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बारिश से किसानों की फसल बर्बाद की सता रही चिंता

एक वर्ष पहले
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गत दस दिनों से जारी बेमौसम बरसात ने प्रखण्ड के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी। खेतों में खड़े सरसो, तीसी, मसूर, चना, खेसारी फसल की उपज तो अब भगवान भरोसे है ही, गेहूं की उपज के भी 50 फीसदी तक प्रभावित हो गयी है। चैत के महीने में बरसात जैसी बारिश ने किसानों की बची उम्मीद को भी पस्त कर दिया। हुरका के किसान सुरेश सिंह ने बताया कि 50 वर्षों के जीवन मे इस तरह की बेमौसम बारिश हमने नहीं देखी थी। इस बार धान की कटाई व रबी फसल की बुआई के बाद से ही मौसम में उतार-चढ़ाव देखा गया। खेत व खलिहान की फसल घर पहुंचेगी या नहीं कहना मुश्किल है। वैसे तो रबी फसल रब (भगवान) के हाथ में होती है। खेत व खलिहान से फसल अगर घर पहुंच गयी तो ठीक, अन्यथा भगवान की जैसी मर्जी। उन्होंने कहा कि बीच में भी कई बार बारिश हुई। लेकिन, वह फायदा साबित हुई थी। मौसम हमेशा दो-चार दिन पर खराब हो जा रहा है। पौधों की गर्मी से फसल के दाने को काला होने की आशंका बढ़ गई है। अगर दाने काले हो गए तो उसके खरीदार बाजार में नहीं मिलेगें। इससे उन्हें बहुत आर्थिक क्षति होगी। सब्जी उत्पादक किसानों को भी इस बारिश से नुकसान पहुंचा है।खेतों से गोभी काटने के बाद अधिकांश किसान लौकी, करैला, भींडी आदि की फसल लगा चुके हैं।

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