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नगर परिषद के निम्न आयवर्गीय क्वार्टर में रहने वालों ने मांगा हक
दस दिनों के भीतर नगर परिषद के मिले तीन नोटिसों के बाद नगर परिषद के निम्न आयवर्गीय क्वार्टरों में रहने वाले लोगों ने नगर परिषद के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। इसके 43 क्वार्टरों में रहने वाले लोगों को खाली कर देने के आदेश दिए गए हैं। निम्नवर्गीय क्वार्टरों में नगर परिषद के 6 पेंशनधारी भी रहते हैं। जिनके पेंशन बंद करने की धमकी के साथ ही नगर परिषद 2 हजार रुपए प्रतिमाह किराए के रूप में काट ले रही है। जिससे इनकी जीविका प्रभावित हुई है। उन्होंने इस कार्य
को तानाशाही बताया है।क्वार्टरों में रहने वालों के मुताबिक 4 जनवरी 2020 को उन्हें पहली नोटिस जारी हुई थी।
नगर परिषद कर्मियों ने 1956 में आवास निर्माण के लिए लोन का आवेदन दिया था। इसके बाद द्वितीय पंचवर्षीय योजना के दौरान बिहार सरकार के गृह निर्माण विभाग के परिपत्र के मुताबिक मार्च 1958 में नो प्रॉफिट नो लॉस के आधार पर लो इनकम कैटेगरी क्वार्टर बनाने के निर्णय हुए। 1966-67 में बनाकर दे दिया गया। इस दौरान करीब 50 क्वार्टर बने जिसमें से 43 क्वार्टर आवंटित हुए। 7 क्वार्टरों को नगर परिषद ने अपने जिम्मे रखा। सभी क्वार्टर एक ही श्रेणी के बने क्योंकि एक ही तरह के आए वर्गीय को देना था।
क्वार्टरों में कुछ बाहरी लोगों का भी कब्जा
निम्न आय वर्ग के क्वार्टर में नगर परिषद में कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मी रहते हैं। इसके अलावा करीब आधे दर्जन क्वार्टरों पर बाहरी लोगों का भी कब्जा हो गया है। बाहरी लोगों से किराया वसूल नहीं कर पा रही नगर परिषद सेवानिवृत्त के पेंशन से किराया वसूली शुरू कर दी जिससे मामला तूल पकड़ गया है। क्वार्टरों में रहने वालों ने पटना के कंकड़बाग, श्रीकृष्ण नगर, लोहिया नगर इलाके में इसी योजना के तहत बने क्वार्टरों के स्वामित्व दिए जाने की बात कहते स्वामित्व की मांग की है। कहा है कि 1970 से 1992 तक में मासिक आधार पर इंस्टॉलमेंट उन्होंने पूरा कर दिया है। इसके बाद जो राशि उनसे नगर परिषद ने ली है वह वापस करे।
मामला नगर विकास विभाग के पास लंबित: निवासियों ने बताया की जिलाधकारी के यहां मामला चला था। बताया गया कि नगर परिषद का क्वार्टर नहीं है बल्कि लो इनकम का है। जिलाधिकारी ने उच्च स्तरीय मामला बताकर इसके नए सिरे से जांच की बात कही है। फिलहाल क्वार्टरों में रहने वालों ने मामले को नगर विकास एवं आवास विभाग को लिखा है। जहां मामला वरीय अधिकारियों के पास चल रही है। ने कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार सिंह ने कहा कि विभाग के आदेश के अनुसार निर्णय लागू किया जाएगा।
नगर परिषद का क्वार्टर।
क्वार्टरों के रखरखाव की इजाजत मांगने के बाद मामला पकड़ा तूल
निम्न आय वर्गीय क्वार्टरों के आवंटित करने के तरीके के मुताबिक एकमुश्त भुगतान या भाड़ा सह क्रय रखा गया था जैसा कि इन क्वार्टरों में रहने वाले बताते हैं। इसी दौरान डेहरी डालमियानगर नोटिफाइड एरिया के रूप में खत्म हो गयी और नगरपालिका बन गया। तत्कालीन नगर परिषद अधिकारी वैदेही सरन ने 1970 में कर्मियों को क्वार्टर आवंटित कर दिए। इन क्वार्टरों में 43 कर्मी रहने लगे जबकि 7 में नगर पालिका का कार्यालय शुरू हो गया।क्वार्टरों में रहने वालों का कहना है कि नगर परिषद ने कभी भी क्वार्टर मरम्मत का काम नहीं कराया जिससे क्वार्टर खस्ताहाल हो गए। जब रहने वालों ने मरम्मत कार्य शुरू किया और नगर परिषद के रोकने पर इसकी इजाजत मांगी तब से नगर परिषद ने नजरें टेढ़ी कर ली है।
दस दिनों में तीन नोटिस, 1970 में अावंटित हुए थे मकान