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आईआईटियन राकेश ने नौकरी छोड़ शुरू किया मछलीपालन, कमा रहे लाखों

विंध्याचल उपाध्याय | संझौली संझौली निवासी राकेश कुमार वर्मा आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 04:57 AM IST
Snjuli - iitian rakesh started his job as a fishery earning millions
विंध्याचल उपाध्याय | संझौली

संझौली निवासी राकेश कुमार वर्मा आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग करने के बाद प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में एमबीए किया। बेंगलुरु के आईटी इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी में इंजीनियर की नौकरी करने लगे। 15 लाख का वार्षिक पैकेज व बेहतर कैरियर से जिंदगी खुशहाल था, लेकिन गांव में कुछ अलग करने की इच्छा व ग्रामीण लड़कों को रोजगार के प्रति जागरूक कर उन्हें बेहतर भविष्य दिलाने के लिए नौकरी छोड़ने पर विवश कर दिया। पारिवारिक विरोध के बाद भी मछलीपालन से व्यवसाय शुरू किया। किसान के रूप में खुद को ढाल लेना प्रारंभ में तो बहुत ही कठिन रहा, लेकिन आज युवाओं के प्रेरणास्रोत बन उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं राकेश कुमार वर्मा। उच्च शिक्षा प्राप्त व मोटी सैलरी को छोड़ राकेश वर्मा क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के लिए एक उदाहरण बन गए हैं। रोजगार नहीं मिलने की रोना रो रहे युवा आज इनसे सीख लेकर मछलीपालन व मुर्गीपालन कर रहे हैं। राकेश कुमार वर्मा ने बताया पिता अयोध्या प्रसाद सिंचाई विभाग में कार्यपालक अभियंता थे। उनका जुड़ाव खेती से था। नौकरी में रहते हुए भी गांव में खेती करते थे। उन्हीं से मिली प्रेरणा के बाद इस व्यवसाय से जुड़ने का मन बनाया अाैर सफल हुआ।

तालाब के पास खड़े किसान राकेश कुमार वर्मा

विंध्याचल उपाध्याय | संझौली

संझौली निवासी राकेश कुमार वर्मा आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग करने के बाद प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में एमबीए किया। बेंगलुरु के आईटी इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी में इंजीनियर की नौकरी करने लगे। 15 लाख का वार्षिक पैकेज व बेहतर कैरियर से जिंदगी खुशहाल था, लेकिन गांव में कुछ अलग करने की इच्छा व ग्रामीण लड़कों को रोजगार के प्रति जागरूक कर उन्हें बेहतर भविष्य दिलाने के लिए नौकरी छोड़ने पर विवश कर दिया। पारिवारिक विरोध के बाद भी मछलीपालन से व्यवसाय शुरू किया। किसान के रूप में खुद को ढाल लेना प्रारंभ में तो बहुत ही कठिन रहा, लेकिन आज युवाओं के प्रेरणास्रोत बन उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं राकेश कुमार वर्मा। उच्च शिक्षा प्राप्त व मोटी सैलरी को छोड़ राकेश वर्मा क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के लिए एक उदाहरण बन गए हैं। रोजगार नहीं मिलने की रोना रो रहे युवा आज इनसे सीख लेकर मछलीपालन व मुर्गीपालन कर रहे हैं। राकेश कुमार वर्मा ने बताया पिता अयोध्या प्रसाद सिंचाई विभाग में कार्यपालक अभियंता थे। उनका जुड़ाव खेती से था। नौकरी में रहते हुए भी गांव में खेती करते थे। उन्हीं से मिली प्रेरणा के बाद इस व्यवसाय से जुड़ने का मन बनाया अाैर सफल हुआ।

2002 में मिली थी पहली नौकरी

गांव में खुशहाली की ललक दिल्ली से आईआईटी करने के बाद राकेश को अभियंता के रूप में आईटी, दिल्ली में 2002 में पहली नौकरी मिली। 2010 में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से एनडीए करने के बाद बेंगलुरु सिटी से जुड़ गए। 2014 में नौकरी छोड़ दी। वह अपने गांव संझौली चले आए व मछली व मुर्गीपालन का विधिवत प्रशिक्षण लिया। यहां आने के बाद 3 एकड़ में 7 तालाबों की खुदाई कराई और मछलीपालन के व्यवसाय से जुड़ गए। शुरुआती दौर में तो काफी परेशानियां आईं। क्षेत्र के लोगों ने भी मजाक भी उड़ाया, पर आज वेेलोग ही प्रशंसा कर रहे हैं।

सुनियोजित रूपरेखा तैयार कर काम करना शुरू किया

धीरे-धीरे स्थिति सुधरती गई और राकेश सालाना 40 से 50 लाख रुपए कमाने लगे। युवाओं को प्रेरित करने की कोशिश से प्रभावित क्षेत्र के युवाओं सेे मिलना-जुलना शुरू हुआ। यही से राकेश युवाओं को रोजगार के प्रति प्रेरित करने की जुगाड़ में लग गए, लेकिन आर्थिक रूप से पिछड़े युवाओं की सोच को जागरुक करना आसान नहीं था। उन्होंने हार नहीं मानी व सुनियोजित रूपरेखा तैयार कर उस पर काम करने लगे। गांव में आर्थिक रूप से कमजोर लड़कों के समूह के माध्यम से मछलीपालन व मुर्गीपालन को ले प्रशिक्षित करने लगे। मुर्गीपालन के लिए निजी कंपनियों से संपर्क कराया। मछलीपालन के लिए तालाब खुदाई करने के लिए आर्थिक मदद भी दिलाई।

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