बिहार झारखण्ड के सीमा से लगे सोन डीला पर तेजी से फैल रहा है अवैध शराब का धंधा

Sasaram News - पूरे राज्य में पुलिस द्वारा चलाये जा रहे शराब विरोधी अभियान के बाद भी रोहतास व नौहट्टा थाना अन्तर्गत तुम्बा,...

Feb 15, 2020, 09:05 AM IST

पूरे राज्य में पुलिस द्वारा चलाये जा रहे शराब विरोधी अभियान के बाद भी रोहतास व नौहट्टा थाना अन्तर्गत तुम्बा, समहुता, कसिगवा, रसूलपुर, बकनौरा, दारानगर, सिंहपुर, बेलौंजा गांव स्थित सोन नदी के डीला पर इन दिनों अवैध महुआ शराब बनाने व बेचने का धंधा नही रुक पा रहा है । बिहार झारखण्ड से सटे सोन नदी के मध्य डीला पर शराब निर्माण करने वाले लोग सोन नदी की भाौगोलीक बनावट का भरपूर फायदा उठा रहे है । सोन डीला पर बने शराब को बिहार और झारखण्ड दोनों राज्य के आसपास के गांव में भी बिक्री के लिए भेजा जा रहा है । सोन नदी के डीला पर इन दिनों मुज का पूरा जंगल लगा हुआ है ।मुज के घने जंगल के कारण दूर दूर तक कुछ दिखाई नही पड़ता है जिसके कारण शराब के धंधा करने वाले माफिया बेरोक टोक शराब बनाते हैं, और आसपास के गांव में महंगे कीमत पर बेचते है । लोग बताते हैं कि राज्य में शराब बंदी से पहले जो महुआ के शराब पहले 40 -50 रुपया बोतल मिलता था वह शराब अब शराब बंदी के बाद 100 रुपया बोतल बिक रहा है ।

आसानी से मिल जाता है महुआ

इस धंधा से जुड़े शराब कारोबारियों को आसानी से और सस्ते दाम पर कैमूर पहाड़ी क्षेत्र के गांवों से शराब बनाने के लिए महुआ मिल जाता है ।वन विभाग द्वारा पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में महुआ के विक्री प्रतिबंधित है जिसके कारण पहाड़ी क्षेत्र के गांवों के किसानों द्वारा अपना खेत में चुन कर रखा गया महुआ भी नही बिक रहा है । महुआ की बिक्री नही होने के कारण किसान परेशान है । वही शराब बनाने वाले व्यवसायी आसानी से औने पौने दाम पर किसानों और पहाड़ी गांव के लोगो से महुआ खरीद कर शराब बना कर बेच रहे है । बताया जाता है कि सड़क विहीन सोन नदी तक पहुँचने के लिए पुलिस को मुख्य सड़क मार्ग पर ही गाड़ी खड़ा कर पगडंडी रास्ता पकड़ कर पैदल सोन डीला पर जाना पड़ता है। पैदल जब तक पुलिस सोन डीला पर पहुंचती है तब तक शराब बनाने वाले लोगो को मोबाइल फोन से पुलिस की गतिविधि की जानकारी मिल जाया करती है और धंधा से जुड़े लोग शराब को मुंज के झाड़ी में छुपा देते है या फिर सोन नदी के बालू में आसानी से तैयार समान शराब बनाने वाली देशी मशीन एवं अन्य उपकरण को बालू में ही गाड़ देते है । पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ता है । राज्य में पूरी तरह शराब बंदी भले ही सरकारी कागज में लागू है लेकिन इस इलाका में पैसा अधिक लगेगा, लेकिन शराब आसानी से किसी गाँव मे मिल जाएगा । उत्पाद विभाग द्वारा इस धंधा को रोकने के लिए कभी प्रयास नही किया जा रहा है । ऐसा प्रतीत होता है कि शराब निर्माताओं को उत्पाद विभाग का कही न कही संरक्षण प्राप्त है ।यही कारण है कि इस अवैध धंधा को रोकने के लिए उत्पाद विभाग द्वारा कभी कोई कार्रवाई नही की जाती।

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