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जहां प्रेम है वहीं परमात्मा का वास है: विज्ञान देव

2 वर्ष पहले
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जहां प्रेम है वहीं पर परमात्मा का वास है। जहां सत्य है, जहां श्रद्धा है, जहां समर्पण है। जहां सेवक का भाव है वहीं आत्मा का कल्याण है। वहीं परमात्मा का प्रकाश है। उक्त बातें विहंगम योग के संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने डेहरी कटार में आयोजित विहंगम योग के प्रणेता अनंत श्री सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज की 132वीं जन्म जयंती के पावन अवसर पर विहंगम योग सत्संग समारोह एवं 5101 कुंडीय विश्व शांति वैदिक महायज्ञ में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

महाराज जी ने मानव जीवन की अमूल्यता को प्रकाशित करते हुए कहा कि अध्यात्म हमारे जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। इसके द्वारा हमारे जीवन का संपूर्ण विकास होता है। हम इस शरीर में हैं, हम इस संसार में है, जिंदगी बीत रही है हमारी, और जिंदगी जीने में ही सारी जिंदगी बीत जाती है और जिंदगी है क्या, जीवन क्यों मिला है, इसका कितना, कहाे, किस हद तक हमें बोध हो पाता है। शाम कालीन सत्र के समापन पर भक्तों को संबोधित करते हुए सद्गुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज ने भक्तों को बताया कि हमारा यह मानव जीवन अनमोल है। ईश्वर का महान प्रसाद है, यूं ही नहीं मिला है और हम यूं ही नहीं गंवा सकते। हमारे भीतर अनन्त की शक्ति है। ईश्वर ही हमारे भीतर बैठे हैं। हमारे अंदर ज्ञान का अनंत प्रकाश है। आवश्यकता है सद्गुरु युक्ति की , जिसके द्वारा हमारा जीवन निखर जाए, संवर जाए, इसीलिए सत्संग है और इसीलिए अध्यात्म की आवश्यकता है। इसके पूर्व दिन में 11 बजे ‘अ’ अंकित श्वेत ध्वजा रोहण कर 5101 कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ का शुभारंभ किया गया।

यज्ञ के पूर्व यज्ञ की महिमा को बताते हुए संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि वैदिक मंत्रोच्चारण से वातावरण परिशुद्ध हो दिव्य परिवेश का निर्माण होता है। आज हो रहे ग्लोबल वार्मिंग को रोकने का यह एक सशक्त माध्यम है।

इस पर सभी पर्यावरण चिंतकों का ध्यान अवश्य होना चाहिए। 5101 दंपतियों ने एक साथ इस पावन अवसर पर भौतिक एवं आध्यात्मिक उत्थान के निमित वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ कुंड में आहुति को प्रदान किये। भव्य एवं आकर्षक ढंग से सजी 5101 कुण्ड यज्ञ वेदियों में वैदिक मंत्रों की ध्वनि से संपूर्ण वातावरण शुचिता को धारण करते हुए गुंजायमान हो उठा।

हवन कुंड में आहूति देते भक्त।

सिटी रिपोर्टर|अमझोर

जहां प्रेम है वहीं पर परमात्मा का वास है। जहां सत्य है, जहां श्रद्धा है, जहां समर्पण है। जहां सेवक का भाव है वहीं आत्मा का कल्याण है। वहीं परमात्मा का प्रकाश है। उक्त बातें विहंगम योग के संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने डेहरी कटार में आयोजित विहंगम योग के प्रणेता अनंत श्री सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज की 132वीं जन्म जयंती के पावन अवसर पर विहंगम योग सत्संग समारोह एवं 5101 कुंडीय विश्व शांति वैदिक महायज्ञ में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

महाराज जी ने मानव जीवन की अमूल्यता को प्रकाशित करते हुए कहा कि अध्यात्म हमारे जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। इसके द्वारा हमारे जीवन का संपूर्ण विकास होता है। हम इस शरीर में हैं, हम इस संसार में है, जिंदगी बीत रही है हमारी, और जिंदगी जीने में ही सारी जिंदगी बीत जाती है और जिंदगी है क्या, जीवन क्यों मिला है, इसका कितना, कहाे, किस हद तक हमें बोध हो पाता है। शाम कालीन सत्र के समापन पर भक्तों को संबोधित करते हुए सद्गुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज ने भक्तों को बताया कि हमारा यह मानव जीवन अनमोल है। ईश्वर का महान प्रसाद है, यूं ही नहीं मिला है और हम यूं ही नहीं गंवा सकते। हमारे भीतर अनन्त की शक्ति है। ईश्वर ही हमारे भीतर बैठे हैं। हमारे अंदर ज्ञान का अनंत प्रकाश है। आवश्यकता है सद्गुरु युक्ति की , जिसके द्वारा हमारा जीवन निखर जाए, संवर जाए, इसीलिए सत्संग है और इसीलिए अध्यात्म की आवश्यकता है। इसके पूर्व दिन में 11 बजे ‘अ’ अंकित श्वेत ध्वजा रोहण कर 5101 कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ का शुभारंभ किया गया।

यज्ञ के पूर्व यज्ञ की महिमा को बताते हुए संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि वैदिक मंत्रोच्चारण से वातावरण परिशुद्ध हो दिव्य परिवेश का निर्माण होता है। आज हो रहे ग्लोबल वार्मिंग को रोकने का यह एक सशक्त माध्यम है।

इस पर सभी पर्यावरण चिंतकों का ध्यान अवश्य होना चाहिए। 5101 दंपतियों ने एक साथ इस पावन अवसर पर भौतिक एवं आध्यात्मिक उत्थान के निमित वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ कुंड में आहुति को प्रदान किये। भव्य एवं आकर्षक ढंग से सजी 5101 कुण्ड यज्ञ वेदियों में वैदिक मंत्रों की ध्वनि से संपूर्ण वातावरण शुचिता को धारण करते हुए गुंजायमान हो उठा।

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