8 को किया जाएगा मोक्षदा एकादशी व्रत

Sasaram News - मोक्षदा एकादशी का व्रत 8 दिसंबर को है। वैदिक पुराणों के अनुसार मोक्ष प्राप्त किए बिना मनुष्य को बार-बार इस संसार...

Dec 04, 2019, 09:20 AM IST
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मोक्षदा एकादशी का व्रत 8 दिसंबर को है। वैदिक पुराणों के अनुसार मोक्ष प्राप्त किए बिना मनुष्य को बार-बार इस संसार में आना पड़ता है। मोक्ष की इच्छा रखने वाले प्राणियों के लिए मोक्षदा एकादशी व्रत रखने की सलाह पुराणों में दी गई है। पंडित इन्दुप्रकाश मिश्र ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। मोक्षदा एकादशी पर सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। भगवान विष्णु की आराधना करें।पूजा में तुलसी के पत्तों को अवश्य शामिल करें। रात्रि में भगवान श्रीहरि का भजन-कीर्तन करें। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देकर विदा करें। उपवास को परिवार के साथ खोलना चाहिए। उन्होंने बताया कि मोक्षदा एकादशी से एक दिन पहले दशमी के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए तथा सोने से पहले भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए। उपवास रखकर श्री हरि के नाम का संकीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें। प्राणियों को बंधन से मुक्ति प्रदान करने वाली यह एकादशी समस्त कामनाओं को पूर्ण करती है।

भगवान विष्णु।

नरक से स्वर्ग पहुंच जाते हैं पूर्वज | पंडित इंदुप्रकाश मिश्र ने बताया कि इस व्रत में विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें और भगवान विष्णु की आरती करें। ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान दें। मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी व्रत करने से व्रती के पूर्वज जो नरक में चले गए हैं, उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

इसी दिन श्रीकृष्ण को दिया था गीता का उपदेश

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी के रूप में जाना जाता है। इस दिन ही कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भागवत गीता का उपदेश दिया था। यह तिथि गीता जयंती के नाम से भी जानी जाती है। मोक्ष की प्राप्ति के लिए इस व्रत को सबसे पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन से गीता-पाठ का अनुष्ठान प्रारंभ करें तथा प्रतिदिन गीता अवश्य पढ़ें।

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