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10वीं व 12वीं बोर्ड के छात्रों का मैथ व लैंग्वेज में भी होगा आंतरिक मूल्यांकन

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 05:11 AM IST

Sasaram News - सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड के बच्चों का अब सिर्फ साइंस ही नहीं बल्कि मैथ्स और लैंग्वेज जैसे विषयों में भी आंतरिक...

Sasaram News - 10th and 12th board students will also have internal evaluation in math and language
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सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड के बच्चों का अब सिर्फ साइंस ही नहीं बल्कि मैथ्स और लैंग्वेज जैसे विषयों में भी आंतरिक मूल्यांकन होगा। स्कूल स्तर से लेकर बोर्ड स्तर की परीक्षाओं में कक्षा 9वीं से 12वीं के लिए इंटरनल असेसमेंट से लेकर मूल्यांकन की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। सत्र 19-20 से इसी के तहत स्कूलों में पढ़ाई होगी। बोर्ड के एकेडमिक डायरेक्टर डॉ. जोसेफ ने इस संबंध में रोहतास जिले के सभी स्कूल प्रबंधन को निर्देश जारी किया है। निदेशक द्वारा दिए गए निर्देश में कहा गया है कि 9वीं से 12वीं तक के बच्चों की अब तक सिर्फ साइंस विषयों में ही इंटरनल एसेसमेंट की सुविधा थी। पिछले कुछ सालों में विभिन्न विषयों में बच्चों के परफॉरमेंस रिकार्ड को देखते हुए बोर्ड ने इस बदलाव का निर्णय लिया है। ओवरऑल मैथ्स में 52 फीसदी, लैंग्वेज में 58 फीसदी अंक लाने वाले बच्चों के रिकार्ड में सुधार को लेकर इंटरनल असेसमेंट में यह बदलाव किया गया है। यह बदलाव अप्रैल 2019 से लागू होगा। स्कूल प्रबंधकों ने बताया कि इस प्रकिया के लागू होने से शिक्षा का स्तर और बेहतर होगा। इससे छात्रों की तैयारी और मजबूत होगी। आंतरिक मूल्यांकन के माध्यम से पढ़ाई की कमजोरी दूर होगी।

अबतक सिर्फ साइंस विषयों में ही उपलब्ध थी आंतरिक मूल्यांकन की सुविधा

स्कूल में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स

11वीं-12वीं में बड़े स्तर पर हुआ है बदलाव

कक्षा 9वीं-10वीं में 10 अंक वाले पेन पेपर टेस्ट को अब पांच अंक का कर दिया गया है। नोटबुक पर मिलने वाले पांच अंक को सेल्फ एसेसमेंट से जोड़ा गया है।11वीं और 12वीं में बड़े स्तर पर बदलाव करते हुए इसमें 100 अंक के मैथ्स को 80 अंक का किया गया है। इसमें 20 अंक का इंटरनल एसेसमेंट होगा। यही स्थिति लैंग्वेज, पॉलिटिकल साइंस और लीगल स्टडीज विषय में भी रहेगी। बोर्ड परीक्षा में 70 से कम अंक वाले थ्योरी पेपर में परीक्षार्थी को अब दो घंटे का समय ही मिलेगा। सीबीएसई संगठन के पीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि इन विषयों में प्रैक्टिकल का अंक देने से बच्चों का मार्क्स बढ़ेगा।

सिटी रिपोर्टर | सासाराम

सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड के बच्चों का अब सिर्फ साइंस ही नहीं बल्कि मैथ्स और लैंग्वेज जैसे विषयों में भी आंतरिक मूल्यांकन होगा। स्कूल स्तर से लेकर बोर्ड स्तर की परीक्षाओं में कक्षा 9वीं से 12वीं के लिए इंटरनल असेसमेंट से लेकर मूल्यांकन की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। सत्र 19-20 से इसी के तहत स्कूलों में पढ़ाई होगी। बोर्ड के एकेडमिक डायरेक्टर डॉ. जोसेफ ने इस संबंध में रोहतास जिले के सभी स्कूल प्रबंधन को निर्देश जारी किया है। निदेशक द्वारा दिए गए निर्देश में कहा गया है कि 9वीं से 12वीं तक के बच्चों की अब तक सिर्फ साइंस विषयों में ही इंटरनल एसेसमेंट की सुविधा थी। पिछले कुछ सालों में विभिन्न विषयों में बच्चों के परफॉरमेंस रिकार्ड को देखते हुए बोर्ड ने इस बदलाव का निर्णय लिया है। ओवरऑल मैथ्स में 52 फीसदी, लैंग्वेज में 58 फीसदी अंक लाने वाले बच्चों के रिकार्ड में सुधार को लेकर इंटरनल असेसमेंट में यह बदलाव किया गया है। यह बदलाव अप्रैल 2019 से लागू होगा। स्कूल प्रबंधकों ने बताया कि इस प्रकिया के लागू होने से शिक्षा का स्तर और बेहतर होगा। इससे छात्रों की तैयारी और मजबूत होगी। आंतरिक मूल्यांकन के माध्यम से पढ़ाई की कमजोरी दूर होगी।

2020 से दो स्तरों पर होगी 10वीं की गणित की परीक्षा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 10वीं के छात्रों में गणित की परीक्षा का तनाव कम करने के लिए अहम बदलाव करने जा रहा है। सीबीएसई 2020 से 10वीं की गणित की परीक्षाएं दो स्तरों पर कराएगा। सीबीएसई के सर्कुलर के मुताबिक, ये दो स्तर मैथमेटिक्स स्टैंडर्ड और मैथमेटिक्स बेसिक होंगे। स्टैंडर्ड का पाठ्यक्रम मौजूदा स्तर का ही होगा, जबकि बेसिक को आसान बनाया जाएगा। सीबीएसई के मुताबिक, यह सभी को पता है कि सबसे कठिन विषय ‘गणित’ की परीक्षा के पहले या उसके दौरान छात्रों को सबसे अधिक तनाव रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने दो स्तरों पर परीक्षा कराने का फैसला किया है, मार्च 2020 सत्र के बाद लागू हो जाएगा।

पाठ्यक्रम, क्लासेस, आंतरिक परीक्षाएं होंगी एक जैसी

दोनों स्तरों के पाठ्यक्रम, क्लासरूम, आंतरिक परीक्षाएं एक जैसी होंगी, इससे छात्रों को पूरे वर्ष सभी टॉपिक पढ़ने का मौका मिल सकेगा। इसके बाद वे अपनी क्षमताओं के आधार पर फैसला ले सकेंगे कि उन्हें कौन सी परीक्षा में शामिल होना है। हालांकि ये स्तर 9वीं की परीक्षाओं में लागू नहीं होंगे।

परीक्षा फॉर्म भरते वक्त करना होगा स्तर का चुनाव

स्टैंडर्ड लेवल उन छात्रों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो आगे की पढ़ाई गणित विषय के साथ करना चाहते हैं। वहीं, बेसिक स्तर उनके लिए होगा, जो गणित में उच्च शिक्षा हासिल नहीं करना चाहते। छात्र परीक्षा फॉर्म भरते वक्त स्टैंडर्ड या बेसिक मैथ्स में एक का विकल्प चुन सकते हैं।

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