3.2 लाख मीट्रिक टन कम हुआ धान

Sasaram News - धान के कटोरा कहे जाने वाले रोहतास जिला के किसानों के लिए इस बार धान की फसल में नुकसान हो गया है। जिले में पिछले वर्ष...

Jan 16, 2020, 09:16 AM IST
Sasaram News - paddy reduced by 32 lakh metric tons
धान के कटोरा कहे जाने वाले रोहतास जिला के किसानों के लिए इस बार धान की फसल में नुकसान हो गया है। जिले में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार 4 लाख मीट्रिक टन तक कम धान की पैदावार हुई है। इससे न सिर्फ किसानों को नुकसान हो रहा है, बल्कि इसका असर आढ़तियों पर भी पड़ रहा है। धान की बंपर पैदावार की उम्मीदों पर इस बार मौसम की मार ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया है, बीते साल जिले में धान का उत्पादन 15 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया था। लेकिन इस बार 1180499.62 मीट्रिक टन ही धान का उत्पादन हो पाया है। इससे कृषि विशेषज्ञ भी चिंतित हैं।

मौसम की बेरूखी से किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। एक तो धान का उत्पादन कम हुआ है, तो ऊपर से नमी की वजह से फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा। जिले के किसानों को इस बार धान की बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन फसल पक कर तैयार होने के बाद ऐन वक्त पर कटनी के समय ही बरसात व तेज हवाओं ने किसानों को चिंता में डाल दिया। मौसम की मार से धान फसल को काफी नुकसान हुआ। बेमौसम बरसात और हवा के कारण धान की खड़ी फसल खेतों में पसर गई, जिससे फसल की हार्वेस्टिंग में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। खेतों में धान की फसल इस कदर गिरी पड़ी थी कि उसकी हार्वेस्टिंग भगवान भरोसे ही की गई।

पिछले साल पंद्रह लाख मीट्रिक टन हुई थी धान की उपज, इस बार 11.8 लाख एमटी ही पहुंचा आंकड़ा

बेमौसम बारिश से किसानों की मेहनत बर्बाद

खेत-खलिहान में ही भीगकर बर्बाद हो गई उपज, अब धान की उचित कीमत भी नहीं मिल रही

कुछ दिनों पहले हुई बारिश में खलिहान में रखे बोझे भीग गए थे।

1400 रुपए प्रति क्विंटल ही मिल रही है धान की कीमत

कुछ हार्वेस्टर चालकों ने गिरे पड़े धान के फसल को जड़ से काटने का प्रयास किया तो धान में मिट्टी आने लगी। ऐसे में मिट्टी युक्त धान को कोई लेने को तैयार नहीं। सासाराम प्रखंड के किसान लक्ष्मण तिवारी की मानें तो उनके धान में मिट्टी होने के कारण कोई लेने को तैयार नहीं था। लगभग 15 दिनों के बाद एक व्यवसायी ने मिट्टी की अनुमानित वजन काटने की बात पर तैयार होने के बाद 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की।

अब तो सरकारी क्रय एजेंसियां भी धान को बता रहीं खराब

बारिश के बाद किसानों की हार्वेस्टर से काटे गए धान को अपने खलिहान में रख दिया लेकिन पानी भरने के बाद धान की फसल खराब हो गई है। जिले के कई गांवों के किसानों का धान में तो अंकुर भी निकल आए। जिससे उनकी कमर टूट गई है। धान के दाने में चमक नहीं होने व नमी होने, खखरी ज्यादा होने की बात कह व्यापारी खरीदी नहीं कर रहे। पैक्स व व्यापार मंडल जैसी सरकारी क्रय एजेंसियां भी खराब धान का बहाना कर कम कीमत लगा रही हैं।

डीएओ बोले- उपज कम होना चिंता का विषय


मुख्यालय जाएगी रिपोर्ट: फसल क्षति के आकलन में लगा विभाग

बेमौसम बरसात से जिले के किसानों को काफी नुकसान हुआ है। फसल क्षति को देखते हुए कृषि विभाग जिले में हुए नुकसान का आकलन करने में लगा हुआ है। जिला कृषि पदाधिकारी राधा रमण ने बताया कि सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी को फसल क्षति का आकलन करने के लिए निर्देश दिए जा चुके हैं। पंचायत स्तर से प्राप्त रिपोर्ट को मुख्यालय को भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फसल क्षति के लिए मुअावजे का निर्धारण मुख्यालय स्तर से होगा। वरीय अधिकारियों के आदेश का इंतजार है।

रबी फसल पर भी असर: 75 प्रतिशत ही हुई गेहूं की बुआई

बेमौसम बरसात ने धान की पैदावार को ही कम नहीं किया है बल्कि गेहूं की बुआई को भी बुरी तरह से प्रभावित कर रखा है। गेहूं बुआई के लिए सबसे अनुकूल समय 15 नवम्बर से 15 दिसम्बर का होता है। लेकिन 31 दिसम्बर तक गेहूं की बुआई की जा सकती है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो वर्तमान में गेहूं की बुआई घाटे का सौदा साबित हो सकता है। मार्च में गर्म तेज पछुआ हवा के कारण गेहूं की बालिया तैयार होने से पूर्व ही सुख जाएंगी। इस वर्ष 1 लाख 40 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती का लक्ष्य निर्धारित है।

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