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रोसड़ा में तीन दिवसीय उर्स मेला में मजार पर माथा टेकने वालों व चादरपोशी करने वालों की उमड़ी भीड़

एक वर्ष पहले
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हिन्दु-मुस्लिम सौहार्द का प्रतीक हजरत खासदुल्ले रहमतुल्लाह अलैहे का सालाना तीन दिवसीय उर्स मेला रोसड़ा के खैरा दरगाह में गुरुवार से प्रारंभ हुआ । यहां उनके मजार पर माथा टेकने वालों और चादरपोशी को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। बिहार के विभिन्न जिलों के अलावे झारखंड , पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों से श्रद्धालुओं का चादरपोशी को लेकर आना- जाना लगा है। कमरी माह के 14 से 16 रजब तीन दिनों तक चलने वाली इस उर्स मेला में हजरत खासदुल्ले रहमतुल्लाह अलैहे के बारे में बताया जाता है कि वे हजरत ख्वाजा गरीब नवाज अजमेरी रहमतुल्लाह अलैहे के खादिम थे। वे आज से तकरीबन 650 वर्ष पूर्व रोसड़ा के खैरा अवस्थित वीरान जंगल में आकर लेटे थे। तब से यह उर्स मेला की परंपरा कायम है। लोगों में ऐसी धारणा है कि जो कोई व्यक्ति श्रद्धा से यहां कुछ भी मन्नते मांगते है उनकी मनोकामनाएं पूरी होती है। क्षेत्र का यह स्थान रोसड़ा खैरा दरगाह के नाम से प्रसिद्ध है । रहमतुल्लाह अल्लेह की दरगाह स्थित मजार पर प्रति वर्ष माथा टेकने वाले व चादरपोशी करने वाले श्रद्धालु नर- नारियों का तांता लगा रहा। मन्नतें पूरी करने वालों ने पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ चढ़ावा एवं चादरपोशी की। हजरत खास दुल्ले रहमतुल्लाह अल्लहे अजमेर शरीफ के हजरत ख्वाजा मोहउद्दीन चिश्ती गरीब नवाज के खादिम थे। आइने अकबरी में इसका उल्लेख किया गया है। तकरीबन 650 वर्ष पूर्व मजहबी प्रचार - प्रसार के क्रम में बाबा खास यहां पधारे थे। हजरत खास दुल्ले रहमतुल्लाह अल्लहे अपनी इल्म शिफली के बदौलत जाहिर में मरकर फिर जिंदा हो गए थे। मजहबी प्रचार के दौरान हजरत खास ने जिस समाधि पर अपना पड़ाव लिया था उन सभी स्थलों पर इनके मजार अवस्थित है।

मनोरंजन का भी साधन


मेला स्थल पर बच्चों के मनोरंजन को लेकर लगाए गए हाइड्रोलिक झूले, कार की सवारी, जंपिंग झूला व रनिंग हाेर्स झूला आकर्षक का केन्द्र बना है। वहीं बच्चों के लिए मेला में बिक रहे गुब्बारा, खिलौने की दुकानों के अलावा नमकीन छोला-चाट आदि की दुकानों पर बच्चे अपने परिजनों के साथ जमकर मेला का लुत्फ लिया। मेला को लेकर आयोजन समिति के सदस्यों व प्रशासन द्वारा तैनात पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस बल व महिला पुलिस प्रतिनियुक्त किए गए हैं।

मेला में झूले का आनंद लेते बच्चे व अन्य।
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