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होली में कवि सम्मेलन कराने की परंपरा अब हो गई खत्म

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 03:06 AM IST

Sasaram News - अनुमंडल मुख्यालय में होली की दो परंपराएं विलुप्त हो गई हैं। ये परंपरा थी कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम के...

Dehri News - tradition of poetry convention in holi is over now
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अनुमंडल मुख्यालय में होली की दो परंपराएं विलुप्त हो गई हैं। ये परंपरा थी कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन की। रोहतास उद्योग पुंज (डालमियानगर उद्योग समूह) द्वारा कवि सम्मलेन का आयोजन किया जाता था। बड़े बड़े कवि यहां आते थे और शहरियों का स्वस्थ और साहित्यिक मनोरंजन होता था। संस्कृति के विविध आयाम साहित्यिक भाषा और शैली में देखने को मिलते थे। अब यह परंपरा खत्म हो गई है। जयहिंद सिनेमा हॉल के प्रोपराइटर विश्वनाथ प्रसाद सरावगी और शिल्पी के निदेशक नंदलाल गुप्ता ने बताया कि डालमियानगर उद्योग समूह कवि सम्मेलन जैसे आयोजन किया करता था। बड़े नामी कवि आते थे। श्रोता-दर्शकों को काफी कुछ जानने समझने का अवसर मिलता था। शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे। शहर के लोग और कई संगठन भी आयोजन कराते थे। अब यह सब नहीं होता है। सांस्कृतिक चेतना की कमी नहीं है शहर में, किन्तु बदली परिस्थिति में ऐसे आयोजन नहीं होते हैं। बताया कि होली मिलन समारोह होली के दिन ही आयोजित होते हैं। शहर में कई समूह या संगठन ऐसे हैं, जो इस तरह के आयोजन करते हैं। राजनीतिक, सामाजिक संगठन भी होली मिलन समारोह आयोजित करते हैं। मूर्ख महा सम्मेलन जैसे हास्य से भरपूर आयोजन यदा कदा ही होते रहे हैं।

डालमियानगर उद्योग समूह पहले कराता था कवि सम्मेलन

होली के गीत गाते लोग।

8 साल रहा आयोजन का इतिहास

होली कला मंच द्वारा एक आयोजन यहाँ पड़ाव मैदान में किया जाता था। अब यह नहीं होता। इसकी चर्चा और प्रतिष्ठा काफी थी। दावा किया जाता है कि 40 से 50 हजार तक की भीड़ होती थी। संस्था के अध्यक्ष मुन्ना लाल कसेरा ने बताया कि वर्ष 1994 से 2002 तक, आठ साल आयोजन किया गया था। चर्चित भोजपुरी लोक कलाकार मनोज तिवारी, अजय पांडेय, सत्येंद्र पांडेय, गीता रानी, बिजली रानी जैसे बड़े नामचीन कलाकार यहाँ अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। एक बार गोली चल गई। सामाजिक-पारिवारिक दबाव के कारण जो कार्यक्रम बन्द हुआ तो फिर शुरू ही नहीं हुआ।

डेहरी में नहीं होती हुड़दंग

डेहरी में हुड़दंगई कभी नहीं होती है। यह खासियत है, यहां की। श्री सरावगी बताते हैं कि यहाँ कभी हुडदंगई की घटना नहीं घटी है। कहा कि शराबबंदी है, किन्तु शराब का सेवन या बिक्री तो बन्द हुई नहीं है। यह पूर्णतः बन्द हो जाये तो ठीक है। इसका असर पड़ा है। पूर्व की अपेक्षा लोग शांति से पर्व मनाने लगे हैं। इस डर से भी हुडदंगई नहीं करते लोग कि, करेंगे तो पुलिस द्वारा पकड़े जाएंगे। बताया गया कि दिन में सुबह से लेकर 12 या 01 बजे तक पानी वाला रंग या कीचड़ चलता था। एक परंपरा रोहतास में यह भी रही है कि कोई व्यक्ति यदि सड़क या बाजार में यह बताये कि उसके घर पूजा नहीं हुई है, तो उस पर सामने वाला रंग नहीं पड़ायेगा।

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