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समय से गेहूं की खरीदी शुरू कराए सरकार: किसान महासंघ
राज्य के सहकारिता मंत्री द्वारा धान अधिप्राप्ति के लिए एक माह का समय सीमा बढ़ाने की घोषणा का किसान महासंघ ने विरोध किया है। महासंघ के जिला सचिव राहुल पटेल ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है कि राज्य सरकार को गेहूं खरीदारी का काम एक अप्रैल से शुरू करा देना किसानों के लिए हितकर है। जनवरी माह के अंत तक जिले के किसान अपना धान बेच कर निवृत्त हो जाते है। लेकिन इस वर्ष बारिश के कारण फरवरी महा के अंत तक जिले के किसानों ने अपना धान बेच लिया है। ऐसे में धान अधिप्राप्ति के लिए अतिरिक्त समय बढ़ाने का मतलब कागजी घोड़ा दौड़ाना है। अब किसानों के पास धान नहीं रह गया है। इस लिए अधिप्राप्ति लक्ष्य को पूरा करने के लिए पैक्स व व्यापार मंडल बाजर का सहारा ले रहे है। बाजार से चावल खरीदकर सरकारी दर पर सीएमआर जमा करने का खेल अब शुरू हो गया है। कहा है कि धान का कटोरा कहे जाने वाले रोहतास जिले में बेहतर उत्पादन के बाद भी किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे है। ज्यादातर किसान मजबूरी में अपना धान बिचौलियों को बेच देते है। कुछ किसानों सरकार की घुमऊ प्रक्रिया के तहत धान अधिप्राप्ति में शामिल हुए लेकिन उन्हें भी सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य नहीं मिल पाता। पैक्स अध्यक्ष धान लेने के पूर्व ही मोल-भाव कर लेते है। विभागीय खर्च का हवाला देते हुए किसी किसान को 1600 रुपये प्रति क्विंटल तो किसी को 1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से राशि का भुगतान करते है। चूंकि पैसा सीधे किसानों के खाता में जाता है इस लिए पैक्स द्वारा किसानों से पूर्व में ही चेक ले लिया जाता है। ऐसी स्थिति में सुधार नहीं हुआ व किसानों की हकमारी पर अंकुश नहीं लगाया गया तो किसान महासभा के कार्यकर्ता आंदोलन करेंगे।