शेफालिका झा ने विरह व प्रेम रस की कविता एना रूस-फूल हमरा से दूर जाऊ न... पर बटोरीं तालियां

Samstipur News - विद्यापति राजकीय महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को कवि सम्मेलन आयोजित की गई। कवि सम्मेलन का उद्घाटन एसडीओ विष्णुदेव...

Nov 12, 2019, 09:46 AM IST
Vidyapatinagar News - shefalika jha recites poetry of love and love away from ana roos phool hamra but applause
विद्यापति राजकीय महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को कवि सम्मेलन आयोजित की गई। कवि सम्मेलन का उद्घाटन एसडीओ विष्णुदेव मंडल, डीसीएलआर ज्ञानेन्द्र कुमार, विद्यापति परिषद के अध्यक्ष गणेश गिरि कवि, कैशर किंकर, विनोद हसौरा, डॉ. सच्चिदानंद पाठक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। अध्यक्षता साहित्यकार चांद मुसाफिर ने की। संचालन साहित्यकार सीताराम शेरपुरी ने किया। कवि सम्मेलन को सं‍बोधित करते हुए एसडीओ विष्णुदेव मंडल ने कहा कि मैथिल कोकिल कवि विद्यापति ने अपने पद के माध्यम से लौलीक क्रियाओं का वर्णन किया है। कवि सम्मेलन में बज्जिका के प्रमुख हस्ताक्षर प्रो. हरि नारायण सिंह हरि ने अपनी समसामयिक काव्य रचना ...न तुम जीते न हम जीते’ की प्रस्तुति से सामाजिक एकता को प्रतिबिंबित किया। साहित्यकार व कवि डाॅ. सुधीर प्रसाद सिंह सुधीर ने अपनी स्वरचित रचना “राजनीति में गूंथा एक माणिक भारत के इतिहास’ में के माध्यम से वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य का विवेचन किया। डा.नरेश कुमार विकल ने मैथिली में रचित अपनी रचना “पहुंना कहुंना कै चल आऊं अप्पन गाम के माध्यम से ग्रामीण परिवेश का चित्रण किया। नामचीन कवयित्री शेफालिका झा ने विरह व प्रेम रस की कविता ऐना रूस फूल हमरा से दूर जाऊं न... के जरिए नारी विरह का चित्रण किया। कवि चांद मुसाफिर ने “सिर्फ रोटियों से आदमी की भूख मिट नहीं सकती’ के माध्यम से वर्तमान स्थितियों पर जमकर प्रहार करते हुए उपस्थित लोगों को सोचने पर विवश कर दिया ।

कवि सम्मेलन में पहुंना कहुंना कै चल आऊं अप्पन गाम... पर श्रोताओं ने जमकर लगाए ठहाके

महोत्सव में सम्मानित होते कवि।

मिथिला परंपरा के अनुसार पाग-चादर से किया सम्मानित

खगड़िया से आए कवि कैलाश किंकर ने” विद्यापति कवि भक्त शिरोमणि,बिस्फी ग्राम्य भूमि मन भामिनी... , गणेश गिरी कवि ने ड्राइवर साहब हो विद्यापतिधाम पहुंचा दअ, विनोद कुमार समीर ने “ये युग पुरूष विद्यापति आपको शत-शत प्रणाम, राजीव रंजन चौहान ने “इतिहास साक्षी है विद्यापतिधाम, कवि प्रो. अवधेश कुमार झा ने अखिल जगत में पावनम विद्यापतिधाम हमरा, कवि व लेखक डा. कुमोद प्रसाद गिरी की समर्थक ही वोटों का अधिकार है... की प्रस्तुति से उपस्थित लोगों को बाग-बाग कर दिया। वहीं हितलाल पाठक, सयुम जावेद, प्रो गौतम त्रिवेदी, मनोहर गिरि, अरुण कुमार सिंह ने मैथिली, मगही, अंगिका, अवधी, ब्रज, भोजपुरी, उर्दू आदि भाषाओं में कविता सुनाकर खूब तालियां बटोरी। मौके पर सीओ अजय कुमार, अमरनाथ चौधरी, सीडीपीओ डॉ. सुनीता कुमारी, प्रदेश सचिव धीरेंद्र कुमार सिंह, मुखिया प्रेम शंकर सिंह, रतन शंकर भारद्वाज, कैलाश पासवान, चतुरानंद गिरि, सतीश गिरि माैजूद थे। सम्मेलन के दौरान दर्जनों कवियों को जिला प्रशासन ने मिथिला परम्परा के अनुसार पाग,चादर, मोमेंटो, माला व प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। इनमें कवि विनोद समीर, डॉ. सुधीर प्रसाद सिंह सुधीर, चांद मुसाफिर, डॉ. नरेश कुमार विकल, सेफली झा, वैष्णवी चौधरी, मिथिलेश कुमारी आदि थीं।

विद्यापति राजकीय महोत्सव के कवि सम्मेलन में मंचस्थ कवि।

प्रशासन ने बंद कराया डीजे

समारोह के दूसरे दिन देर शाम गायिका देवी के गीतों पर लोग झूम रहे थे। इसी बीच प्रशासन द्वारा साउंड को बंद करने पर देवी ने प्रस्तुति देने से मना कर दिया। उन्होंने अपने गीतों के कार्यक्रम के बीच अचानक साउंड को बंद करने पर प्रसाशन को दोषी ठहराते हुए अंग्रेजी और हिंदी में विरोध जताई और अपने को समारोह स्थल पर असम्मानित महसूस की। इसके लिए प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए दोषी ठहराया और प्रशासन को लताड़ते हुए अपने कार्यक्रम को स्थगित कर मंच से चली गयी।

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