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शिक्षकों-कर्मचारियों की गंभीर समस्या से जूझ रहा समस्तीपुर कॉलेज, स्टूडेंट्स को नुकसान
शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों की कमी के कारण समस्तीपुर कॉलेज, समस्तीपुर में पठन-पाठन के वातावरण में अपेक्षित सुधार संभव नहीं हो पा रहा है। कर्मचारियों की कमी के फलस्वरूप कार्यालय कार्यों का सफल संचालन भी कठिनाई से ही संभव हो पाता है। ल.ना. मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा अंतर्गत इस 1947 में स्थापित अंगीभूत महाविद्यालय में कला और विज्ञान के 11 विषयों में पीजी तक की पढ़ाई की व्यवस्था है लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण सिलेबस के साथ न्याय कर पाना किसी भी शैक्षणिक सत्र में पूरा नहीं हो पाता है। विश्वविद्यालय द्वारा इस महाविद्यालय को 13 अतिथि शिक्षक विभिन्न विषयों में दिए गए हैं। अतिथि शिक्षकों के योगदान से स्थिति में थोड़ा सुधार देखा जा रहा है। बीपीएससी द्वारा बहाल किए गए कुछ शिक्षकों के आने से भी कुछ खाली पदों को भरा जा सका है। लेकिन फिर भी शिक्षकों की कमी छात्र-छात्राओं द्वारा महसूस की जा रही है। इस महाविद्यालय में नामांकित 6 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षकों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई सही ढंग से कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
अंगीभूत महाविद्यालयों में भी शिक्षकों और कर्मचारियों की है कमी
समस्तीपुर कॉलेज में शिक्षकों के कुल 95 पद हैं। इसके विरुद्ध कुल 41 शिक्षक ही फिलहाल यहां हैं। इन शिक्षकों में 28 नियमित शिक्षक हैं और 13 अतिथि शिक्षक हैं। इसी प्रकार शिक्षकेतर कर्मियों की भी कमी महसूस की जा रही है। तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के कुल 41 पद हैं लेकिन यहां केवल 22 तृतीय श्रेणी के कर्मचारी कार्यरत हैं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के कुल पद 62 हैं लेकिन यहां अब केवल 23 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी कार्यरत हैं। इस संबंध में समस्तीपुर कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि जिला स्थित अन्य अंगीभूत महाविद्यालयों में भी शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी है लेकिन इस कॉलेज में स्थिति में प्राथमिकता के आधार पर इस समस्या के समाधान की आवश्यकता पीजी के छात्र छात्राओं के हित में किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों की कमी को कमजोर शैक्षणिक वातावरण के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार ठहराया।
समस्तीपुर कॉलेज।