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सीढ़ी घाट सबसे खतरनाक, यहां अर्घ्य देने नहीं जा सकेंगे

दीपावली के बाद नगर व जिला प्रशासन छठ की तैयारी में जुट गया है। छठ को लेकर रविवार को व्रती नहाय-खाय करेंगी। इसके साथ...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 04:42 AM IST
Samastipur - ladder ghat is the most dangerous can not be used here
दीपावली के बाद नगर व जिला प्रशासन छठ की तैयारी में जुट गया है। छठ को लेकर रविवार को व्रती नहाय-खाय करेंगी। इसके साथ ही आस्था का चार दिवसीय महापर्व शुरू हो जाएगा। विभागीय स्तर पर छठ घाटों की सुरक्षा की लिए मजिस्ट्रेट की तैनाती को लेकर कागजी कार्रवाई चल रही है। इसी बीच बूढ़ी गंडक नदी के मगरदही स्थित खतरनाक सीढ़ी घाट की बैरिकेडिंग कर दी गई है। बताया जाता है कि यहां से व्रतियों को अर्घ्य देने पर रोक लगेगी। वहीं नदी किनारे बनने वाले दर्जनभर से ज्यादा घाटों के लिए दो वाच टावर का निर्माण भी कराया जाएगा। इससे सभी घाटों पर तैनात मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया जा सके। बताया जाता है कि बूढ़ी गंडक नदी के घाटों पर 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु जुटते हैं। इस कारण यहां प्रत्येक घाट पर सुरक्षा बलों के साथ ही मजिस्ट्रेट की तैनाती भी की जाती है। यहां मौजूद नीम गली घाट, चौधरी घाट, पीपड़ा घाट, प्रसाद घाट, धोबिया घाट, रेलवे पुल घाट, चीनी मिल घाट, काली मंदिर घाट, महावीर घाट आदि की सफाई व्यवस्था में नगर प्रशासन जुटा है।

आज से चार दिनी महापर्व शुरू, सीढ़ी घाट की बैरिकेडिंग, अन्य घाटों की हुई सफाई

मोटर वोट से लगाई जाएगी गश्त बच्चों के नहाने पर रोक रहेगी

बताया जाता है कि संध्या व सुबह के अर्घ्य के समय किसी अनहोनी से निपटने के लिए सरकारी मोटर वोट से गश्त लगाई जाएगी। इसमें नप के अलावा एसडीआरएफ, स्थानीय गोताखोर व पुलिस अधिकारी भी नाव पर मौजूद होंगे। पूजा के दौरान बच्चों के स्नान करने पर रोक होगी। हिन्दुओं की आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ 11 नवंबर को नहाय-खाय से शुरू होगा।

नहाय-खाय के लिए 40 रुपए पीस बिका कद्दू

वहीं व्रतियों के लिए नहाय-खाय के दिन कद्दू खाने की विशेषता को लेकर मंडियों में कद्दू 40 रुपए पीस बिका। हालांकि लंबे प्रजाति का कद्दू 20 रुपए किलो बिकी पर गोल प्रजाति का कद्दू 25-30 रुपए किलो या पीस में बिका। सभी व्रती परिवारों ने व्रतियों के लिए कद्दू खरीदे।

घाटों पर निजी नाव के परिचालन पर रहेगी रोक


इस बार दुर्लभ शुभ संयोग में शुभ फलदायी और समृद्धिदायक है सूर्यदेव का अर्घ्यदान

समस्तीपुर | सूर्य को भगवान की संज्ञा दी गई है। इस बार छठ पर्व पर कई दुर्लभ शुभ संयोग बन रहे हैं जो शुभ फलदायी और समृद्धिदायक हैं। रविवार भगवान सूर्य का दिन माना जाता है इस दिन से छठ आरंभ हो रहा है। 11 नवंबर रविवार को नहाय-खाय पर सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। सांझ के अर्घ्यवाले दिन यानी 13 नवंबर को अमृत योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। छठ के अंतिम दिन अर्थात प्रात:कालीन अर्घ्य पर बुधवार 14 नवंबर को सुबह के समय छत्र योग का संयोग बन रहा है। इस योग को धन और समृद्धिदायक माना गया है। हिंदू धर्म में सूर्य को जल देने का बहुत महत्व है और छठ पूजा के पावन पर्व पर ढलते और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने से कई पापों का नाश होता है। पंडित शिवेन्द्र कुमार पांडेय कहते है कि भगवान सूर्यदेव की शक्ति व क्षमता प्रत्यक्ष रूप से सर्वविदित है। समस्त सृष्टि के पालनकर्ता भी यही हैं। इनकी कृपा के बिना पेड़-पौधे एवं जीव-जंतुओं का अस्तित्व ही संभव नहीं है। सूर्य की अनुकूलता से जातक को सभी क्षेत्र में मनचाहे फल की प्राप्ति संभव है।

चार दिनों का महापर्व

छठ चार दिनों का है। प्रथम दिन रविवार को नहाय-खाय, दूसरे दिन सोमवार को खरना, खरना के उपरांत व्रत रखते हुए तीसरे दिन मंगलवार को सायं काल में अस्ताचलगामी सूर्यदेव को पहला अर्घ्य तथा पुन: अगले दिन बुधवार को सूर्योदय काल में दूसरा अर्घ्य दान दिया जाएगा।

अर्घ्यदान का मंत्र

एहि सूर्य सहस्त्रंशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां देव गृहाणार्घ्य दिवाकर।। शुद्धता व श्रद्धापूर्वक पूजन से सूर्य देव प्रसन्न होकर व्रती को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। इस बार छठ व्रत में विशेष योग संयोग बन रहा है। प्रथम व द्वितीय दोनों ही अर्घ्यदान के समय सर्वार्थसिद्धि योग विद्यमान रहेगा।

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