पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Bikramganj News The City Was Declared Odf Even After Having Incomplete Toilets

अधूरे शौचालय होने के बाद भी शहर को घोषित कर दिया गया ओडीएफ

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

शौचालय बनाने व बिक्रमगंज को ओडीएफ घोषित होने पर तमगा मिला था, लेकिन अधिकारियों ने छुपा लिया था बगैर शौचालय बने तो कही बिना दिवार दरवाजा के ही ओडीएफ घोषित कर दिया गया था। जिस पर संझौली के उदयपुर में पहुंचे सीएम नीतीश कुमार ने जिला प्रशासन को सराहते हुए तमगा बंधा था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रहे हैं। बिक्रमगंज नगर परिषद क्षेत्र के लोग अभी भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं। दावथ प्रखंड महादलित बस्ती में साढ़े तीन साल बाद भी शौचालय निर्माण अधूरे हैं। “भास्कर रिपोर्टर” की पड़ताल से पता चला कि जो शौचालय बना है। उसका भी उपयोग नहीं हो रहा है। शौचालय निर्माण कराने वाले भी अधिकतर लोग खुले में शौच करने जा रहे हैं। शौचालय निर्माण के लिए जिस तरह से लग्न के साथ मेहनत किए थे। वह सब व्यर्थ प्रतीत हो रहा है। हांलांकि कुछ लोगों में बदलाव आया है, लेकिन जितनी अर्थ खर्च हुआ उस हिसाब से शौचालय अभियान असफल भी दिख रहा है। दलितों को अभी तक नहीं हो सका है शौचालय निर्माण

: जिले में बिक्रमगंज अनुमंडल के संझौली से पहली बार शौचालय निर्माण कार्य का शुरुआत हुआ तो देश ही नहीं विदेश से भी लोग पहुंचे और काफी प्रभावित हुए। पर उसके बाद भी शौचालय निर्माण आधे अधूरे रह गए। यही नहीं बिक्रमगंज नगर परिषद क्षेत्र के रेलवे मार्टिन के जमीन पर बसे दलित को अभी तक शौचालय निर्माण नहीं हुआ है। हालांकि अनुमंडल क्षेत्र के बिक्रमगंज, संझौली, काराकाट, दावथ, दिनारा, नासरीगंज, सूर्यपुरा प्रखंड ओडीएफ घोषित हो चुका है। जब कि बिक्रमगंज नगर परिषद क्षेत्र अभी भी ओडीएफ घोषित नहीं हुआ है। अहले सुबह और शाम लोग आहर, तलाब, नहर के किनारे लोग शौच करते नजर आ जाते हैं। पहले निगरानी होती थी जो अब नहीं दिख रहा है। हालांकी उस समय के तत्कालीन डीएम अनिमेश कुमार, एसडीएम राजेश कुमार, एएसपी नीरज कुमार सिंह ने शौचालय निर्माण के लिए जागरुकता अभियान चलाया था जिसके तहत आधा दर्जन गांवों के स्कूलों में रात तक बिताया था।

हथडिहा गांव में शाैचालय घाेटाला का अाया था मामला

दावथ प्रखंड के हथडिहा गांव में शौचालय घोटाला का भी मामला आया था। जिसकी जांच के बाद तत्कालीन बीडीओ रितेश कुमार, आवास सहायक व विकास मित्र से पैसे रिकवरी कराने को कहा गया था। जांच में बिना शौचालय निर्माण कराए ही पैसे निकाल लिए गए थे। शौचालय का सच जानने की कोशिश की गई तो कइयों ने बताया कि शुरुआत के दिनों में अधिकारियों का दबाव रहता था तो बाहर नहीं जाते थे।

नगर परिषद क्षेत्र अभी भी ओडीएफ घोषित नहीं हुआ है। अहले सुबह और शाम लोग आहर, तलाब, नहर के किनारे लोग शौच करते नजर आ जाते हैं। पहले निगरानी होती थी जो अब नहीं दिख रहा है। हालांकी उस समय के तत्कालीन डीएम अनिमेश कुमार, एसडीएम राजेश कुमार, एएसपी नीरज कुमार सिंह ने शौचालय निर्माण के लिए जागरुकता अभियान चलाया था जिसके तहत आधा दर्जन गांवों के स्कूलों में रात तक बिताया था।

अधूरा पड़ा शौचालय

बगैर दीवार व दरवाजा के हैं शौचालय
खबरें और भी हैं...