मनरेगा में धांधली, नियमों को ताक पर रख कर बाहरी मजदूरों से कराया जा रहा काम

Sasaram News - गांव में ही 100 दिन की रोजगार गारंटी देने वाली योजना को उचितपुर के जनप्रतिनिधि पलीता लगा रहे हैं। लेकिन सरकार की इस...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 05:11 AM IST
Sasaram News - rigging in mnrega keeping the rules in mind and working out of the outer workers
गांव में ही 100 दिन की रोजगार गारंटी देने वाली योजना को उचितपुर के जनप्रतिनिधि पलीता लगा रहे हैं। लेकिन सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ विभाग की लापरवाही की वजह से ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। साथ ही गरीब ग्रामीणों के हक के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत के कर्मडिहरी मौजा में काराए जा रहे मिट्‌टी का सड़क निर्माण के दौरान आया है। जिसमें स्थानीय मजदूरों को दरकिनार कर अन्य पंचायत के मजदूरों से कार्य कराया जा रहा है। इस होने वाले सड़क निर्माण में मुखिया, वार्ड सदस्य व पीआरएस के मिलीभगत के चलते ग्राम पंचायत के मजदूरों को रोजगार गांरटी के तहत वर्ष में 100 दिन मिलने वाला रोजगार भी नहीं मिल रहा और पंचायत में बनाई जा रही सड़क में गरूणा गांव के मजदूरों से काम कराया जा रहा है। जो कि योजना की मंशा के विपरीत है। स्थानीय मजदूरों की माने तो मनरेगा योजना की राशि का बंदरबांट करने के लिए बाहरी मजदूरों से काम कराया जाता है। इस तरह जनप्रतिनिधि विभाग के मिली भगत से स्थानीय मजदूरों के हितों का शोषण कर रहे हैं। बाहर के मजदूरों से कार्य करा रहे हैं। स्थानीय मजदूरों की माने तो सड़क निर्माण के नाम पर फर्जी तरिके से जॉब कार्ड खोल दिया जाता है। जिन मजदूरों के नाम रजिस्टर में अंकित होते है उनसे काम नहीं लेकर बाहरी मजदूरों से ठेका पर कार्य कराया जाता है। राशि निकासी के वक्त विभागीय अधिकारियों के मिली भगत से राशि का हेरफेर कर दिया जाता है। मामले को ले स्थानीय मजदूरों में काफी आक्रोश है। मजदूरों ने धांधली का आरोप लगाते हुए मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग जिला प्रशासन से की है। प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी बसंत कुमार ने बताया कि मनरेगा योजना में स्थानीय मजदूरों से काम लेना है। अगर परिस्थिति वस बाहरी मजदूरों को बुलाना पड़ा तो उनकों नियमानुसार स्थानीय मजदूरों से 10 प्रतिशत अधिक मजदूरी देना पड़ता है।

कर्मडिहरी सड़क निर्माण कार्य कर रहे मजदूर।

सिटी रिपाेर्टर | सासाराम

गांव में ही 100 दिन की रोजगार गारंटी देने वाली योजना को उचितपुर के जनप्रतिनिधि पलीता लगा रहे हैं। लेकिन सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ विभाग की लापरवाही की वजह से ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। साथ ही गरीब ग्रामीणों के हक के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत के कर्मडिहरी मौजा में काराए जा रहे मिट्‌टी का सड़क निर्माण के दौरान आया है। जिसमें स्थानीय मजदूरों को दरकिनार कर अन्य पंचायत के मजदूरों से कार्य कराया जा रहा है। इस होने वाले सड़क निर्माण में मुखिया, वार्ड सदस्य व पीआरएस के मिलीभगत के चलते ग्राम पंचायत के मजदूरों को रोजगार गांरटी के तहत वर्ष में 100 दिन मिलने वाला रोजगार भी नहीं मिल रहा और पंचायत में बनाई जा रही सड़क में गरूणा गांव के मजदूरों से काम कराया जा रहा है। जो कि योजना की मंशा के विपरीत है। स्थानीय मजदूरों की माने तो मनरेगा योजना की राशि का बंदरबांट करने के लिए बाहरी मजदूरों से काम कराया जाता है। इस तरह जनप्रतिनिधि विभाग के मिली भगत से स्थानीय मजदूरों के हितों का शोषण कर रहे हैं। बाहर के मजदूरों से कार्य करा रहे हैं। स्थानीय मजदूरों की माने तो सड़क निर्माण के नाम पर फर्जी तरिके से जॉब कार्ड खोल दिया जाता है। जिन मजदूरों के नाम रजिस्टर में अंकित होते है उनसे काम नहीं लेकर बाहरी मजदूरों से ठेका पर कार्य कराया जाता है। राशि निकासी के वक्त विभागीय अधिकारियों के मिली भगत से राशि का हेरफेर कर दिया जाता है। मामले को ले स्थानीय मजदूरों में काफी आक्रोश है। मजदूरों ने धांधली का आरोप लगाते हुए मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग जिला प्रशासन से की है। प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी बसंत कुमार ने बताया कि मनरेगा योजना में स्थानीय मजदूरों से काम लेना है। अगर परिस्थिति वस बाहरी मजदूरों को बुलाना पड़ा तो उनकों नियमानुसार स्थानीय मजदूरों से 10 प्रतिशत अधिक मजदूरी देना पड़ता है।

सिटी रिपाेर्टर | सासाराम

गांव में ही 100 दिन की रोजगार गारंटी देने वाली योजना को उचितपुर के जनप्रतिनिधि पलीता लगा रहे हैं। लेकिन सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ विभाग की लापरवाही की वजह से ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। साथ ही गरीब ग्रामीणों के हक के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत के कर्मडिहरी मौजा में काराए जा रहे मिट्‌टी का सड़क निर्माण के दौरान आया है। जिसमें स्थानीय मजदूरों को दरकिनार कर अन्य पंचायत के मजदूरों से कार्य कराया जा रहा है। इस होने वाले सड़क निर्माण में मुखिया, वार्ड सदस्य व पीआरएस के मिलीभगत के चलते ग्राम पंचायत के मजदूरों को रोजगार गांरटी के तहत वर्ष में 100 दिन मिलने वाला रोजगार भी नहीं मिल रहा और पंचायत में बनाई जा रही सड़क में गरूणा गांव के मजदूरों से काम कराया जा रहा है। जो कि योजना की मंशा के विपरीत है। स्थानीय मजदूरों की माने तो मनरेगा योजना की राशि का बंदरबांट करने के लिए बाहरी मजदूरों से काम कराया जाता है। इस तरह जनप्रतिनिधि विभाग के मिली भगत से स्थानीय मजदूरों के हितों का शोषण कर रहे हैं। बाहर के मजदूरों से कार्य करा रहे हैं। स्थानीय मजदूरों की माने तो सड़क निर्माण के नाम पर फर्जी तरिके से जॉब कार्ड खोल दिया जाता है। जिन मजदूरों के नाम रजिस्टर में अंकित होते है उनसे काम नहीं लेकर बाहरी मजदूरों से ठेका पर कार्य कराया जाता है। राशि निकासी के वक्त विभागीय अधिकारियों के मिली भगत से राशि का हेरफेर कर दिया जाता है। मामले को ले स्थानीय मजदूरों में काफी आक्रोश है। मजदूरों ने धांधली का आरोप लगाते हुए मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग जिला प्रशासन से की है। प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी बसंत कुमार ने बताया कि मनरेगा योजना में स्थानीय मजदूरों से काम लेना है। अगर परिस्थिति वस बाहरी मजदूरों को बुलाना पड़ा तो उनकों नियमानुसार स्थानीय मजदूरों से 10 प्रतिशत अधिक मजदूरी देना पड़ता है।

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