरी का अनुमान है। यदि डेढ़ फीट पानी और बढ़ जाती है तो गांव की ओर पानी बढ़ना शुरू हो जाएगा। ग्रामीणों में मतीन अहमद, मो.शाहीद उर्फ डब्लू आदि ने बताया कि अब प्रशासन को चाहिए कि नदी का जायजा लेकर बाढ़ से बचाव या फिर तत्काल सहायता के लिए पहल की जाए।

गांव की आधी आबादी नदी की पेटी में व आधी आबादी बसा है तटबंध पर | भटवन पंचायत के सिरसिया गांव की आधी आबादी करेह नदी की पेटी में व आधी आबादी तटबंध पर बसा हुआ है। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने के कारण नदी की पेटी में बसा हुआ आबाधी बाढ़ से प्रभावित हो जाता है। बाढ़ से बचने के लिए लोग करेह नदी के तटबंध या फिर ऊंचे स्थलों पर शरण लेने को विवश हो जाते हैं। इस स्थिति में गांव से बाहर निकलने के लिए लोगों का एकमात्र सहारा नाव ही होता है।

विभागीय तौर पर सिरसिया को घोषित किया जा चुका है आपदा प्रभावित गांव

सिरसिया में बाढ़ आने की घटना कोई नई नहीं है। इसे प्रकृति का अभिषाप ही माना जाए कि यह गांव नदी की पेटी में बसा है। इस कारण प्रत्येक साल यह गांव बाढ़ से प्रभावित होता है। प्रशासनिक तौर पर बाढ़ पीड़ितों को सहायता प्रदान किया जाता है।

इस रिपोर्ट के आधार पर ही इसी साल विभागीय तौर पर इस गांव को आपदा प्रभावित घोषित कर दिया गया है। आपदा प्रभावित की घोषणा के समय उपस्थित जिला स्तरीय पदाधाकारियों ने बताया था कि आपदा की स्थिति में विभागीय तौर पर इस गांव में टीमें भेजी जाएगी। टीम के सदस्य बाढ़ पीड़ितों को सहायता प्रदान करेंगे।

खेतों में फैलने लगा है नदी का पानी, सुरिक्षत ठिकानों की तलाश में जुटे लोग

मूसलाधार बारिश से जलस्तर बढ़ने के बाद उफनाती हुई करेह नदी।

भास्कर न्यूज| हसनपुर

प्रखंड क्षेत्र सहित आस-पास के क्षेत्रों में पिछले रविवार से लेकर शुक्रवार तक लगातार रुक-रुक कर हुई मूसलाधार बारिश से करेह नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। बारिश होने से नदी में करीब दो से तीन फीट पानी की बढ़ोतरी हुई है। नदी का पानी खेतों में फैलने लगा है। इस कारण प्रखंड के भटवन पंचायत के सिरसिया गांव पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बताया जाता है कि करीब 8000 की आबादी वाला सिरसिया गांव करेह नदी के पेटी में बसा हुआ है। प्रत्येक साल नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण यह गांव अगस्त से लेकर दिसंबर तक बाढ़ प्रभावित रहता है। हालांकि इस साल बारिश की पहली धमक में ही एक माह पूर्व जुलाई में ही नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने लगी है। इससे प्रत्येक साल की अपेक्षा इस साल जुलाई माह में ही लोगों को बाढ़ का भय सताने लगा है। ग्रामीणों की माने तो मूसलाधार बारिश होने से नदी के जलस्तर में करीब तीन फीट बढ़ोतरी का अनुमान है। यदि डेढ़ फीट पानी और बढ़ जाती है तो गांव की ओर पानी बढ़ना शुरू हो जाएगा। ग्रामीणों में मतीन अहमद, मो.शाहीद उर्फ डब्लू आदि ने बताया कि अब प्रशासन को चाहिए कि नदी का जायजा लेकर बाढ़ से बचाव या फिर तत्काल सहायता के लिए पहल की जाए।

गांव की आधी आबादी नदी की पेटी में व आधी आबादी बसा है तटबंध पर | भटवन पंचायत के सिरसिया गांव की आधी आबादी करेह नदी की पेटी में व आधी आबादी तटबंध पर बसा हुआ है। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने के कारण नदी की पेटी में बसा हुआ आबाधी बाढ़ से प्रभावित हो जाता है। बाढ़ से बचने के लिए लोग करेह नदी के तटबंध या फिर ऊंचे स्थलों पर शरण लेने को विवश हो जाते हैं। इस स्थिति में गांव से बाहर निकलने के लिए लोगों का एकमात्र सहारा नाव ही होता है।

विभागीय तौर पर सिरसिया को घोषित किया जा चुका है आपदा प्रभावित गांव

सिरसिया में बाढ़ आने की घटना कोई नई नहीं है। इसे प्रकृति का अभिषाप ही माना जाए कि यह गांव नदी की पेटी में बसा है। इस कारण प्रत्येक साल यह गांव बाढ़ से प्रभावित होता है। प्रशासनिक तौर पर बाढ़ पीड़ितों को सहायता प्रदान किया जाता है।

इस रिपोर्ट के आधार पर ही इसी साल विभागीय तौर पर इस गांव को आपदा प्रभावित घोषित कर दिया गया है। आपदा प्रभावित की घोषणा के समय उपस्थित जिला स्तरीय पदाधाकारियों ने बताया था कि आपदा की स्थिति में विभागीय तौर पर इस गांव में टीमें भेजी जाएगी। टीम के सदस्य बाढ़ पीड़ितों को सहायता प्रदान करेंगे।

बाढ़ के कारण स्कूलों में पांच से छह महीने पढ़ाई रहती है बाधित | बाढ़ के कारण सिरसिया में प्रत्येक साल पांच से छह महीने स्कूलों में पठन-पाठन की व्यवस्था ठप हो जाती है। बिना विभागीय आदेश के ही स्कूलों को बंद रखना प्रधानाध्यापकों की विवशता हो जाती है। गांव की सड़कों पर व स्कूल परिसर में बाढ़ के पानी फैलने से अभिभावक अपने बच्चे को स्कूल भेजने से पूरी तरह परहेज करते हैं। इसका फायदा स्कूल में कार्यरत प्रधानाध्यापक, शिक्षक व शिक्षिकाओं को मिलता है। वे बाढ़ के बहाने घर पर आराम फरमाते हैं। बताया जाता है कि बाढ़ के कारण सिरसिया गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय, मध्य विद्यालय में पठन-पाठन की क्रिया ठप हो जाती है।

बिथान प्रखंड की चार पंचायतों में भी पहुंचता है बाढ़ का पानी

करेह नदी के साथ-साथ कमला, कोसी व बलान नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से बिथान प्रखंड की चार पंचायतें बेलसंडी, नरपा, सलहा चंदन व सलहा बुजुर्ग भी बाढ़ प्रभावित हो जाती है। बाढ़ के कारण लोगों को काफी परेशानियां होती है। गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। इन चार पंचायतों के लोग बाढ़ के बचने के लिए वाटरबेज बांध पर शरण लेते हैं। यहां भी आधा दर्जन से अधिक स्कूलों में पठन-पाठन ठप हो जाती है।

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