पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

हर्षोल्लास के साथ मना रंगों का त्योहार होली रंग-अबीर में डूबे रहे शहर से लेकर गांव के लोग

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

आपसी प्रेम व भाईचारे का प्रतीक रंगों का त्योहार होली जिलेभर में मंगलवार को शांतिपूर्ण ढंग संपन्न हुआ। होलिका दहन के बाद लोग होली के रंग में रंग गए, दो दिनों तक रंग-अबीर लगा होली का त्योहार मनाया। शहर से लेकर गांव तक हर उम्र के लोग होली के जश्न में डूबे रहे। कहीं मिट्टी से होली खेली, तो कहीं पारंपरिक फाग, कहीं आधुनिक होली गीत के साथ डीजे पर युवाओं ने जमकर मस्ती की। शाम में अबीर-गुलाल लगा एक दूसरे को शुभकामनाएं दी। ढोल-मजीरा के ताल पर बच्चे से लेकर बुढ़े तक फाग गीत गाकर जमकर झूमे। रंग से सराबोर युवाओं व बच्चों की टोली के नृत्य, गीत आदि ने अन्य लोगों का भी मनोरंजन किया। पूजा-पाठ व देवी देवताओं पर अबीर -गुलाल भी चढ़ाया गया। घरों में पुआ पकवान व अन्य लजीज व्यंजन भी बनाए गए। दोपहर बाद से लोग एक दूसरे के घर जाकर बड़े- बुजुर्गों को अबीर-गुलाल लगा आशीर्वाद लिया, वहीं हम उम्र लोगों से गले मिल बधाई दी। शेखपुरा के अलावा बरबीघा, घाटकुसुम्भा समेत अन्य जगहों पर होली मनाई गई।

जगह-जगह दंडाधिकारी व सुरक्षा बल की रही तैनाती


त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन द्वारा जगह जगह दंडाधिकारी व सुरक्षा बल की तैनाती की गई थी। जिले में 111 से अधिक स्थानों पर दंडाधिकारी व सुरक्षा बल की तैनात किए गए थे। घटनाओं पर नजर रखने के लिए जिला समाहरणालय में कंट्रोल रूम बनाया गया था। जहां पर रिजर्व में दंडाधिकारी व सुरक्षा बल तैनात रहे। ग्रामीण क्षेत्रो में भी रंगों का त्योहार होली शांतिपूर्ण रहा। पारंपरिक तरीके से होली का त्योहार मनाया गया।

अबीर-गुलाल लगा बुजुर्गो से लिया आशीर्वाद


सोमवार की रात होलिका दहन होने के बाद मंगलवार को दिन भर रंगों का दौर चलता रहा। सुबह से ही लोग मित्रों, रिश्तेदारों के यहां पहुंच गए और एक दूसरे को रंग लगाकर होली का उल्लास मनाया। बड़े-बुजुर्गों को अबीर गुलाल लगाकर उनका आशीर्वाद लिया। जगह-जगह पर होली गीत बजते रहे और उस पर युवाओं की टोली थिरकती रही। होली के दौरान बच्चों में खासा उमंग दिखा। बच्चों ने अपने हम उम्र साथियों के साथ पिचकारियों व अन्य माध्यमों से होली के त्योहार का लुत्फ उठाया। दिन भर यही दौर चलता रहा। लोगों का एक दूसरे के घर आना-जाना लगा रहा। होली का उल्लास इतना था कि शहर की सूनी पड़ी सड़कों से जो भी निकला वह पूरी तरह होली के रंगों में रंगा हुआ नजर आया। युवाओं ने अपने साथियों के साथ अलग-अलग तरीकों से त्योहार का लुत्फ उठाया। होली के त्यौहार का आनंद उठाने में महिलाएं भी पीछे नहीं रही। महिलाओं ने भी एक दूसरे को रंग गुलाल लगाते हुए इस त्यौहार का लुफ्त उठाया। कुल मिलाकर हर कोई होली के रंगों से सराबोर नजर आया।


मुस्लिम समाज के लोग भी त्योहार में हुए शामिल

होली का रंग हर किसी पर चढ़कर बोल रहा था और चाहे बच्चे, बूढ़े या जवान सभी लोग इसके रंग में सरोबार दिखे। इस दौरान मुस्लिम समाज के लोग भी होली त्यौहार में शरीक हुए है और एक दूसरे को गुलाल लगाया। वही बच्चियों ने पिचकारी में रंग से लोगों को भिंगोया।

आकर्षक रंगरूप में युवा।

कीचड़-मिट्टी में उमड़ा होली का प्रेम : होली के बाद कई वर्षो से चली आ रही कीचड़ व मिट्टी की होली खेलने की परंपरा शेखपुरा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में मंगलवार को भी निभाई गई। इस अनोखी होली का लोगों ने जमकर आनंद लिया। एक-दूसरे को कीचड़-मिट्टी में सराबोर कर खूब मस्ती किया। सुबह से हीं बच्चे एवं युवाओं ने पहले किचङ खेली फिर दोपहर युवकों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर व गले मिलकर होली की शुभकामनाएं दी और होली के दीवाने कीचड़ में होली खेलते नजर आए।

पारंपरिक होली में डूबे लोग 

परंपरागत तरीके से लोगों ने खेली होली : डीहकुसुम्भा में होलिका दहन के दूसरे दिन कीचड़-मिट्टी से होली खेलने की परंपरा चली आ रही है। जिसमें इस तरह की होली खेलने वाले ग्रामीण जगह-जगह मिट्टी में पानी डालकर दलदल का रूप देने का बाद एक-दूसरे को उसमें सराबोर करते हैं। शेखपुरा के बुधौली, गिरहिण्डा,गोल्डेन चौक, चांदनी चौक, कटरा चौक सहित घाटकुसुम्भा के डीहकुसुम्भा, भदौसी,कोयला, बाउंघाट, पानापुर, सुजावलपुर, गदबदिया, माफो, गगौर आदि मुहल्लों में कीचड़ व मिट्टी से होली खेलने वाले लोग सबेरे से ही बाहर निकल आये। कीचड़ की होली शुरू होते ही बाजार के दुकानदार दुकानें बंद कर अपने घरों की छत पर चढ़ गये और ऊपर से होली का नजारा देखने लगे।

होली के जश्न में डूबे लोग।

खबरें और भी हैं...