जीवन में शांति के लिए त्याग जरूरी: जीयर स्वामी
काराकाट स्थानीय बाजार स्थित करथ राजवाहा के समीप आयोजित साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ महामहोत्सव में प्रवचन के तीसरे दिन महान संत श्रीत्रिदंडी स्वामी जी के परम शिष्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वाजी जी ने कहा कि पूजा पाठ तप करने से मानव मन पर काबू नहीं पाया जा सकता, बल्कि इसके लिए संयम करना जरूरी है। दत्तात्रेय व राजा यदु की वार्ता प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि धर्म की रक्षा के लिए राजा यदु ने राज्य को भी ठुकरा दिया था । सांसारिक कार्यों में लगे रहने के साथ ही हर पल काल व मृत्यु को याद करते रहना चाहिए । इससे व्यक्ति संसार में रह कर भी संसार के अवस्थाओं, दशाओं व व्यवस्था में लिप्त नहीं होता । इसलिए मनुष्य को यह बार-बार जानना चाहिए कि मृत्यु हमारे परछाई की तरह साथ है। जिससे हम कभी भी काल के गाल में समा सकते हैं। जो जीवन में शांति चाहते हैं उन्हें कामना का त्याग करना होगा। व्यक्ति काल व मृत्यु को भूल जाता है। तभी अहंकार में फंस जाता है।
के अवस्थाओं, दशाओं व व्यवस्था में लिप्त नहीं होता । इसलिए मनुष्य को यह बार-बार जानना चाहिए कि मृत्यु हमारे परछाई की तरह साथ है। जिससे हम कभी भी काल के गाल में समा सकते हैं। जो जीवन में शांति चाहते हैं उन्हें कामना का त्याग करना होगा। व्यक्ति काल व मृत्यु को भूल जाता है। तभी अहंकार में फंस जाता है।
प्रवचन सुनते श्रद्धालु।
संयम रूपी छड़ी से भटके मन व
इंद्रियों पर पाया जा सकता है काबू
जीयर स्वामी जी ने कहा कि संयम रूपी छड़ी से भटके मन व इंद्रियों पर काबू पाया जा सकता है। साथ ही सती अनसुइया व त्रिदेव प्रसंग को लोगो के समझ पेश कर कहा कि नारी सतीत्व के कायल त्रिदेव भी हैं। अपने सतीत्व बल से ब्रम्हा, विष्णु व महेश को बाल रूप धारण करने के लिए माता अनुसुइया ने बाध्य कर दिया था। इसलिए महिलाओं को माता - पिता के अलावे पति, सास, ससुर व बड़ों की सेवा करते हुए स्त्री धर्म व मर्यादा के साथ रहना चाहिए। स्वामीजी ने कहा कि आकांक्षाओं को नियंत्रित कर लेने में ही मानव जीवन की भलाई है। जगद्गुरु बैकुंठनाथ जी महाराज व झारखंड से आए जगद्गुरु चतुर्भुज स्वामीजी महाराज ने कहा कि श्रीराम के चरित्र का अनुकरण करने मात्र से शांति व समृद्धि स्थापित किया जा सकता है।