कैमूर पहाड़ी के पशुपालक कर रहे पलायन

Sasaram News - प्रखंड क्षेत्र के कैमूर पहाड़ी के ऊपर बसे गांव के लोगों का बढ़ती तपिश और गिरते जलस्तर से उत्पन्न पानी की गंभीर संकट...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:55 AM IST
Rohtas News - kaimur hill farming escapes
प्रखंड क्षेत्र के कैमूर पहाड़ी के ऊपर बसे गांव के लोगों का बढ़ती तपिश और गिरते जलस्तर से उत्पन्न पानी की गंभीर संकट से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। इन दिनों नदियां, तालाब ,आहार-पोखर कुएं भी सुख गए हैं। जिससे पहाड़ी पर स्थित गांवाें में पानी की गंभीर समस्या से मानव, पशु-पक्षी भी परेशान हैं। वहीं स्थानीय लोगों को जीवन यापन करने के लिए प्रतिदिन पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। यही कारण है कि पहाड़ी पर बसे गांवों से पशुपालक चारा एवं पानी के अभाव में अपने अपने मवेशियों को लेकर पहाड़ी पर बसे गांव से कैमूर पहाड़ी के नीचे मैदानी इलाकों में पलायन कर चुके हैं। पहाड़ी पर बसे पशुपालकों की मानें तो गर्मी शुरु होते ही वे लोग अपने-अपने मवेशियों को लेकर पहाड़ी के नीचे बसे गांव में रिश्तेदारों के यहां तो कुछ अपने या भाड़े किराये के मकान में रहकर अपने पशुओं की जीवन बचाने को विवश हैं। ये लोग ज्यादातर सोन तटीय मैदानी भागों में जहां गर्मी के मौसम में भी चारा एवं पानी उपलब्ध हो जाता है। इसके लिए उन्हें भटकना पड़ता है।

पानी के लिए सोन नदी पहुंचे पहाड़ी पशु।

सिटी रिपोर्टर|रोहतास

प्रखंड क्षेत्र के कैमूर पहाड़ी के ऊपर बसे गांव के लोगों का बढ़ती तपिश और गिरते जलस्तर से उत्पन्न पानी की गंभीर संकट से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। इन दिनों नदियां, तालाब ,आहार-पोखर कुएं भी सुख गए हैं। जिससे पहाड़ी पर स्थित गांवाें में पानी की गंभीर समस्या से मानव, पशु-पक्षी भी परेशान हैं। वहीं स्थानीय लोगों को जीवन यापन करने के लिए प्रतिदिन पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। यही कारण है कि पहाड़ी पर बसे गांवों से पशुपालक चारा एवं पानी के अभाव में अपने अपने मवेशियों को लेकर पहाड़ी पर बसे गांव से कैमूर पहाड़ी के नीचे मैदानी इलाकों में पलायन कर चुके हैं। पहाड़ी पर बसे पशुपालकों की मानें तो गर्मी शुरु होते ही वे लोग अपने-अपने मवेशियों को लेकर पहाड़ी के नीचे बसे गांव में रिश्तेदारों के यहां तो कुछ अपने या भाड़े किराये के मकान में रहकर अपने पशुओं की जीवन बचाने को विवश हैं। ये लोग ज्यादातर सोन तटीय मैदानी भागों में जहां गर्मी के मौसम में भी चारा एवं पानी उपलब्ध हो जाता है। इसके लिए उन्हें भटकना पड़ता है।

मवेशियों को बचाने की जद्दोजहद में पशुपालक

पशुपालकों का कहना है कि इन तपिश के दिनों में गांव में पीने के पानी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता नहीं रहने के कारण मवेशियों की जान पर खतरा बन आती है। ऐसे में मवेशियों को खाने और पीने के लाले पड़ जाते हैं। दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन पर भी असर पड़ता है। जिसके कारण वे लोग परेशानी उठाकर भी मवेशियों के साथ पलायन करने को विवश रहते हैं। प्रखंड रोहतास गढ़ ,नागटोली बुधुआ ,रानीबाग,धंसा,आदि दर्जनों गांवों के दर्जनों पशुपालक प्रति वर्ष अपने मवेशियों को लेकर मैदानी इलाकों की ओर जाते हैं। वहां पशुपालक इन मवेशियों की दूध आदि से अपना जीवन यापन किसी तरह करते हैं।

सिटी रिपोर्टर|रोहतास

प्रखंड क्षेत्र के कैमूर पहाड़ी के ऊपर बसे गांव के लोगों का बढ़ती तपिश और गिरते जलस्तर से उत्पन्न पानी की गंभीर संकट से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। इन दिनों नदियां, तालाब ,आहार-पोखर कुएं भी सुख गए हैं। जिससे पहाड़ी पर स्थित गांवाें में पानी की गंभीर समस्या से मानव, पशु-पक्षी भी परेशान हैं। वहीं स्थानीय लोगों को जीवन यापन करने के लिए प्रतिदिन पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। यही कारण है कि पहाड़ी पर बसे गांवों से पशुपालक चारा एवं पानी के अभाव में अपने अपने मवेशियों को लेकर पहाड़ी पर बसे गांव से कैमूर पहाड़ी के नीचे मैदानी इलाकों में पलायन कर चुके हैं। पहाड़ी पर बसे पशुपालकों की मानें तो गर्मी शुरु होते ही वे लोग अपने-अपने मवेशियों को लेकर पहाड़ी के नीचे बसे गांव में रिश्तेदारों के यहां तो कुछ अपने या भाड़े किराये के मकान में रहकर अपने पशुओं की जीवन बचाने को विवश हैं। ये लोग ज्यादातर सोन तटीय मैदानी भागों में जहां गर्मी के मौसम में भी चारा एवं पानी उपलब्ध हो जाता है। इसके लिए उन्हें भटकना पड़ता है।

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