जीवन का सार है धर्म, यह मानव जीवन में पुरुषार्थ का आधार : सच्चिदानंद

Samstipur News - प्रखंड के बथुआ बुजुर्ग स्थित गायत्री शक्तिपीठ परिसर में पंच कुंडीय गायत्री महायज्ञ के तीसरे दिन सोमवार को...

Feb 18, 2020, 09:45 AM IST

प्रखंड के बथुआ बुजुर्ग स्थित गायत्री शक्तिपीठ परिसर में पंच कुंडीय गायत्री महायज्ञ के तीसरे दिन सोमवार को कथावाचक आचार्य सच्चिदानंद ने धर्म के महत्व को बताया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि धर्म जीवन का सार है। धर्म जीवन में न हो तो जीवन मुर्दे के समान हो जाता है। यह हमारे पुरुषार्थ का सर्वप्रथम आधार है। शेष जो कुछ भी होना है, इसी को आधार मानकर किया जाना है। उन्होंने कहा कि धर्म है तो अर्थ का मूल्य है। धर्म के बिना अर्थ, अनर्थ का कारण बन जाता है। अर्थात धर्म है तो सब कुछ है। धर्म नहीं तो किसी का कोई अर्थ नहीं है। धर्म से ही अर्थ निकलता है, अन्यथा सब अनर्थ है। वहीं राकेश कुमार सिंह ने कहा कि इस महायज्ञ की खास बात यह है कि गायत्री परिवार की नई पीढ़ी, किशोर-किशोरियां एवं युवा भी बड़ी संख्या में इस महायज्ञ में भागीदार हो रहे हैं। साथ ही भारतीय समाज ज्ञानमूलक समाज बनकर 21 वीं सदी में वे विश्व के नेतृत्व का कौशल अर्जित करें। इस अवसर पर दो दर्जन से अधिक बच्चों का मुंडन, यज्ञोपवित, नामाकरण, विद्यारंभ आदि संस्कार संपन्न कराए गए। महायज्ञ को सफल बनाने में गायत्री शक्ति पीठ के व्यवस्थापक प्रमोद प्रसाद सिंह, संजय कुमार सिन्हा, डॉ. रंजीत कुमार, टीपू जी, विजय कुमार चौरसिया, राजकुमारी चौरसिया, प्रेरणा कुमारी, रामकिशोर गिरि आदि सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।

निमंत्रण के बिना कहीं जाने से घटता है मान, सामने आते हैं गलत परिणाम


ताजपुर | प्रखंड क्षेत्र के कोठिया पंचायत के मुंदीपुर महावीर मंदिर के परिसर में आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान सप्ताह यज्ञ के तीसरे दिन सोमवार को विनीत दास ने बताया कि संसार में जब-जब पाप बढ़ता है, भगवान धरती पर किसी न किसी रूप में अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि कलयुग में भी मनुष्य सतयुग में भगवान कृष्ण के सिखाए मार्ग का अनुसरण करे तो मनुष्य का जीवन सफल हो सकता है। कथा के दौरान उन्होंने सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती को पिता के घर जाने पर अपमानित होना पड़ा। जिसके कारण उन्होंने स्वयं को अग्नि में स्वाहा कर लिया। हमें बिना निमंत्रण के कहीं नहीं जाना चाहिए। इससे न सिर्फ हमारा मान घटता है बल्कि हमें इसके परिणाम भी सहने पड़ते हैं। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद्भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया गया है। भागवत कथा के दौरान ध्रुव चरित, अजामिल व प्रह्लाद चरित्र का विस्तारपूर्वक वर्णन के साथ संगीतमय प्रवचन दिया गया।

कथा में मौजूद श्रद्धालु।

महायज्ञ में जुटी श्रद्धालुओं की भीड़।

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