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भगवान श्रीराम ने धर्म व सदाचार का पालन कर राजधर्म का किया निर्वहन, भाई भरत के लिए राजगद्दी को भी त्याग दिया : रामसेवक

एक वर्ष पहले
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प्रखंड के चकोटी गांव स्थित श्री रामजानकी मंदिर परिसर में आयोजित श्री श्री 1008 श्री सीताराम महायज्ञ हवन के साथ संपन्न हो गया। वि धायक अशोक कुमार मुन्ना, जिला पार्षद स्वर्णिमा सिंह, शिक्षक लालबाबू आदि ने यज्ञ स्थल पहुंचकर हवन किया। इस दौरान यज्ञ स्थल पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। विधि-विधान के साथ यज्ञ परिसर में स्थापित 551 कलश व देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को जल में विसर्जित किया गया। यज्ञ के अंतिम दिन श्रद्धालुओं के बीच कथा परोसते हुए यज्ञ के आयोजक राष्ट्रीय संत महामंडलेश्वर रामसेवक दास जी महाराज ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम एक त्यागी पुरुष थे। उन्होंने पिता महाराज दशरथ की आज्ञा का पालन करते हुए राज त्याग कर प|ी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों के लिए वनवास को चल दिए। उन्होंने कहा कि श्री राम-जानकी की सभी चेष्टाएं धर्म, ज्ञान, नीति, शिक्षा, गुण, प्रभाव, तत्व एवं रहस्य से भरी हुई हैं।

उनका व्यवहार देवता, ऋषि, मुनि, मनुष्य, पक्षी, पशु आदि सभी के साथ ही प्रशंसनीय, अलौकिक और अतुलनीय है। इसके अलावे सुग्रीव, हनुमान, रीछ-वानर, जटायु पक्षी तथा विभीषण आदि राक्षसों के साथ भी उनका दयापूर्ण, प्रेमयुक्त और त्यागमय व्यवहार हुआ है। उन्होंने साक्षात पूर्णब्रह्म परमात्मा होते हुए भी मित्रों के साथ मित्र जैसा, माता-पिता के साथ पुत्र जैसा, सीता जी के साथ पति जैसा, भाइयों के साथ भाई जैसा, सेवकों के साथ स्वामी जैसा, मुनि और ब्राह्मणों के साथ शिष्य जैसा प्रेमपूर्ण व्यवहार किया है।

श्रीराम के व्यवहार से शिक्षा लेनी की जरूरत

भगवान श्री राम के व्यवहार व उनके जीवन से सीख लेने की जरूरत है। जहां कहीं सबसे बढ़कर सुंदर शासन होता है, वहां रामराज्य की उपमा दी जाती है। श्री राम के राज्य में प्राय: सभी मनुष्य परस्पर प्रेम करने वाले तथा नीति, धर्म, सदाचार और ईश्वर की भक्ति में तत्पर रहकर अपने-अपने धर्म का पालन करने वाले थे, सभी उदारचित्त और परोपकारी थे। वहां सभी पुरुष व स्त्रियां धर्म का पालन करने वाली थी। रामायण में श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के चरित्र की आज विश्व मे चर्चा होती है। उनकी प्रत्येक क्रिया में स्वार्थ त्याग और प्रेम का भाव झलक रहा है। महायज्ञ की समाप्ति के बाद ब्रह्मांड की रक्षा के लिए पौधरोपण किया गया। पर्यावरण प्रेमी त्रिपुरारी झा के सहयोग से विधायक, संत व जनप्रतिनिधियों ने यज्ञ परिसर में पौधरोपण कर लोगों को पर्यावरण की रक्षा का संदेश दिया। विधायक ने कहा कि यज्ञ के आयोजन से विश्व का कल्याण होता है। जबकि हरे पौधे लगाने से पर्यावरण की रक्षा की जाती है। इससे पर्यावरण शुद्ध रहता है। इसलिए लोगों को अधिक से अधिक संख्या में पौधरोपण करना चाहिए।

खानपुर के चकोटी मठ में कथा के दौरान जुटी श्रद्धालुओं की भीड़।
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