शेखपुरा के थे ह. मखदूम शाह मु. मुनइम पाक

Shekhapura News - हजरत मखदूम शाह मुहम्मद मुनइम पाक का जन्म शेखपुरा जिले पचना गांव में वर्ष 1671 में हुआ था। आज भी पहाड़ियाें से घिरी...

Bhaskar News Network

Sep 20, 2019, 10:46 AM IST
Shekhapura News - he belonged to sheikhpura makhdoom shah mu munime pak
हजरत मखदूम शाह मुहम्मद मुनइम पाक का जन्म शेखपुरा जिले पचना गांव में वर्ष 1671 में हुआ था। आज भी पहाड़ियाें से घिरी पचना बस्ती में आपका जन्मस्थल श्रद्धा का केंद्र है। आपकी वंशावली एक बड़े सूफी बुजुर्ग हजरत मखदूम शम्सुद्दीन हक्कानी से मिलती है, जिनकी मजार बिलाैरी जिला लखीसराय में माैजूद है। मखदूम हक्कानी महान सूफी हजरत इब्राहिम बिन अदहम बल्खी के वंशज हैं, जाे अबु बिन अदहम के नाम से विख्यात हैं। अपने पैतृकगांव में प्रारंभिक शिक्षा के बाद वह पटना के बाढ़ में स्थित दीवान सैयद अबू सईद जाफर मुहम्मद कादरी की खानकाह पहुंचे। यहां आपने सूफी मत का गूढ़ ज्ञान पाया। फिर आप दिल्ली गए और वहां लगभग 40 वर्षाें तक उच्च शिक्षा चाहनेवाले छात्राें काे शिक्षा दी। वहां पढ़ाने के साथ सूफी बुजुर्ग हजरत ख्वाजा शाह मुहम्मद फरहाद की सेवा की और साधना करते रहे। वहां से लाैटकर मितन घाट आए। फिर ताे दूर-दूर से बड़े-बड़े विद्वान आने लगे और आपसे ईश ज्ञान की प्यास बुझाने लगे। आज भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, बर्मा, और श्रीलंका में इस सिलसिले से संबंधित खानकाहाें की संख्या 150 से अधिक है।

हजरत मखदूम शाह मुहम्मद मुनइम पाक का जन्म शेखपुरा जिले पचना गांव में वर्ष 1671 में हुआ था। आज भी पहाड़ियाें से घिरी पचना बस्ती में आपका जन्मस्थल श्रद्धा का केंद्र है। आपकी वंशावली एक बड़े सूफी बुजुर्ग हजरत मखदूम शम्सुद्दीन हक्कानी से मिलती है, जिनकी मजार बिलाैरी जिला लखीसराय में माैजूद है। मखदूम हक्कानी महान सूफी हजरत इब्राहिम बिन अदहम बल्खी के वंशज हैं, जाे अबु बिन अदहम के नाम से विख्यात हैं। अपने पैतृकगांव में प्रारंभिक शिक्षा के बाद वह पटना के बाढ़ में स्थित दीवान सैयद अबू सईद जाफर मुहम्मद कादरी की खानकाह पहुंचे। यहां आपने सूफी मत का गूढ़ ज्ञान पाया। फिर आप दिल्ली गए और वहां लगभग 40 वर्षाें तक उच्च शिक्षा चाहनेवाले छात्राें काे शिक्षा दी। वहां पढ़ाने के साथ सूफी बुजुर्ग हजरत ख्वाजा शाह मुहम्मद फरहाद की सेवा की और साधना करते रहे। वहां से लाैटकर मितन घाट आए। फिर ताे दूर-दूर से बड़े-बड़े विद्वान आने लगे और आपसे ईश ज्ञान की प्यास बुझाने लगे। आज भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, बर्मा, और श्रीलंका में इस सिलसिले से संबंधित खानकाहाें की संख्या 150 से अधिक है।

सैयद शाह शमीमुद्दीन मुनएमी

सैयद शाह शमीमुद्दीन मुनएमी

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