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बच्चों को अच्छे संस्कार देकर धर्म-संस्कृति से जोड़ें

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 05:06 AM IST

Sasaram News - आज का मनुष्य भौतिकवादी प्रवृत्ति व वासना के वशीभूत होकर कामनाओं को बढ़ा रहा है, जो उनके दुखों का कारण बनता रहा है।...

Sasaram News - add children to religions by giving good rites
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आज का मनुष्य भौतिकवादी प्रवृत्ति व वासना के वशीभूत होकर कामनाओं को बढ़ा रहा है, जो उनके दुखों का कारण बनता रहा है। अगर कोई जीव इन विकारों और वासना पर नियंत्रण कर लेता है, तो परम पिता परमात्मा भी उसकी मदद करते हैं। उक्त बातें स्वामी दिव्य चेतनानंदजी ने फजलगंज स्थित गीता घाट आश्रम परिसर में आयोजित 108 कुंडीय मां ताराचंडी महायज्ञ में उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि सत्संग सुनने का तो लाभ तभी है जब हम अपने जीवन को सत्संग की वाणी के अनुसार जीने लगे। जिस दिन भगवान का सत्संग होता है उसे श्रेष्ठ दिवस कहा जाता है। सत्संग से स्वभाव सुधरता है। कुसंग बिगड़ता है। जीवन को बनाने में समय लगता है, बिगाड़ने में नहीं। स्वामीजी ने कहा कि जिन घरों में मर्यादा, आस्था, प्यार, धर्म व कर्तव्यों की कमी है, वहां पर गृह क्लेश होना सुनिश्चित समझें। इसलिए माता की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को अच्छे संस्कार, विद्या व धर्म संस्कृति से जोड़ें। स्वामी जी से आर्शीवाद लेने के लिए सासाराम विधायक अशोक कुमार एवं पूर्व विधायक राजेश्वर राज आश्रम में पहुंचे।

प्रवचन करते स्वामी चेतनानंद।

लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मन का एकाग्र होना जरूरी

स्वामीजी ने कहा कि आत्मा अजर अमर है, जिसे कोई तत्व भेद नहीं सकता, कोई मार नहीं सकता। क्योंकि आत्मा स्वयं परमात्मा का स्वरूप है। आत्मा नया घर बदलती है, परंतु जैसे ही उसकी अवधि समाप्त हो जाती है वह दूसरे शरीर को धारण कर लेती है। क्योंकि परमात्मा के अंश से ही आत्मा का जन्म हुआ है।

कामनाओं की पूर्ति के 108 कुंडों में डाली गई आहुति

भौतिक एवं आध्यात्मिक कल्याण के निमित्त सैकड़ों दंपतियों ने हवन कुंड में आहुति प्रदान की। वैदिक मंत्रोच्चारण से वातावरण भक्मिमय हो गया। स्वामीजी ने भक्तों काे बताया कि हवन यज्ञ के माध्यम से जीवन में उत्पन्न हो रहे बाधाओं को समाप्त किया जा सकता है। इस दौरान प्रकांड विद्वानों द्वारा महाविद्या एवं दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ आहुति प्रदान की गई।

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