पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

विवाह के लिए 40 शुभ मुर्हूत, 13 लग्न तिथि में मृत्युबाण का प्रकोप

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

हिंदू धर्म में कुछ भी शुभ काम करने से पहले मुहूर्त जरूर देखा जाता है। दरअसल, मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले पंचांग जरूर देखना चाहिए। पंचांग एक प्राचीन हिंदू कैलेंडर को कहा जाता है। पंचांग पांच अंग शब्द से बना है। हम इसे पंचांग इसलिए कहते हैं क्योंकि यह पांच प्रमुख अंगों से बना है। वो पांच प्रमुख अंग हैं- नक्षत्र, तिथि, योग, करण और वार। कौन सा दिन कितना शुभ है और कितना अशुभ, ये इन्हीं पांच अंगो के माध्यम से जाना जाता है। लेकिन, इस बार पंचांग में शादियों का मुहूर्त गलत प्रकाशित हो जाने के कारण शुभ लग्न को लेकर संशय बना हुआ है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो पंचांग में कुछ ऐसे तिथि को भी शुभ मुहूर्त बता दिया गया है जो इस वर्ष यानी संवत 2077 में विवाह की तिथियां अशुभ मृत्युबाण के दिन भी पड़ रही हैं। सामान्य ज्योतिषी उस पंचांग पर आंख मूंदकर विश्वास कर लेते हैं और अपने यजमानों को विवाह की तिथियां और मुहूर्त बता देते हैं। ऋषिकेश पंचांग में तिथियों को विवाह लग्न के लिए उत्तम बताया गया है जिनमें मृत्युबाण दोष प्रभावी है। ज्योतिषी आचार्य पंडित राम अवधेश चतुर्वेदी ने बताया कि इसकी शिकायत उक्त पंचांग के प्रकाशक से की गई है।

क्या हैमृत्युबाण

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मृत्य वान एक महान घातक दोष है जो कि विवाह में सख्त मन है। इस में विवाह करने पर वर कन्या का अमंगल बताया गया है।

मृत्यु बाण में कभी भी शादी नहीं करनी चाहिए

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पंचांग में अधिकांश तिथियां अशुभ मृत्युबाण मुहुर्त में बता दी गई हैं। अनुसार कई ऐसी तिथियां हैं जिन पर विवाह मुहूर्त रखे गए हैं और उन तिथियों में मृत्यु बाण है। इन तिथियों में शादी-विवाह करना सख्त मना है। अन्य पंचांगों में सिद्धांतानुसार समय सारणी में 10 से 20 मिनट का अंतराल हो सकता है, किंतु मृत्यु बाण में कभी भी शादी नहीं करनी चाहिए। पंचाग में 13 ऐसे मुर्हूत तिथि निर्धारित की गई है जिसमें ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मृत्युबाण है लेकिन मृत्युवाण का जिक्र प्रकाशक द्वारा नहीं किया गया है।

कब होता है मृत्युबाण

{जब सूर्य का ,1,10,19,28 अंश बीत जतें है तो मृत्यु वाण प्रारम्भ होता है। जो कि अगले पूरे 2, 11,20,19 अंश तक रहता है। इसमे विवाह करना वर कन्या के लिए अशुभ माना गया है।

विवाह के इन तिथियों में मृत्युबाण का रहेगा साया

{14 अप्रैल 2020 मंगलवार को रात्रि 11:26 से अगले दिन बुधवार को रात्रि 12:01 तक।

{23 अप्रैल 2020 गुरुवार को भोर 4:45 से 24 अप्रैल 2020 शुक्रवार को भोर 5:26 तक।

{3 मई 2020 रविवार को दिन में 11:19 से दिनांक 4 मई 2020 सोमवार को दिन में 12:07 तक।

{12 मई 2020 मंगलवार को सायं 7:06 से दिनांक 13 मार्च 2020 बुधवार को रात्रि 8:02 तक।

{15 मार्च 2020 शुक्रवार को रात्रि 9:56 से 16 मई 2020 शनिवार को रात्रि 10:55 तक।

{25 मई 2020 सोमवार को प्रातः 7:08 से 26 मई 2020 मंगलवार को प्रातः 8:13 तक।

{3 जून 2020 बुधवार को सायं 5:14 से 4 जून 2020 गुरुवार को सायं 6:20 तक।

{12 जून 2020 शुक्रवार भोर 4:05 बजे से दिनांक 13 जून 2020 शनिवार को भोर 5:21 तक।

{16 मई जून 2020 मंगलवार को प्रातः 7:51 से 17 जून 2020 बुधवार को प्रातः 9:07 तक।

{25 जून 2020 गुरुवार को सायं 7:27 से दिनांक 26 जून 2020 शुक्रवार को रात्रि 8:46 तक।

{26 नवंबर 2020 गुरुवार को सायं 5:04 से दिनांक 27 नवंबर 2020 शुक्रवार को सायं 4:42 तक।

{5 दिसंबर 2020 शनिवार को दिन 1:31 से दिनांक 6 दिसंबर 2020 रविवार को दिन में 1:05 बजे तक।

{14 दिसंबर 2020 सोमवार को प्रातः 7:25 से दिनांक 15 दिसंबर 2020 मंगलवार को प्रातः 6:54 तक।

मृत्यु बाण में शादी संपन्न होने से वैवाहिक जीवन रहता है कष्टमय
खबरें और भी हैं...