देसी गायों के पंचगव्य औषधियों एवं जैविक कृषि उत्पादों के निर्माण संबंधी जानकारी दी

Samstipur News - देशी गायों के पंचगव्य औषधियों एवं जैविक कृषि उत्पादों के निर्माण से संबधित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन रोसड़ा...

Dec 04, 2019, 09:10 AM IST
Rosara News - information related to manufacture of panchgavya drugs and organic agricultural products of indigenous cows
देशी गायों के पंचगव्य औषधियों एवं जैविक कृषि उत्पादों के निर्माण से संबधित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन रोसड़ा गोशाला में जगन्नाथ महतो की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डॉ. धनेश्वर महतो ने देशी गौ पालन करने और इससे होने वाले लाभों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने गौ सेवा को माता की सेवा के समान बताया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय गौ सेवा प्रशिक्षण प्रमुख केईएन राघवन ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि देशी गौ पालन व गौ सेवा से हमारे गांवों में मिलेगी खुशियाली , शांति , समृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य। उन्होंने आयुर्वेद शास्र में गौ के दुग्ध , दही , घी , गोबर एवं गौ मूत्र से स्वास्थ्य संरक्ष्ण एवं संवर्द्धन की चर्चा करते हुए इसे अमृत के समान बताया । गाय का दूध बच्चे , वृद्ध , माता और निर्बल लोगों के लिए सदा लाभकारी बताया। गाय की दही अम्लरसयुक्त , पवित्र , रुचि कारक , वात - दोष नाशक , हृदय के लिए हितकर पौष्टिकारक होना बताया। गाय का घी नेत्र रोगों में लाभदायक , मेधाशक्ति को बढ़ाने वाला तथा वात - पित , कफ को नाश करने वाला बताया। शुद्द और पवित्र होने के कारण धार्मिक अनुष्ठान में काम आता है । उन्होंने कहा कि वेद शास्त्र के मुताबिक गोबर में साक्षात लक्ष्मी का वास होता है । गोबर से लिपे आंगन व बरामदे आणविक विकिरणों का प्रतिकार करने में पूर्ण सक्ष्म और यज्ञ या हवन के आहुति में अन्य सामाग्रियों में गाय के गोइठे का प्रमुख स्थान बताया।

गोबर से जैविक खाद का निर्माण कर खेतों मेंअच्छी फसलें उपजाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। इससे कभी खेत बंजर नहीं होता। गौ मूत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कीट नाशक के तौर पे इसमें मात्रा के अनुसार पानी मिलाकर खेतों में कीट नाशक के तौर पर इस्तेमाल करने तथा पिल्ही , शोथ , सूजन , गैस , कब्ज , जांडिस , चर्म रोग, कैंसर आदि रोग - बीमारियों में इससे औषधि निर्माण में काम आने की बातें कही।

उन्होंने उपस्थित लोगों से गौ मूत्र का मंडारण तांबे या पीतल के वर्त्तन में नहीं करने और इसे फ्रीज में नहीं रखने की सलाह दी। कार्यक्रम के उद्देश्यों पर उत्तर बिहार सह प्रांत गो सेवा प्रमुख दीवेश झा ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए गाय से वास्तविक लगाव रखने पर बल दिया। उन्होंने पंचगव्य से तैयार होने वाली औषधियों को स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक बताया। इसके अलावे कार्यक्रम को मुकेश राय , कार्यक्रम के संयोजक पूर्व वार्ड पार्षद सुधीर प्रसाद , रामसेवक महतो , अनिल चौधरी आदि ने वनौषधि के प्रयोग से दुग्ध उत्पाद पशुओं के लिए अत्यंत ही लाभकारी बताया । कार्यक्रम का शुभारंभ गोशाला परिसर स्थित कृष्ण गोपाल को समर्पित गीतों के गायन से हुआ।

एक दिवसीय कार्यशाला में गौ सेवा को माता की सेवा के समान बताया

कार्यशाला को संबोधित करते मुख्य अतिथि केईएन राघवन।

कार्यशाला में भाग लेते गणमान्य लोग व गो सेवक।

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