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कम लागत और वैज्ञानिक तरीके से खेती से किसान बढ़ा सकते हैं आय
जमुहार स्थित गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के नारायण कृषि विज्ञान संस्थान में इफको किसान मित्र प्रशिक्षण शिविर का आयोजन शुक्रवार को किया गया। यहाँ वक्ताओं ने किसानों को बताया कि वे अपनी आमदनी कैसे दुगनी कर सकते हैं। बताया गया कि कृषि क्षेत्र में आय को दुगुनी करने के लिए परंपरागत रूप से खेती करने के तरीके पर लागत खर्च कम करना होगा। वैज्ञानिक तरीके से नवीनतम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना होगा। ऐसा कर के ही किसान अपनी आय दुगनी कर सकते हैं। यह भी बताया गया कि अनावश्यक खाद एवं रासायनिक दवाओं का प्रयोग करके जहां किसान अपना क्षणिक लाभ लेने में लगे हैं, वहीं किसानों के हक में इसके दूरगामी परिणाम अच्छे नहीं होने वाले हैं। कृषि वैज्ञानिकों एवं अतिथियों ने कहा कि वर्तमान तरीकों से किए जा रहे कृषि कार्य से जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण होती जा रही है, जिसके कारण आने वाले समय में राष्ट्र को खाद्यान्न के मामले में कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इफको किसान प्रशिक्षण शिविर में कृषि वैज्ञानिकों ने जमीन में जिंक, बोरोन एवं सल्फर के समुचित उपयोग की जानकारी देते हुए किसानों को बताया कि इसका प्रयोग नहीं करने से अन्न तो पैदा हो रहे हैं लेकिन उनमें पोषक तत्वों का घोर अभाव हो रहा है।
इन्होंने ने दी किसानों को जानकारी
इफको किसान मित्र प्रशिक्षण शिविर में गोपाल नारायण सिंह, विश्व विद्यालय के सचिव गोविंद नारायण सिंह, इफको राज्य विपणन निदेशक सोमेश्वर सिंह, कृषि सेवा बिहार के प्रबंधक सुरुचि कुमारी, नारायण कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आरपी सिंह, रोहतास जिला के प्रबंधक डॉ.रमेश कुमार, कैमूर जिला के प्रबंधक नवीन कुमार, नारायण कृषि विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ शिक्षक एवं कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर यूपी सिंह ने वहां उपस्थित रोहतास जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों किसानों को कृषि की नई तकनीक के बारे में जानकारियां प्रदान की।
अनुदानमुक्त हो सकती हैं रासायनिक खाद
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को यह भी बताया कि आने वाले समय में सरकार की नीतियों के अनुसार रसायनिक खादों पर दिए जाने वाले अनुदान समाप्त हो सकते हैं जिससे खाद की कीमतों में काफी वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। इससे निपटने के लिए इफको ने नैनो फर्टिलाइजर अनुसंधान केंद्र के माध्यम से जैविक बैक्टीरिया युक्त खाद का निर्माण किया है, जो आने वाले समय में किसानों को कम कीमत में अधिक मुनाफा देकर उन्हें समृद्ध बनाने में सहायक सिद्ध होगा। इफको द्वारा कृषि कार्य में प्रयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के रासायनिक दवाइयों एवं रासायनिक खादों के नमूने की कीट किसानों को निशुल्क दिया गया तथा दवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
जा रही है, जिसके कारण आने वाले समय में राष्ट्र को खाद्यान्न के मामले में कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इफको किसान प्रशिक्षण शिविर में कृषि वैज्ञानिकों ने जमीन में जिंक, बोरोन एवं सल्फर के समुचित उपयोग की जानकारी देते हुए किसानों को बताया कि इसका प्रयोग नहीं करने से अन्न तो पैदा हो रहे हैं लेकिन उनमें पोषक तत्वों का घोर अभाव हो रहा है।
किसानों को किट देते अधिकारी।
विशेषज्ञों ने बताया- जमीन की उर्वरा शक्ति होती जा रही है क्षीण