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मार्ग से विचलित लोगों को भी धर्म देता है आश्रय : जीयर स्वामी

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 05:11 AM IST

Sasaram News - सिटी रिपोर्टर | सासाराम/करगहर धर्म का अर्थ ही है दया, प्रेम, परमात्मा में निष्ठा। वर्तमान युग की भाषा में कहें तो...

Sasaram News - religion gives shelter to people deviated from the path jier swami
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सिटी रिपोर्टर | सासाराम/करगहर

धर्म का अर्थ ही है दया, प्रेम, परमात्मा में निष्ठा। वर्तमान युग की भाषा में कहें तो सकारात्मक उर्जा का केन्द्र। धर्म कहता है अगर अधर्मी भी धर्म के मार्ग पर चलने लगे तो उसे हम स्वीकार कर लेते हैं। इसके अनेक उदहरण हैं। क्योंकि हमारे यहां सभी के लिए दरवाजे खुले हुए हैं। इस धराधाम के महान तपस्वी व रामायण के रचैता महर्षी वाल्मीकि से बड़ा उदहरण और क्या हो सकता है। उनकी वापसी अनेक संदेश देती है। सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ है। अगर आपका मन निर्मल व सच्चा है तो यहां मिला श्राप भी आपके लिए वरदान बन जाता है। अगर आप गलत रास्ते पर जा रहे हैं। तो आपका वरदान आपके लिए अभिशाप बन जाता है। अगर हम बात रामायण की करें। तो वहां राजा दशरथ को श्राप मिलता है। श्रवण कुमार की अनजाने में मृत्यु हो जाती है। उनके पिता राजा दशरथ को श्राप देते हैं। आप भी बेटे के लिए तड़प कर मरेंगे। राजा दशरथ की तीन प|ियां थी। कोई संतान नहीं थी। जबकि वे स्वयं और उनका पूरा परिवार बहुत ही धर्म निष्ठ था। लेकिन उस श्राप का प्रभाव कहें या विधि का विधान। उनके यहां चार पुत्रों का जन्म हुआ। वहीं दूसरी तरफ महाप्रतापी रावण को अनेक वरदान प्राप्त थे। उसे कोई देवता मार नहीं सकते थे। नतीजा भगवान मनुष्य रुप में आए और उसे मार गिराया। अर्थात नियत और उद्ेश्य सही हो तो आप का भला होगा। अगर आपका उद्येश्य सही नहीं तो उसका दंड आपको मिलना तय है। जनमानस को आम भाषा में समझाते हुए स्वामी जी ने कहा कि संस्कार अर्थात चरित्र। चरित्र निर्माण के लिए धर्म की शिक्षा और उससे जुड़ाव बहुत जरुरी है। आज समाज के पास सबकुछ है। लेकिन, चरित्र के लोप का परिणाम आपके सामने है। अगर चरित्र नहीं है तो आप पशु तुल्य हैं। यहीं आपको सबसे अलग करता है। अर्थात महान बनाता है। जिसकी शिक्षा धर्म से ही संभव है। आप यह भी कह सकते हैं नैतिकता की शिक्षा ही धर्म है। यज्ञ समिति के पदाधिकारी कमलेश दूबे ने बतया कि स्वामी जी के अागमन के बाद से यज्ञ स्थल पूरी तरह गुलजार हो चुका है।

शहर मेदनी में प्रवचन सुनते श्रद्धालु।

सिटी रिपोर्टर | सासाराम/करगहर

धर्म का अर्थ ही है दया, प्रेम, परमात्मा में निष्ठा। वर्तमान युग की भाषा में कहें तो सकारात्मक उर्जा का केन्द्र। धर्म कहता है अगर अधर्मी भी धर्म के मार्ग पर चलने लगे तो उसे हम स्वीकार कर लेते हैं। इसके अनेक उदहरण हैं। क्योंकि हमारे यहां सभी के लिए दरवाजे खुले हुए हैं। इस धराधाम के महान तपस्वी व रामायण के रचैता महर्षी वाल्मीकि से बड़ा उदहरण और क्या हो सकता है। उनकी वापसी अनेक संदेश देती है। सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ है। अगर आपका मन निर्मल व सच्चा है तो यहां मिला श्राप भी आपके लिए वरदान बन जाता है। अगर आप गलत रास्ते पर जा रहे हैं। तो आपका वरदान आपके लिए अभिशाप बन जाता है। अगर हम बात रामायण की करें। तो वहां राजा दशरथ को श्राप मिलता है। श्रवण कुमार की अनजाने में मृत्यु हो जाती है। उनके पिता राजा दशरथ को श्राप देते हैं। आप भी बेटे के लिए तड़प कर मरेंगे। राजा दशरथ की तीन प|ियां थी। कोई संतान नहीं थी। जबकि वे स्वयं और उनका पूरा परिवार बहुत ही धर्म निष्ठ था। लेकिन उस श्राप का प्रभाव कहें या विधि का विधान। उनके यहां चार पुत्रों का जन्म हुआ। वहीं दूसरी तरफ महाप्रतापी रावण को अनेक वरदान प्राप्त थे। उसे कोई देवता मार नहीं सकते थे। नतीजा भगवान मनुष्य रुप में आए और उसे मार गिराया। अर्थात नियत और उद्ेश्य सही हो तो आप का भला होगा। अगर आपका उद्येश्य सही नहीं तो उसका दंड आपको मिलना तय है। जनमानस को आम भाषा में समझाते हुए स्वामी जी ने कहा कि संस्कार अर्थात चरित्र। चरित्र निर्माण के लिए धर्म की शिक्षा और उससे जुड़ाव बहुत जरुरी है। आज समाज के पास सबकुछ है। लेकिन, चरित्र के लोप का परिणाम आपके सामने है। अगर चरित्र नहीं है तो आप पशु तुल्य हैं। यहीं आपको सबसे अलग करता है। अर्थात महान बनाता है। जिसकी शिक्षा धर्म से ही संभव है। आप यह भी कह सकते हैं नैतिकता की शिक्षा ही धर्म है। यज्ञ समिति के पदाधिकारी कमलेश दूबे ने बतया कि स्वामी जी के अागमन के बाद से यज्ञ स्थल पूरी तरह गुलजार हो चुका है।

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